"जरा सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाये,
दिये से मेरी मां मेरे लिए काजल बनाती है.."
ये शेर है दिवंगत शायर मुनव्वर राना का। मुनव्वर राना उर्दू शायरी की दुनिया का वह नाम रहे हैं, जिन्होंने सबसे साधारण भावनाओं को भी इतने अपनत्व और सादगी से लिखा कि उनके शेर अमर हो गए। उनकी शायरी में रिश्तों की गर्मजोशी, घर-आंगन की खुशबू और मां की ममता सबसे ज्यादा दिखाई देती है। बात जब मां की आए तो मुनव्वर ने ऐसे-ऐसे शेर लिखे कि लोगों का कलेजा मुंह तक आ गया।
मुनव्वर राना ने मां को केवल एक रिश्ते के रूप में नहीं, बल्कि पूरे संसार की सबसे सुरक्षित पनाह की तरह देखा। उनकी शायरी में मां कभी दुआ बनकर आती है, कभी छांव बनकर और कभी उस घर की तरह, जहां लौटने पर हर दर्द छोटा लगने लगता है। मुनव्वर राना के शब्दों में मां का चेहरा किसी किताब की तरह नहीं, बल्कि जिंदगी की सबसे सच्ची कविता की तरह दिखाई देता है।
मां पर लिखा उनका यह सबसे मशहूर आज भी लोगों की आंखें नम कर देता है:
“किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई, मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मां आई।”
मां पर शायरी क्यों करते थे मुनव्वर राना
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मुनव्वर मां पर इतनी शायरी क्यों कहा करते थे। एक बार मीडिया से बात करते हुए उन्होंने खुद इस बात का जवाब दिया था। मुनव्वर राना ने बताया था कि वह कोलकाता में भी खूब रहे। कोलकाता के उनके दोस्त उनसे कहते थे कि जब हमारी बंगाली अंग्रेजों से लड़ रही थी तब आपकी उर्दू कोठों पर व्यस्त थी। बकौल मुनव्वर राना बात तो सही थी। उन्हें ये बात चुभ गई।
मुनव्वर ने बताया था कि शब्दकोशों के मुताबिक गजल का मतलब महबूब से बातें करना है। अगर इसे सच मान लिया जाए, तो फिर महबूब मां क्यों नहीं हो सकती। इसी सोच के कारण मुनव्वर ने मां और इंसानी रिश्तों को अपनी कलम की स्याही से सजाना शुरू कर दिया।
उनपर तोहमते भी लगीं कि वह अपनी शायरी से इमोशनल ब्लैकमेलिंग करते हैं। बकौल मुनव्वर अगर इस इल्ज़ाम को सही मान लिया जाए तो फिर महबूब के हुस्न, उसके जिस्म, उसके शबाब, उसके रुख और रुखसार, उसके होंठ, उसके जोबन और उसकी कमर की पैमाइश को अय्याशी क्यों नहीं कहा जाता है।
मां पर मुनव्वर राना के मशहूर शेर
आज मुनव्वर राना हमारे बीच नहीं हैं लेकिन मां पर लिखी अपनी शायरी और गजलों के जरिए वह हमेशा जिंदा रहेंगे। 10 मई को मदर्स डे के माहौल में आइए पढ़े मुनव्वर राना के मां पर लिखे कुछ खूबसूरत शेर:
1. छू नहीं सकती मौत भी आसानी से इसको
यह बच्चा अभी माँ की दुआ ओढ़े हुए है
2. यूं तो अब उसको सुझाई नहीं देता लेकिन
मां अभी तक मेरे चेहरे को पढ़ा करती है
3. वह कबूतर क्या उड़ा छप्पर अकेला हो गया
मां के आंखें मूंदते ही घर अकेला हो गया
4. चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है
5. सिसकियां उसकी न देखी गईं मुझसे 'राना'
रो पड़ा मैं भी उसे पहली कमाई देते
6. मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसू
मुद्दतों मां ने नहीं धोया दुपट्टा अपना
7. लबों पे उसके कभी बददुआ नहीं होती
बस एक मां है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती
8. इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है
इस मदर्स डे आप अपनी मां के लिए इन शायरी में से कोई भी पसंदीदा शेर को अपना व्हाट्सएप स्टेटस भी बना सकते हैं।
