Sleep Psychology: क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तरीके से आप सोते हैं, वह आपकी पर्सनैलिटी के बारे में भी बहुत कुछ बता सकता है? साइकोलॉजी और स्लीप रिसर्च से जुड़े कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इंसान की सोने की आदतें उसके स्वभाव, सोच और इमोशनल बिहेवियर से जुड़ी हो सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि यह कोई पूरी तरह वैज्ञानिक नियम नहीं है, लेकिन कई रिसर्च में सोने की पोजिशन और व्यक्तित्व के बीच दिलचस्प संबंध जरूर पाए गए हैं।
पीठ के बल सोने वाले लोग कैसे होते हैं?
जो लोग पीठ के बल सोना पसंद करते हैं, उन्हें अकसर आत्मविश्वासी और अनुशासित माना जाता है। ऐसे लोग अपनी जिंदगी में स्पष्टता और नियंत्रण पसंद करते हैं। वे छोटी-छोटी बातों में उलझने के बजाय बड़े लक्ष्यों पर ध्यान देते हैं। कई रिसर्च में यह भी बताया गया है कि ऐसे लोग महत्वाकांक्षी और पॉजिटिव सोच वाले हो सकते हैं।
हाथ पैर फैलाकर सोने वाले
अगर कोई व्यक्ति स्टारफिश पोजिशन में सोता है यानी हाथ-पैर फैलाकर, तो उसे अच्छा दोस्त और अच्छा श्रोता माना जाता है। ऐसे लोग अक्सर दूसरों की मदद करना पसंद करते हैं।
करवट लेकर सोने वालों की पर्सनैलिटी
करवट लेकर सोने वाले लोग आमतौर पर शांत, मिलनसार और भरोसेमंद माने जाते हैं। वे दूसरों के साथ आसानी से घुल-मिल जाते हैं और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में माहिर होते हैं।
तकिये को गले लगा कर सोने वाले
वहीं अगर कोई व्यक्ति करवट लेकर सोते समय तकिये को गले लगाता है, तो यह उसके भावुक और रिश्तों को महत्व देने वाले स्वभाव की ओर इशारा कर सकता है। ऐसे लोग अपने करीबियों के साथ गहरे भावनात्मक जुड़ाव को पसंद करते हैं।
भ्रूण जैसी पोजिशन में सोना क्या बताता है?
कई लोग सोते समय शरीर को सिकोड़कर बिल्कुल बच्चे की तरह मुड़ जाते हैं। इसे फीटल पोजिशन कहा जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसे लोग बाहर से मजबूत दिख सकते हैं, लेकिन अंदर से काफी संवेदनशील होते हैं। उन्हें भावनात्मक सुरक्षा और अपनापन ज्यादा पसंद होता है। नए लोगों पर भरोसा करने में इन्हें समय लग सकता है।
पेट के बल सोने वाले लोग
जो लोग पेट के बल सोते हैं, उन्हें अकसर खुले विचारों वाला और बेबाक माना जाता है। ये लोग अपनी बात स्पष्ट तरीके से कहना पसंद करते हैं। हालांकि कुछ रिसर्च यह भी बताती हैं कि ऐसे लोगों के भीतर तनाव या असुरक्षा की भावना छिपी हो सकती है।
क्या यह पूरी तरह सच है?
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की पोजिशन और पर्सनैलिटी के बीच संबंध दिलचस्प जरूर हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह वैज्ञानिक सत्य नहीं माना जा सकता। कई बार शरीर की तकलीफ, आदतें, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हमारी स्लीपिंग पोजिशन तय करते हैं।
फिर भी यह बात काफी रोचक है कि हमारी सोने की छोटी-छोटी आदतें भी हमारे व्यक्तित्व की झलक दिखा सकती हैं। शायद इसलिए कहा जाता है कि इंसान सोते समय सबसे ज्यादा असली होता है।
