लाइफस्टाइल

Mausam Shayari: जब बादल शायर हो जाएं और हवाएं बन जाएं गजल, पढ़ें मौसम पर लिखे चंद मशहूर शेर

Mausam Par Shayari in Hindi: फिज़ा में बहते बदलते रंग, पेड़ों की सरसराहट, बादलों की गूंज, धूप की नरमी..सब कुछ जैसे शायर के दिल से उतरकर कागज पर उतरता है। मौसम पर लिखे शेर महज शायरी नहीं हैं। यह मौसम की महक, नमी और आहट का अद्भुत अनुवाद होतं है।

Image

मौसम पर शायरी (Mausam Shayari in Hindi)

Mausam Shayari in Hindi: जब मौसम करवट लेता है, तो सिर्फ हवा नहीं बदलती, दिल की दुनिया भी बदल जाती है। कभी बारिश की रिमझिम में तन्हाई भीगती है, तो कभी ठंडी हवा में किसी की याद और भी गहराने लगती है। यही तो है मौसम की सबसे खास बात। वह सिर्फ बाहरी परिवेश नहीं, भीतर के जज़्बात भी बदल देता है। और जब इन एहसासों को लफ्ज़ मिलते हैं, तो जन्म लेती है – शायरी। फिज़ा में बहते बदलते रंग, पेड़ों की सरसराहट, बादलों की गूंज, धूप की नरमी..सब कुछ जैसे शायर के दिल से उतरकर कागज पर उतरता है। मौसम पर लिखे शेर महज शायरी नहीं हैं। यह मौसम की महक, नमी और आहट का अद्भुत अनुवाद होतं है। आइए, चलते हैं उन शेरों की गलियों में जहां हर मौसम एक नया एहसास बनकर मुस्कुराता है। पढ़ें मौसम पर लिखे चंद बेहतरीन शेर:

1. बारिश-ए-संग का मौसम है मिरे शहर में तो

तू ये शीशे सा बदन ले के कहां आ गई दोस्त

- अहमद फ़राज़

2. बीता दीद उम्मीद का मौसम ख़ाक उड़ती है आंखों में

कब भेजोगे दर्द का बादल कब बरखा बरसाओगे

- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

3. हमरंगी-ए-मौसम के तलबगार न होते

साया भी तो क़ामत के बराबर नहीं मिलता

- नसीर तुराबी

4. बीत गया सावन का महीना मौसम ने नज़रें बदलीं

लेकिन इन प्यासी आंखों से अब तक आंसू बहते हैं

- हबीब जालिब

5. मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता

यहां हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी

- राहत इंदौरी

6. सभी मौसम हैं दस्तरस में तिरी

तू ने चाहा तो हम हरे रहेंगे

- तहज़ीब हाफ़ी

7. रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया

अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया

- खालिद गनी

8. वो लोग मेरे बहुत प्यार करने वाले थे

गुज़र गए हैं जो मौसम गुज़रने वाले थे

- जमाल एहसानी

9. दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था

इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था

- क़तील शिफ़ाई

10. कैसा मौसम है कुछ नहीं खुलता

बूंदा-बांदी भी धूप भी है अभी

- अहमद फ़राज़

11. गए मौसम में जो खिलते थे गुलाबों की तरह

दिल पे उतरेंगे वही ख़्वाब अज़ाबों की तरह

- परवीन शाकिर

मशहूर शायरों की कलम से निकले मौसम पर ये बेहतरीन शायरी ने अगर आपके दिल को छुआ हो तो आप इन्हें अपनों के साथ साझा भी कर सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article