Rahat Indori Shayari in Hindi 2 lines (राहत इंदौरी की शायरी 2 लाइन): राहत इंदौरी का नाम भारत के चुनिंदा बेहद लोकप्रिय शायरों में शुमार है। भले वह अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी शायरी के दीवाने मौजूद हैं। राहत इंदौरी ने अपनी शायरी में हर इंसानी जज्बात को बेहद करीने से छुआ। उन्होंने अपनी शायरी से लोगों से सवाल भी पूछे। ये सवाल ना सिर्फ समाज से पूछे बल्कि सरकारों को भी शामिल किया। राहत इंदौरी की शायरी में एक अलग सी सादगी और मजबूत संदेश दिखता था। उनके शेर ऐसे थे कि सुनने वाला उसी में डूब कर रह जाता। राहत इंदौरी का अंदाज-ए-बयां भी काफी कमाल था। आइए पढ़ते हैं राहत इंदौरी की कलम से निकले कुछ चुनिंदा शेर:
Rahat Indori Famous Shayari in Hindi
1. माचिस की जरूरत यहां नहीं पड़ती,
यहां आदमी आदमी से जलता है।
2. अगर खिलाफ है होने दो, जान थोड़ी है,
ये सब धुआं है, कोई आसमान थोड़ी है।
3. आंखों में पानी रखो, होठों पे चिंगारी रखो,
जिन्दा रखना है तो तकलीफें बहुत सारी रखो,
4. राह के पत्थर से बढ़ कर, कुछ नहीं हैं मंजिलें,
रास्ता आवाज देती है, सफर जारी रखो।
5. जाने मुझको क्या सूझी है शब्दों की अंगड़ाई में,
मीर की गज़लें ढूंढ़ रहा हूं तुलसी की चौपाई में।
6. मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता,
यहां हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी।
Rahat Indori Shayari Lagegi aag
7. जो दौर है दुनिया का उसी दौर से बोलो,
बहरों का इलाका है जरा जोर से बोलो।
8. अकेला खुश हूं मैं परेशान मत कर,
इश्क़ है तो इश्क़ कर, एहसान मत कर।
9. घर के बाहर ढूंढ़ता रहा दुनिया,
घर के अंदर दुनियादारी मिली।
10. अब तो ना हूं मैं और ना ज़माने मेरे,
फिर भी मशहूर है शहरों में फ़साने मेरे।
11. जो ज़ाहिर करना पड़े, वह दर्द कैसा,
और जो दर्द न समझ सका, वो हमसफ़र कैसा।
12. मर्द ने हर बार मोहब्बत की आजमाइश मैं,
अभी काबिलियत के नज़ाने दिए है।
Rahat Indori Shayari 2 line
13. ऊंचे ऊंचे दरबारों से क्या लेना,
नंगे भूखे बेचारों से क्या लेना,
अपना मालिक ऊपर वाला है,
आते जाते लोगों से क्या लेना।
14. दर्द, दुआ, ख्वाब, दवा, जहर जाम क्या क्या है,
मैं आ रहा हूं, बता इंतजाम क्या क्या है।
15. जुबान तो खोल, नज़र तो मिला, जवाब तो दे,
मैं कितनी बार लुटा हूं, हिसाब तो दे,
तेरे बदन की लिखावट में, है उतार चढ़ाव,
मैं तुझे कैसे पढूंगा, मुझे किताब तो दे।
16. बुलाती है मगर जाने का नहीं,
ये दुनिया है, इधर जाने का नहीं,
मेरे बेटे इश्क़ कर मगर,
हद से गुजर जाने का नहीं।
बता दें कि राहत इंदौरी का जन्म 1 जनवरी, 1950 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। वह बेहद साधारण परिवार में पले बढ़ें। उन्हें शायरी का शौक वैसे तो बचपन से ही था पर उनकी शायरी यात्रा उनके कॉलेज के दिनों के दौरान शुरू हुई थी।
