Smavidhan Shayari in Hindi: करीब डेढ़ अरब की आबादी वाला भारत देश आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। साल 1950 में आज के ही दिन भारत ने अपना संविधान लागू किया था। डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को जो भारतीय संविधान लिखा उसे 26 जनवरी 1950 से अमल में लाया गया। यह संविधान हर हिंदुस्तानी को समानता का अधिकार देता है। आज गणतंत्र दिवस के खास मौके पर भारतीय संविधान को याद करना भी जरूरी है। आइए पढ़ते हैं संविधान पर शायरी हिंदी में:
1. हर किसी के हितों की रक्षा हो, ऐसा विधान है,
सबको जोड़कर रखे, ऐसा भारत का संविधान है।
2. आजादी मिली तो संग में, नियम भी साथ लाए,
अधिकारों की डोर थमाई, कर्तव्य भी समझाए।
ये धरोहर है देश की, इसे संभाल कर रखना है,
3. जो लिखता है किस्मत देश की, वो न्याय का विधान है,
हर गरीब की आशा है ये, हर व्यक्ति का अरमान है।
भरोसा रखिए इस व्यवस्था पर, ये सबसे बलवान है,
संविधान हम भारतीयों का प्यार भरा पैगाम है।
4. ये धरती है हमारी, और संविधान हमारा गर्व है,
कर्तव्यों का पालन करें, यही सबसे बड़ा पर्व है।
5. कल का सपना आज बुना है, इस पवित्र दस्तावेज में,
देश चले उन्नति के पथ पर, हर कदम के हर फेज में।
आइए मिलकर वादा करें, इसकी गरिमा बनाए रखेंगे,
संविधान लागू होने की खुशियां, मिलकर ही मनाएंगे।
6. अधिकारों की रोशनी है...ये संविधान की किताब,
हम सबको है प्यारा... ये हिंदुस्तान का ख्वाब।
7. नियमों की माला से गूंथा, हर अक्षर है अनमोल,
इसकी रक्षा का वचन लो, फिर बजाओ जश्न का ढोल।
गर्व है हमें भारतीय होने पर, गर्व है अपने संविधान पर।
8. जिन्होंने दिया अधिकार हमें, उस शिल्पकार को याद करें,
अंबेडकर जी की मेहनत को, हर पल फरियाद करें।
9. तिरंगे की शान है जिसमें, वो हमारा संविधान है,
हर मजहब, हर जाति का यहां, बराबर सम्मान है।
जुटकर रहें हम सब, यही इसकी सबसे बड़ी बात है,
संविधान की रोशनी, हर दिल को करती आबाद है।
10. जो लिखता है किस्मत देश की, वो न्याय का विधान है,
हर गरीब की आशा है ये, हर व्यक्ति का अरमान है।
बता दें कि हमारा संविधान केवल नियमों और कानूनों का संग्रह नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जीवंत प्रेरणा है। इसके निर्माण में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे और इस ऐतिहासिक कार्य में डॉ. भीमराव आंबेडकर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
संविधान हमें समानता, न्याय और स्वतंत्रता के मूल्यों से जोड़ता है। यह सिखाता है कि मतभेदों के बावजूद कैसे हम एकजुट रहकर देश की प्रगति के लिए काम कर सकते हैं। साथ ही यह हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ नागरिक कर्तव्यों का भी बोध कराता है, ताकि हम जिम्मेदार और सजग नागरिक बन सकें।
