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Navratri 2025: दस्तक दे चुकी है नवरात्रि, पढ़ें मां की महिमा पर चंद खूबसूरत शेर

बात जब भी मां की होती है तो इस धरती पर देवी का दूसरा रूप हमारी मां ही होती है। इस इंसान रूपी मां की महिमा पर बहुत कुछ लिखा और कहा गया है। आइए यहां पढ़ते हैं धरती पर देवी के दूसरे रूप मां पर लिखे चंद खूबसूरत शेर:

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दस्तक दे चुकी है नवरात्रि, पढ़ें मां की महिमा पर चंद खूबसूरत शेर (Photo: AI Image)

नवरात्रि का पावन पर्व दस्तक दे चुका है। सोमवार 22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो जाएगा। नवरात्रि का यह मौका मां दुर्गा की आराधना का होता है। इस पर्व में मां शक्ति के नौ स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है। मां की महिमा के गीत गाए जाते हैं। कन्याओं को पूजा जाता है। बात जब भी मां की होती है तो इस धरती पर देवी का दूसरा रूप हमारी मां ही होती है। इस इंसान रूपी मां की महिमा पर बहुत कुछ लिखा और कहा गया है। आइए यहां पढ़ते हैं धरती पर देवी के दूसरे रूप मां पर लिखे चंद खूबसूरत शेर:

1. मांगने पर जहां पूरी हर मन्नत होती है,

मां के पैरों में ही तो वो जन्नत होती है

2. एक दुनिया है जो समझाने से भी नहीं समझती,

एक मां थी बिन बोले सब समझ जाती थी

3. गम हो, दुःख हो या खुशियां

मां जीवन के हर किस्से में साथ देती है,

खुद सो जाती है भूखी

पर और बच्चों में रोटी अपने हिस्से की बांट देती है

4. कल अपने-आप को देखा था मां की आंखों में

ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है

-मुनव्वर राना

5. एक मुद्दत से मेरी मां नहीं सोई 'ताबिश'

मैंने इक बार कहा था मुझे डर लगता है

-अब्बास ताबिश

6. वो लम्हा जब मेरे बच्चे ने मां पुकारा मुझे

मैं एक शाख़ से कितना घना दरख़्त हुई

-हुमैरा रहमान

7. मुझे मालूम है मां की दुआएं साथ चलती हैं,

सफ़र की मुश्किलों को हाथ मलते मैंने देखा है

-आलोक श्रीवास्तव

8. चलती फिरती हुई आंखों से अज़ां देखी है

मैंने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है

-मुनव्वर राना

9. किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई

मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में मां आई

-मुनव्वर राना

10. मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार

दुख ने दुख से बातें की बिन चिट्ठी बिन तार

-निदा फ़ाज़ली

11. स्याही खत्म हो गयी “मां” लिखते-लिखते

उसके प्यार की दास्तान इतनी लंबी थी

12. न जाने क्यों आज अपना ही घर मुझे अनजान सा लगता है,

तेरे जाने के बाद ये घर-घर नहीं खली मकान सा लगता है

13. घर में झीने रिश्ते मैंने लाखों बार उधड़ते देखे,

चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा

-आलोक श्रीवास्तव

14. इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है

मां बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है

-मुनव्वर राना

15. मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊं

मां से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊं

-मुनव्वर राना

16. मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती घर की कुंडी जैसी मां

बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी मां

-निदा फाजली

17. हालात बुरे थे मगर अमीर बनाकर रखती थी,

हम गरीब थे, ये बस हमारी माँ जानती थी…

-मुनव्वर राना

18. भारी बोझ पहाड़ सा कुछ हल्का हो जाए

जब मेरी चिंता बढ़े मां सपने में आए

-अख़्तर नज़्मी

नवरात्रि में देवी मां की आराधाना के साथ ही जन्म देने वाली अपनी मां को भी बताएं कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं। आपको अपने जज्बात बताने में ये शेर काम आएंगे।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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