Mausam Shayari in Hindi: मौसम प्रकृति की वो कूची है, जिससे धरती का कैनवास हर दिन नया रंग भरता है। कभी सूरज की सुनहरी किरणें आसमान को चमकाती हैं, तो कभी बादलों की धुन बारिश की बूंदों में सजीव हो उठती है। हवाओं का ठंडा स्पर्श, गर्मी की तीखी तपिश, सर्दी की चादर और बसंत की महक..हर मौसम अपने साथ एक अलग एहसास लेकर आता है। मौसम की ही तरह जीवन भी यूं ही बदलता रहता है। जैसे मौसम कभी स्थायी नहीं होते, वैसे ही कठिनाइयां और खुशियां भी पल भर में बदल जाती हैं। इसी मौसम पर कई मशहूर शायरों ने एक से बढ़कर एक खूबसूरत शेर लिखे हैं। आइए पढ़ते हैं मौसम पर लिखे मशहूर शेर:
1. तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे
मैं एक शाम चुरा लूं अगर बुरा न लगे
- क़ैसर-उल जाफ़री
2. कुछ तो तिरे मौसम ही मुझे रास कम आए
और कुछ मिरी मिट्टी में बग़ावत भी बहुत थी
- परवीन शाकिर
3. मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी
- राहत इंदौरी
4. दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था
- क़तील शिफ़ाई
5. रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया
अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया
- खालिद गनी
6. मिरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं
मैं आदमी हूं मिरा ए'तिबार मत करना
- आसिम वास्ती
7. तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है
तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा
- बशीर बद्र
8. आंखों से मोहब्बत के इशारे निकल आए
बरसात के मौसम में सितारे निकल आए
- मंसूर उस्मानी
9. आंख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई
ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई
- मंज़र भोपाली
10. सर्दी में दिन सर्द मिला
हर मौसम बेदर्द मिला
- मोहम्मद अल्वी
11. यूं चार दिन की बहारों के क़र्ज़ उतारे गए
तुम्हारे बअ'द के मौसम फ़क़त गुज़ारे गए
- मनोज अज़हर
12. यूंही मौसम की अदा देख के याद आया है
किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसां जानां
- अहमद फ़राज़
उम्मीद करते हैं कि मौसम पर लिखे ये शेर आपको जरूर पसंद आइए होंगे। इन शायरियों की खूबसूरती ये भी है कि आप इन्हें किसी भी मौसम में सुना सकते हैं।
