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Parenting: गोद लिये बच्चे को सच बताना जरूरी है? अगर हां तो क्या है बताने का सही समय

Parenting Tips for Adopted Child: गोद लिए जाने का सच बताना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है बच्चे को यह एहसास दिलाना कि वह इस परिवार की पसंद, खुशी और प्यार का हिस्सा है।

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गोद लिये बच्चे को सच कब और कैसे बताएं (AI Image)

Parenting Tips for Adopted Child: अपनी सूने घर को नन्हीं मुस्कुराहट से आबाद करने के लिए बहुत से कपल्स बच्चा गोद लेते हैं। गोद लिये हुए बच्चे पर ऐसे मां-बाप अपनी पूरी दुनिया निसार कर देते हैं। वो चाहते हैं कि जमाने भर की खुशियां बच्चे के दामन में भर जाएं। लेकिन बच्चा गोद लेने वाले कपल्स के मन में हमेशा एक सवाल जरूर आता है कि क्या बच्चे को यह बताना चाहिए कि वह गोद लिया गया है? अगर हां, तो कब और कैसे?

इस मुद्दे पर हमने कई विशेषज्ञों की सलाह पढ़ी। लगभग हर एक्सपर्ट का मानना है कि बच्चे को उसकी पहचान से जुड़ा सच बताना जरूरी है, लेकिन इसे सही समय और सही तरीके से बताया जाना चाहिए।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चे को उसके गोद लिए जाने की जानकारी छिपाने के बजाय धीरे-धीरे और संवेदनशील तरीके से बताना बेहतर होता है। अगर बच्चा यह बात किसी और से या अचानक जानता है तो वह भवानत्मक रूप से आहत महसूस कर सकता है। वहीं दूसरी तरफ अगर सच माता-पिता की तरफ सेबताया जाता है, तो बच्चे के मन में भरोसा मजबूत होता है और वह अपनी पहचान को सहज रूप से स्वीकार कर पाता है।

बताने का सही समय क्या है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बातचीत के लिए कोई एक तय उम्र नहीं होती, लेकिन 8 से 10 साल की उम्र के बीच बच्चे को उससे जुड़ी हकीकत सरल भाषा में बताना शुरू किया जा सकता है।

इस उम्र में बच्चे रिश्तों और परिवार की अवधारणाओं को समझने लगते हैं। उन्हें यह बताया जा सकता है कि हर परिवार बनने का तरीका अलग होता है और उन्हें बहुत प्यार से अपने परिवार का हिस्सा बनाया गया है। किशोरावस्था तक यह जानकारी पूरी तरह स्पष्ट हो जानी चाहिए, ताकि पहचान से जुड़े सवालों का सामना बच्चा आत्मविश्वास के साथ कर सके।

कैसे बताएं यह सच?

बात करते समय तुम हमारे सगे बच्चे नहीं हो जैसी भाषा से पूरी तरह बचें। इसके बजाय यह बताएं कि परिवार खून के रिश्तों से ही नहीं, बल्कि प्यार और अपनापन से भी बनते हैं। बच्चे को यह महसूस कराना जरूरी है कि गोद लिया जाना उसकी कहानी का एक हिस्सा है, उसकी पहचान की कमी नहीं।

किन बातों का रखें ध्यान?

सच को राज न बनाएं

अगर गोद लिए जाने की बात को हमेशा छिपाकर रखा जाएगा, तो बच्चा इसे कोई नकारात्मक या शर्म की बात समझ सकता है।

बच्चे की सवालों का ईमानदारी से जवाब दें

सच जानने के बाद बच्चे के मन में कई सवाल आ सकते हैं। उसे खुलकर बात करने का मौका दें और उसकी भावनाओं को गंभीरता से सुनें।

अपनेपन में ना आए कमी

बच्चे को कभी यह महसूस न होने दें कि वह परिवार का अलग सदस्य है। उसे वही प्यार, सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए जो किसी भी बच्चे को मिलती है।

गोद लिए जाने का सच बताना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है बच्चे को यह एहसास दिलाना कि वह इस परिवार की पसंद, खुशी और प्यार का हिस्सा है। आखिरकार, एक बच्चे के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह नहीं होता कि वह परिवार में कैसे आया, बल्कि यह होता है कि उसे कितना प्यार और अपनापन मिला।

Suneet Singh
सुनीत सिंह author

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ... और देखें

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