आज विश्व साड़ी दिवस 2025 के अवसर पर, दुनिया की सबसे महंगी साड़ी का जिक्र करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह साड़ी, जिसका मूल्य ₹39.3 लाख है, विवाह पट्टु कंजीवरम है। इसे चेन्नई सिल्क द्वारा बनाया गया है और यह राजा रवि वर्मा की कला से प्रेरित है। इस साड़ी में सोने, हीरे, चांदी और उच्च गुणवत्ता वाले रेशम का उपयोग किया गया है।
साड़ी का निर्माण
यह साड़ी हाथ से बुनी गई है और इसमें डबल वॉर्प तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें 64 रंगों और 10 अनोखे डिज़ाइन शामिल हैं, और इसका वजन लगभग आठ किलोग्राम है। इस साड़ी में कई कीमती धातुएँ और रत्न शामिल हैं, जैसे सोना, हीरा, प्लेटिनम, चांदी, रूबी, पन्ना, नीलम और मोती। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 59.7 ग्राम सोना, 3.9 कैरेट हीरा और 5 कैरेट नीलम का उपयोग किया गया है।
गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में मान्यता
इस साड़ी को गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे महंगी साड़ी के रूप में मान्यता प्राप्त है और इसे 5 जनवरी 2008 को ₹3,931,627 ($100,021; £50,679) में बेचा गया था। इसे बनाने में लगभग 4,760 मानव-घंटे लगे, जिसमें 36 बुनकर शामिल थे। इस साड़ी की विशेषता यह है कि इसमें राजा रवि वर्मा की 11 पेंटिंग्स की प्रतिकृतियाँ शामिल हैं। मुख्य चित्र 'गैलेक्सी ऑफ म्यूज़िशियन्स' है, जो वर्मा की प्रसिद्ध पेंटिंग है।

गिनीज बुक में दर्ज है इस खूबसूरत साड़ी का नाम
गैलेक्सी ऑफ म्यूज़िशियन्स का विवरण
'गैलेक्सी ऑफ म्यूज़िशियन्स' में 11 महिलाएँ एक संगीत प्रदर्शन में भाग लेती हुई दिखाई देती हैं। प्रत्येक महिला अलग-अलग पारंपरिक वस्त्र पहने हुए है, जो विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसमें एक मुस्लिम महिला, एक नायर मुण्डु पहने महिला और एक मराठी शैली की साड़ी पहने महिला शामिल हैं।
साड़ी के दो संस्करण
इस साड़ी के दो संस्करण बनाए गए थे। एक संस्करण को बेंगलुरु के एक व्यवसायी ने अपनी 10वीं शादी की सालगिरह पर खरीदी, जबकि दूसरा संस्करण 2009 में कुवैत के एक व्यवसायी द्वारा खरीदा गया।
इस प्रकार, विश्व साड़ी दिवस 2025 के अवसर पर, इस अद्वितीय और महंगी साड़ी का जिक्र करना एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो भारतीय संस्कृति और शिल्प कौशल को दर्शाता है।
