Rajiv Gandhi Birth Anniversary: आज राजीव गांधी की जयंती है। उनका जन्म 20 अगस्त, 1944 को मुंबई में हुआ था। नेहरू-गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत में जन्मे राजीव गांधी का पहला प्यार राजनीति कभी भी नहीं रही। वह पायलट थे। आसमान में उड़ना उनका शगल था। हालांकि हर इंसान के लिए नियति पहले से तय रहती है। राजीव गांधी के साथ भी ऐसा ही हुआ।
राजीव गांधी की जिंदगी बहुत कम समय में कई बिल्कुल अलग-अलग मोड़ों से गुजरी। वो ऐसे पायलट थे जिन्हें ना चाहते हुए भी राजनीति में आना पड़ा। प्रधानमंत्री बने, लोकप्रियता हासिल की। कुछ दाग भी लगे। 21 मई 1991 को राजनैतिक रैली में उनकी हत्या कर दी गई।
इन तमाम पहचानों के बीच राजीव गांधी की एक और पहचान थी, जिसके बारे में बहुत कम बात होती है। वह फोटोग्राफी किया करते थे। फोटो खींचना उनके लिए शौक से थोड़ा ज्यादा और जुनून से थोड़ा कम था। वह पायलट या प्रधानमंत्री बनने से पहले से इस शौक को जी रहे थे। आगे भी जीते रहे। अपनी खींची गई तस्वीरों में राजीव गांधी खुद को उस इंसान के तौर पर सामने रखते हैं जिसपर शायद कम ही बातें हुई।

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कैमरे के पीछे खड़े राजीव
राजीव गांधी के निधन के करीब 3 साल बाद एक किताब आई। किताब का नाम था- Rajiv's World: Photographs by Rajiv Gandhi। यह किताब कैमरे के पीछे खड़े राजीव गांधी को लोगों के सामने रखती है। इस पिक्चर बुक को सोनिया गांधी नें साल 1994 में पब्लिश करवाई थी।
इस किताब में राजीव के बचपन से लेकर जीवन के अंतिम कुछ सालों की तस्वीरें हैं। यह एक तरह की बिना शब्दों वाली आत्मकथा है। इसमें राजीव गांधी ने अपने बारे में कोई संस्मरण नहीं लिखा। फिर भी उनके कैमरे ने उनके लिए बहुत कुछ कह दिया। राजीव गांधी की राजनीति उनके बारे में जितना कहती है, उससे कहीं ज्यादा ये तस्वीरें उनके बारे में बताती हैं।

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अपनी तस्वीरें नहीं छपवाना चाहते थे राजीव गांधी
राजीव गांधी बहुत अच्छी फोटोग्राफी किया करते थे। उनके तमाम करीबियों ने उनसे कई बार कहा कि वो अपनी तस्वीरों की किताब पब्लिश करवा लें। हालांकि राजीव गांधी इससे इत्तेफाक नहीं रखते थे। वो अपनी तस्वीरें पब्लिक नहीं करना चाहते थे।
इंडिया टुडे की साल 1994 की एक रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र है कि, प्रकाशकों ने उन्हें कई बार तस्वीरों की किताब निकालने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन वह तैयार नहीं हुए। उनके लिए फोटोग्राफी प्रचार का माध्यम नहीं थी। वह इसे निजी खुशी के रूप में देखते थे। अपनी पसंद की तस्वीरों के बड़े प्रिंट करवाकर उन्हें अपने स्टडी रूम में लगाते थे।
कैमरे में कैद प्यार और परिवार
राजीव गांधी के निधन के बाद सोनिया गांधी ने उनकी तस्वीरें पब्लिश करवाने का फैसला किया। वो चाहती थीं कि दुनिया उस राजीव गांधी को भी जाने जिससे वो हमेशा अनजान रही। सोनिया ने इस किताब में राजीव गांधी के कैमरे से ली गई हर रंग और मिजाज की तस्वीरें पब्लिश करवाई। इन तस्वीरों में नदी, पहाड़ और झरने हैं तो देश, उम्मीद और मासूमियत भी।

