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साल का पहला Chandra Grahan आज, चंद्र ग्रहण 2026 के बीच पढ़ें चांद पर शायरी हिंदी में

Moon Shayari in Hindi (चांद शायरी): आज साल का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) है। जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है, तो इसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं. इस स्थिति में चंद्रमा का रंग तांबे या लाल रंग का दिखाई देता है। बावजूद इसके चांद की खूबसूरती बनी रहती है। इसी चांद पर बहुत से शायरों ने खूबसूरत शेर गढ़े हैं। आइए चंद्र ग्र्हण 2026 के दिन पढ़ें चांद पर शायरी हिंदी में:

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चांद पर शायरी (AI Image)

Moon Shayari in Hindi (चांद के ऊपर शायरी): आज 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ा है। यह साल का पहला चंद्र ग्रहण है। चंद्र ग्रहण भले अल्पकालिक हो लेकिन चांद और उसकी खूबसूरती अजर अमर है। चांद हमेशा से प्रेम और सौंदर्य के बखान का जरिया बना हुआ है। बहुत से शायरों ने चांद को अपनी नज्मों में बड़ी खूबसूरती से उतारा। चांद पर ना जाने कितनी ही कविताएं, गजलें और गीत लिखे जा चुके हैं। शायरों ने चांद पर एक से एक शेर भी लिखे हैं। आज चंद्र ग्रहण के मौके पर आइए पढ़ें नामचीन शायरों के चांद पर लिखे कुछ बेहतरीन शेर:

1. लुत्फ़-ए-शब-ए-मह ऐ दिल उस दम मुझे हासिल हो

इक चांद बग़ल में हो इक चांद मुक़ाबिल हो

- मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस

2. रात को रोज़ डूब जाता है

चांद को तैरना सिखाना है

- बेदिल हैदरी

3. इक दीवार पे चांद टिका था

मैं ये समझा तुम बैठे हो

- बशीर बद्र

4. ये किस ज़ोहरा-जबीं की अंजुमन में आमद आमद है

बिछाया है क़मर ने चाँदनी का फ़र्श महफ़िल में

- सय्यद यूसुफ़ अली खां नाज़िम

5. बारिश के बा'द रात सड़क आइना सी थी

इक पांव पानियों पे पड़ा चांद हिल गया

- ख़्वाजा हसन असकरी

6. चांद में तू नज़र आया था मुझे

मैं ने महताब नहीं देखा था

- अब्दुर्रहमान मोमिन

7. वो चार चांद फलक को लगा चला हूं 'क़मर'

कि मेरे बा'द सितारे कहेंगे अफ़्साने

- क़मर जलालवी

8. रुस्वा करेगी देख के दुनिया मुझे 'क़मर'

इस चांदनी में उन को बुलाने को जाए कौन

- क़मर जलालवी

9. सब सितारे दिलासा देते हैं

चांद रातों को चीख़ता है बहुत

- आलोक मिश्रा

10. तुम जिसे चांद कहते हो वो अस्ल में

आसमां के बदन पर कोई घाव है

- त्रिपुरारि

11. चांद ख़ामोश जा रहा था कहीं

हम ने भी उस से कोई बात न की

- महमूद अयाज़

12. हम ने उस चेहरे को बांधा नहीं महताब-मिसाल

हम ने महताब को उस रुख़ के मुमासिल बांधा

- इफ़्तिख़ार मुग़ल

13. शाम के साए बालिश्तों से नापे हैं

चांद ने कितनी देर लगा दी आने में

- गुलजार

14. इतने घने बादल के पीछे

कितना तन्हा होगा चांद

- परवीन शाकिर

15. वो चांद कह के गया था कि आज निकलेगा

तो इंतिजार में बैठा हुआ हूं शाम से मैं

- फरहत एहसास

16. रात के शायद एक बजे हैं

सोता होगा मेरा चांद

- परवीन शाकिर

17. वो रातें चांद के साथ गईं वो बातें चांद के साथ गईं

अब सुख के सपने क्या देखें जब दुख का सूरज सर पर हो

- इब्न-ए-इंशा

18. चांद का हुस्न भी ज़मीन से है

चांद पर चांदनी नहीं होती

- इब्न-ए-सफ़ी

19. तुम जिसे चांद कहते हो वो अस्ल में

आसमां के बदन पर कोई घाव है

- त्रिपुरारि

20. हाथ में चांद जहां आया मुक़द्दर चमका

सब बदल जाएगा क़िस्मत का लिखा जाम उठा

- बशीर बद्र

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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