Mumabi vada Paav: वड़ा पाव से तो लगभग आप सभी परिचित होंगे, इसके लजीज स्वाद का हर कोई दीवाना है। यदि आप मुंबई के मूल निवासी हैं या फिर मुंबई आना जाना लगा रहता है, तो आप सभी ने वड़ा पाव जरूर खाया होगा। पाव को बीच से आधा काटकर, इसके बीच में हरी मिर्च और आलू की पेटी लपेटकर झटपट बनने वाली ये डिश सुबह का नाश्ता हो या फिर दोपहर का भोजन खाने की रंगत बढ़ा देता है।
बात दें यह अब ना केवल भारत तक सीमित रह गया है, बल्कि इसने दुनियाभर में अपनी पहचान बना ली है। ये डिश अब पूरी दुनिया में मशहूर हो गई है, हर कोई वड़ा पाव का दीवाना है। आपको शायद ही पता होगा कि मुंबई का वड़ा पाव दुनिया के बेस्ट सैंडिविच की सूची में 13वें स्थान पर है। हाल ही में Taste Atlas की ओर से विश्व के 50 सर्वश्रेष्ठ सैंडविच को रैंकिंग के लिए शामिल किया गया, जिसमें वड़ा पाव 13वें स्थान पर है। इस लिस्ट में तुर्की का टॉम्बिक पहले स्थान पर है।
पहले स्थान पर तुर्किए की डिश
Taste Atlas की इस लिस्ट में तुर्की की डिश टॉम्टॉम्बिक ने पहला स्थान प्राप्त किया है, वहीं अमेरिका की स्पाईडाइ 4 और भारत के वड़ा पाव ने 13 स्थान हासिल किया है। टेस्ट ऐटलस ने वड़ा पाव का जिक्र करते हुए इसके इतिहास का भी वर्णन किया है। वेबसाइट ने लिखा है कि, इस स्ट्रीट फूड की खोज अशोक वेंडर नाम के एक स्ट्रीट फूड वेंडर ने 1960 से 1970 के दशक में की थी। बता दें इसका इतिहास करीब 53 साल पुराना है। इसको बनाने का श्रेय एक बेहद से आम परिवार को जाता है। साल 1966 में शिवसेना का विस्तार हुआ तो, बाल ठाकरे अपने सभी कार्यकर्ताओं व मराठी लोगों से अपील कर रहे थे कि, वह खाली बैठने से अच्छा कुछ काम करें।
ऐसे हुआ वड़ा पाव का अविष्कार
बाल ठाकरे के अपील से प्रेरित होकर शिवसेना के एक कार्यकर्ता ने गरीब मजदूरों की भूख मिटाने व अपनी आजीविका चलाने के लिए कुछ बनाने का निर्णय लिया, उसने एक पास के दुकान से कुछ पाव खरीदा, उसे बीच से काटकर इसमें आलू की तली हुई पेटीज और मिर्च, लहसुन की चटनी लगाकर बेचना शुरु कर दिया। धीरे-धीरे यह वड़ा पाव के नाम से पूरे मुंबई में मशहूर हो गया और आज इसकी लोकप्रियता आसमान छू रही है।