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राजीव गांधी को जानने वाले लोग कहते हैं कि वो पूरी तरह से फैमिली मैन थे। उनके लिए उनका परिवार बेहद करीब थी। उनकी फोटोग्राफी में भी परिवार के लिए उनका प्यार साफ दिखाई देता है। उनके कैमरे में कभी रसोई में काम करीतं इंदिरा गांधी कैद हुईं तो कभी मस्ती करते भाई संजय गांधी। घर में पत्नी सोनिया और बच्चे राहुल-प्रियंका उनकी सबसे ज्यादा तस्वीरों में शामिल हैं। सोनिया गांधी ने Rajiv's World की प्रस्तावना में भी लिखा है कि हम तीनों राजीव के कैमरे को सबसे ज्यादा पसंद थे।
सोनिया गांधी ने ये भी लिखा है कि यूं तो वो तस्वीरें खिंचवाने में काफी संकोच करती थीं, लेकिन जब कैमरे के पीछ राजीव हों तो सहजता अपने आप आ जाती। बकौल सोनिया, राजीव गांधी घंटों कैमरे से परिवार की तस्वीरें खींचते रहते।

(फोटो सोर्स: फ्लिपकार्ट)
तस्वीरों से झांकता हिंदुस्तान
राजीव गांधी के कैमरे ने उस हिंदुस्तान को भी अपने अंदर समेटा जिन्हें राजनीति आंकड़ों में देखती है। उनकी तस्वीरों में राजस्थान है, कश्मीर है, सिक्किम है, लद्दाख है तो पुष्कर का मेला भी है। गांव के लोगों और आदिवासियों की जिंदगी भी है। जंगल, जीव और खूबसूरत हिंदुस्तान भी है। इन तस्वीरों को ध्यान से देखेंगे तो इनमें अपना देश लोगों के चेहरों में, बाजारों में, मेलों में, पहाड़ों में मुस्कुराता दिखेगा।
राजनीति में तस्वीर कभी सिर्फ तस्वीर नहीं होती। प्रधानमंत्री की हर तस्वीर का संदेश दूर तक जाता है। वो किसके साथ खड़े हैं, किससे हाथ मिला रहे हैं, किस जगह गए, किसे गले लगाया या किस तरफ देख रहे हैं? हर चीज का राजनीतिक अर्थ निकाला जा सकता है। राजीव गांधी की खींची तस्वीरें इस दबाव से परे थीं। कैमरे ने उन्हें हमेशा पद से आजाद रखा।
नॉन पॉलिटिकल राजीव गांधी को समझने के लिए एक और चर्चित किताब है- द राजीव आई न्यू (The Rajiv I Knew)। इस किताब को उनके करीबी सहयोगी और राजनेता मणि शंकर अय्यर ने लिखा है। अय्यर ने राजीव गांधी के साथ काम किया था, उनके फैसलों को करीब से देखा था और उनके व्यक्तित्व की खूबियों और कमजोरियों दोनों को समझने की कोशिश की। उनकी किताब का मूल तर्क ही यह है कि राजीव गांधी को अक्सर सही तरीके से समझा नहीं गया। यही बात उनकी फोटोग्राफी के मामले में भी दिखाई देती है।

(फोटो सोर्स: Priyanka Gandhi/Instagram)
21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। वो दुनिया छोड़ गए। निधन के तीन साल बाद उनकी तस्वीरें छपीं। तस्वीरों के जरिए लोगों ने पहली बार उस राजीव को देखा, जिसकी दुनिया में परिवार था, बच्चे थे, पहाड़ थे, जंगल थे और भारत के दूर-दराज इलाकों की सादगी थी। सोनिया गांधी ने उन तस्वीरों के जरिए अपने दिवंगत पति और उनके व्यक्तित्व का वह पक्ष बचा लिया, जो शायद राजनीतिक पहचान के भार में दबकर हमेशा के लिए कहीं खो जाता।
