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Mysaa में रश्मिका का दमदार रूप देखकर हुए हैरान, जानें उस गोंड जनजाति के बारे में जिससे जुड़ा है उनका किरदार

रश्मिका मंदाना की फिल्म मैसा में उनके गोंड महिला के किरदार की चर्चा है। जानें गोंड जनजाति कौन है, कहां रहती है और उसकी भाषा, कला व इतिहास में क्या खास है।

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कहां से आया Mysaa में रश्मिका का किरदार, किसकी हो रही सबसे ज्यादा बात (AI Image)

Gond Tribes and Mysaa Movie: रश्मिका मंदाना को Mysaa के टीजर में देखकर आप हैरान हैं और साथ ही जानना चाहते हैं कि उनके किरदार की प्रेरणा कहां से आई है? हाथ में हंसिया, पानी के भीतर लड़ाई और चेहरे पर ऐसा गुस्सा जैसे अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं। अगर आप भी जानना चाहते हैं तो बता देंकि फिल्म में रश्मिका एक गोंड महिला की भूमिका निभा रही हैं। टीजर ने उनके एक्शन लुक की चर्चा तो खूब कराई, लेकिन साथ ही कई लोग यह भी जानना चाहते हैं कि गोंड समुदाय कौन है। आइए, फिल्म के बहाने उससे थोड़ा परिचय करते हैं।

Mysaa में रश्मिका मंदाना का किरदार कौन है

फिल्म के प्रचार में रश्मिका के किरदार को गोंड समुदाय की महिला बताया गया है। टीजर से इतना समझ आता है कि उसके सामने कोई बड़ा संघर्ष है और वह उसका सामना करने के लिए तैयार है। लेकिन उसकी पूरी कहानी अभी सामने नहीं आई है। वह कहां रहती है? किससे लड़ रही है? उसके परिवार और समुदाय की कहानी फिल्म में कैसे जुड़ेगी? बेशक इन सवालों के जवाब फिल्म आने पर ही मिलेंगे।

एक बात यहां ध्यान रखने वाली है। रश्मिका फिल्म में एक गोंड महिला का किरदार निभा रही हैं। इसका मतलब यह नहीं कि टीजर में दिखा पहनावा, हथियार या लड़ाई हर गोंड महिला के जीवन को दिखाते हैं। वह फिल्म की कहानी और उसके खास किरदार का हिस्सा है।

गोंड जनजाति कौन है और कहां रहती है

गोंड को भारत के बड़े आदिवासी समुदायों में से एक माना जाता है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना सहित कई राज्यों में गोंड परिवार रहते हैं। समुदाय के कुछ लोग अपनी पहचान के लिए कोइतूर नाम भी इस्तेमाल करते हैं। इतने बड़े इलाके में फैले लोगों की जिंदगी स्वाभाविक रूप से एक जैसी नहीं होगी। किसी परिवार की बोली अलग होगी, किसी के त्योहार मनाने का तरीका। रहन-सहन पर उस जगह का असर भी दिखेगा, जहां पीढ़ियों से उनका घर है।

इसलिए अगर आपने Mysaa का टीजर देखकर गोंड समुदाय के बारे में पहली बार सुना है, तो उसे पहचान की शुरुआत समझिए, पूरी जानकारी नहीं।

क्या गोंड जनजाति की अपनी भाषा भी है

हां, गोंडी भाषा है। यह द्रविड़ भाषा परिवार से जुड़ी है। मगर इसका यह मतलब नहीं कि हर गोंड व्यक्ति सिर्फ गोंडी बोलता है। कई लोग अपने इलाके के हिसाब से हिंदी, मराठी, तेलुगु या दूसरी भाषाएं भी बोलते हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2011 की जनगणना में करीब 29.8 लाख गोंडी भाषा बोलने वाले लोग दर्ज हुए थे।

अब रश्मिका के किरदार को लेकर एक दिलचस्प बात सोचिए। फिल्म में वह कौन-सी भाषा बोलती दिखेंगी? घर में बातचीत और बाहर की दुनिया में क्या फर्क होगा? भाषा की ऐसी छोटी बातें किसी किरदार की दुनिया को पर्दे पर जीवंत बना सकती हैं।

Mysaa में रश्मिका का दमदार किरदार

Mysaa में रश्मिका का दमदार किरदार

गोंड संस्कृति में जंगल और प्रकृति की बात

गोंड परंपराओं में पेड़, पक्षी, मौसम और खेती से जुड़ी कई कहानियां मिलती हैं। इसका असर उनके गीतों, नृत्यों और चित्रों में भी दिखाई देता है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अनुसार, कर्मा जैसे नृत्य और मौखिक कथाएं समुदाय के सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा हैं। खेती के अलग-अलग मौसम भी गीतों और कहानियों में जगह पाते हैं।

इसे सिर्फ 'जंगल से जुड़ा समुदाय' कहकर छोड़ देना शायद बहुत छोटी बात होगी। इन कहानियों में परिवार है, आस्था है, काम है और साथ मिलकर जीवन बिताने का अपना तरीका है।

गोंड पेंटिंग की होती है चर्चा

हो सकता है आपने गोंड पेंटिंग देखी हो, बस उसका नाम न जानते हों। किसी चित्र में रंगों से भरा पेड़, उसके आसपास पक्षी और बारीक रेखाओं या बिंदुओं से उभरी आकृतियां- गोंड कलाकार अपनी कहानियां इस तरह भी कहते हैं। कलाकार जंगढ़ सिंह श्याम ने इस कला को कागज और कैनवास पर नई पहचान दिलाई। कला बाई जैसी महिला कलाकारों ने भी अपने अनुभव और यादों को चित्रों में जगह दी है।

क्या गोंड समुदाय का इतिहास भी योद्धाओं से जुड़ा है

हां, गोंड इतिहास में राज्यों और शासकों की कहानियां भी हैं। रानी दुर्गावती का नाम गढ़ा-मंडला राज्य से जुड़ा है और उन्हें उनके साहस के लिए याद किया जाता है। लेकिन किसी समुदाय को केवल उसकी युद्ध कथाओं से पहचानना अधूरा होगा। उसी इतिहास के साथ उसकी भाषाएं, कलाएं और रोजमर्रा की जिंदगी भी चलती आई हैं।

Mysaa में रश्मिका का योद्धा रूप दर्शकों को आकर्षित कर रहा है। अब उत्सुकता इस बात की है कि फिल्म एक्शन के साथ उस महिला की दुनिया को कितनी गहराई से दिखाती है!

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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