Psychology of favourite Mug: हम में से बहुत से ऐसे लोग होंगे जो डेली अपने फेवरेट कप या मग में ही चाय-कॉफी पीते होंगे। हमारा हाथ हमेशा पुराने हो चुके उसी मग की तरफ क्यों जाता है। क्या यह सिर्फ आदत है या इसके पीछे कोई मनोवैज्ञानिक कारण भी छिपा है? विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवहार बिल्कुल सामान्य है और इसका संबंध हमारी यादों, भावनाओं और दिमाग के काम करने के तरीके से जुड़ा है।
मनोविज्ञान में इसे 'इमोशनल अटैचमेंट' कहा जाता है। हम कई बार किसी वस्तु को उसकी कीमत या खूबसूरती की वजह से नहीं, उससे जुड़ी यादों के कारण पसंद करते हैं। हो सकता है वह मग आपको किसी दोस्त ने गिफ्ट किया हो, किसी खास सफर से खरीदा गया हो या फिर जीवन के किसी खूबसूरत दौर का साथी रहा हो। हर बार उसे हाथ में लेने पर दिमाग उन यादों को दोबारा महसूस करता है। यही वजह है कि साधारण-सा दिखने वाला मग भी हमारे लिए खास बन जाता है।
बिहेवियरल साइंस की मानें तो हमारा मस्तिष्क उन चीजों को ज्यादा पसंद करता है, जिनसे वह पहले से परिचित होता है। इसे 'फैमिलियारिटी इफेक्ट' (Familiarity Effect) कहा जाता है।
जिस मग का वजन, आकार और हैंडल पकड़ने का तरीका आपको अच्छी तरह पता होता है, उसे इस्तेमाल करते समय दिमाग को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। यही कारण है कि हम अनजाने में उसी विकल्प को बार-बार चुन लेते हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: कुछ लोग हर उंगली में अंगुठी क्यों पहनते हैं
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि हमारी सुबह की कई छोटी आदतें एक तरह का डेली रिचुअल बन जाती हैं। जैसे कुछ लोग एक ही जगह बैठकर अखबार पढ़ते हैं या एक ही गाने से दिन की शुरुआत करते हैं। उसी तरह एक पसंदीदा मग में चाय या कॉफी पीना भी दिमाग को यह संकेत देता है कि दिन की शुरुआत हो चुकी है। ऐसी छोटी-छोटी दिनचर्याएं तनाव कम करने और मानसिक स्थिरता बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।
क्या यह सिर्फ वहम है कि उसी मग में चाय ज्यादा स्वादिष्ट लगती है?
दिलचस्प बात यह है कि कई लोगों को सचमुच ऐसा महसूस होता है कि उनके पसंदीदा मग में चाय या कॉफी का स्वाद बेहतर लगता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि स्वाद केवल जीभ से नहीं, दिमाग से भी जुड़ा होता है। जब किसी वस्तु से सकारात्मक भावनाएं जुड़ी होती हैं, तो हमारा अनुभव भी अधिक सुखद महसूस हो सकता है। स्वाद में अंतर हमेशा हमारी मानसिक अनुभूति का भी हो सकता है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: हर किसी पर अलग-अलग तरह से क्यों महकता है परफ्यूम
कब बन सकती है यह आदत समस्या?
अगर किसी खास मग के बिना आपका दिन शुरू ही नहीं हो पाता या उसके न मिलने पर आप बेचैन हो जाते हैं, तो यह जरूरत से ज्यादा भावनात्मक निर्भरता का संकेत हो सकता है। हालांकि सामान्य परिस्थितियों में किसी पसंदीदा वस्तु से लगाव पूरी तरह स्वाभाविक माना जाता है।
हमारे पसंदीदा मग की कहानी सिर्फ चाय या कॉफी की नहीं होती। उसमें हमारी यादें और पुरानी भावनाएं भी लिपटी होती हैं। यही कारण है कि महंगे और नए कप अलमारी में रखे रह जाते हैं, जबकि हाथ बार-बार उसी पुराने, भरोसेमंद मग तक पहुंच जाता है। तभी तो किसी विद्वान ने ये कहा है कि कभी-कभी इंसान चीजों को नहीं चुनता, बल्कि उनसे जुड़ी भावनाएं उसके चुनाव तय करती हैं।
