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संस्कृत के इन श्लोंको में छुपी है सफलता की गारंटी, रुकी हुई जिंदगी को मिलेगी जबरदस्त रफ्तार

Sanskrit Slokas For Success With Hindi Meaning : किसी काम की सफलता उसमें लगन और आपके भाग्य पर निर्भर करती है। यदि आप जीवन में रुकावटों को दूर कर सफलता की सीढ़ियां चढ़ना चाहते हैं, तो आपको कुछ संस्कृत श्लोंकों को याद कर लेना चाहिए। इन श्लोकों में सफलता का रहस्य छुपा है।

Sanskrit Shlokas for Success

Sanskrit Slokas For Success With Hindi Meaning : संस्कृत सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। यही कारण है कि आज इसे सभी भाषाओं की जननी भी कहा जाता है। इस भाषा की विशेषता है कि ये भाषा जितनी प्राचीन है उनती ही वैज्ञानिक भी है। संस्कृत के मंत्रों का उच्चारण हमारे जीवन के प्रत्येक महत्वपूर्ण पड़ाव पर किया जाना अनिवार्य माना जाता है। वहीं यदि आप अपने जीवन में कहीं रुकावट महसूस करते हैं तो संस्कृत में में ऐसे कई श्लोक मौजूद हैं जो आपको प्रेरणा दे सकते हैं। आइए देखते हैं कुछ मोटिवेशनल संस्कृत श्लोक

1. उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा:।।

अर्थ – व्यक्ति के मेहनत करने से ही उसे सफलता मिलती है न कि केवल काम की इच्छा करने से उसके काम पूरे होते है। जैसे सोते हुए शेर के मुंह में हिरण अपने आप चलकर नहीं आता है, बल्कि उसके लिए शेर को परिश्रम करना पड़ता है।

2. उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत। क्षुरासन्नधारा निशिता दुरत्यद्दुर्गम पथस्तत्कवयो वदन्ति॥

अर्थ - उठो, जागो, और अपने लक्ष्य को प्राप्त करो। तेरे रास्ते कठिन जरूर हैं, और वे काफी दुर्गम भी हो सकते हैं, लेकिन विद्वानों का मत हैं कि कठिन रास्तों पर चलकर ही सफलता प्राप्त होती है।

3. प्रभूतंकार्यमल्पंवातन्नरः कर्तुमिच्छति। सर्वारंभेणतत्कार्यं सिंहादेकंप्रचक्षते॥

अर्थ - जैसे कोई शेर एकाग्रता और पूरी ताकत के साथ अपना शिकार करता है और उसकी सफलता निश्चित होती है। ठीक उसी प्रकार हमें भी अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए भी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर पूरी मेहनत के साथ प्रयास करना चाहिए।

4. काक चेष्टा बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च।अल्पहारी गृह त्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं ॥

अर्थ- कौवे की तरह जानने की चेष्टा करने वाला, बगुले की तरह ध्यान लगाने वाला, कुत्ते की तरह निंद्रा लेने वाला जो हल्की सी आहट से जग जाता है, अल्पाहारी यानि कम खाने वाला और गृह-त्यागी यानी घर से दूर रहने वाला। एक विद्यार्थी में यह पांच लक्षण होने चाहिए।

5. विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्। पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात् धर्मं ततः सुखम्॥

अर्थ - विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है, धन से धर्म होता है, और धर्म से ही सुख की प्राप्ति होती है।

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गुलशन कुमार
गुलशन कुमार Author

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लो... और देखें

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