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Sahir Ludhianvi Shayari: वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बरबाद किया है, इल्ज़ाम किसी और के सर जाए तो अच्छा.., पढ़ें साहिर लुधियानवी की 20+ फेमस शायरी

Sahir Ludhianvi Shayari in Hindi(साहिर लुधियानवी शायरी हिंदी में pdf): फनकारी की दुनिया में साहिर लुधियानवी एक मशहूर नाम रहे हैं। 8 मार्च 1921 को लुधियाना में जन्मे साहिर लुधियानवी मसऊदी का असली नाम अब्दुल हयी और तखल्लुस साहिर है। आज 'इऱशाद' में पढ़े साहिर की कलम से निकले उनके कुछ चुनिंदा शेर।

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Sahir ludhinavi 20+ famous Shayari in Hindi 2 line

Sahir Ludhianvi Shayari in Hindi(साहिर लुधियानवी शायरी हिंदी में): इश्क हो, इंकलाब हो या फिर जिंदगी का फलसफा साहिर लुधियानवी ने जिस जज्बात पर कलाम चलाया उसे सोना कर दिया। साहिर की शायरी की सबसे खास बात ये रही है कि वो सीधे सुनने पढ़ने वाले के दिल को छूती है। 8 मार्च 1921 को लुधियाना में जन्मे साहिर लुधियानवी मसऊदी का असली नाम अब्दुल हयी और तखल्लुस साहिर है। साहिर ने हमेशा अपनी कलम से वही शब्द निकाले जिससे सुनने वाला आसानी से जुड़ जाए। इसी कारण साहिर ने नज्मों की दुनिया में बाकी के शायरों से अलग मुकाम हासिल किया। साहिर लुधियानवी ने जो शायरियां लिखीं उनमें ना सिर्फ लोगों के जज्बात झलके बल्कि उन्हें समझौतों की अहमियत भी पता चली। उनकी शायरी में एक उम्मीद झलकती थी। आइए डालते हैं साहिर की कलम से निकले चंद बेहतरीन शायरियों पर एक नजर:

Sahir Ludhianvi Best Shayari In Hindi | साहिर लुधियानवी की शायरी

वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन

उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा…

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया

बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया

ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहां

मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया

Urdu Poetry: Sahir Ludhianvi Shayari

अभी न छेड़ मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिब

अभी हयात का माहौल ख़ुश-गवार नहीं

हम ग़म-ज़दा हैं लाएं कहां से ख़ुशी के गीत

देंगे वही जो पाएंगे इस ज़िंदगी से हम

अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं

तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी

Sahir Ludhianvi Hindi Shayari

ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है

क्यूं देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम

बर्बादियों का सोग मनाना फ़ुज़ूल था

बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया

माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके

कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम

इस तरफ़ से गुज़रे थे क़ाफ़िले बहारों के

आज तक सुलगते हैं ज़ख़्म रहगुज़ारों के

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वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बरबाद किया है

इल्ज़ाम किसी और के सर जाए तो अच्छा

संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है

इक धुंद से आना है इक धुंद में जाना है

जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है

जंग क्या मसअलों का हल देगी

अरे ओ आसमां वाले बता इस में बुरा क्या है

ख़ुशी के चार झोंके गर इधर से भी गुज़र जाएं

तिरी दुनिया में जीने से तो बेहतर है कि मर जाएं

वही आंसू वही आहें वही ग़म है जिधर जाएं

पेड़ों के बाज़ुओं में महकती है चांदनी

बेचैन हो रहे हैं ख़यालात क्या करें

ज़मीं सख़्त है आसमां दूर है

बसर हो सके तो बसर कीजिए

किस दर्जा दिल-शिकन थे मोहब्बत के हादसे

हम ज़िंदगी में फिर कोई अरमां न कर सके

राह कहां से है ये राह कहां तक है

ये राज़ कोई राही समझा है न जाना है

ये भोग भी एक तपस्या है तुम त्याग के मारे क्या जानो

अपमान रचियता का होगा रचना को अगर ठुकराओगे

यूं ही दिल ने चाहा था रोना-रुलाना

तिरी याद तो बन गई इक बहाना

बता दें कि साहिर ने ना सिर्फ मुशायरों और पत्रिकाओं के लिए बल्कि हिंदी फिल्मों के लिए भी एक से बढ़कर एक कई कालजयी गीत लिखे। उन्होंने 'बाजी', 'प्यासा', 'फिर सुबह होगी', 'कभी कभी' जैसी हिट फिल्मों के लिये गीत लिखे।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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