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Co-Parenting: डिवोर्स के बाद को-पैरेंटिंग नहीं रहेगी समस्या, मलाइका अरोड़ा से सीखें परवरिश का यह नया तरीका

Co Parenting Tips in Hindi: मलाइका अरोड़ा और अरबाज खान ने भी 18 साल की शादी में तलाक के बाद अपने बच्चे अरहान के लिए को-पैरेंटिंग को चुना। मलाइका अरोड़ा का मानना है कि हमारे जीवन के उतार-चढ़ाव का असर किसी भी हाल में बच्चों पर नहीं पड़ना चाहिए।

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डिवोर्स के बाद को-पैरेंटिंग नहीं रहेगी समस्या, मलाइका अरोड़ा से सीखें नायाब तरीका (Photo: Malaika Arora Insta)

Co Parenting after divorce: शादी, बच्चे और तलाक - ये तीनों ही जीवन का हिस्सा हैं। किसी के जीवन में इनमें से कोई भी चीज नहीं आती कोई तीनों का अनुभव करता है। शादी और फिर बच्चा होने के बाद तलाक कभी आसान नहीं होता। ऐसी परिस्थिति में तलाक से सिर्फ पति पत्नी पर असर नहीं पड़ता, बच्चा भी झेलता है। इसी कारण कुछ पेरेंट्स तलाक के बाद को-पैरेंटिंग को चुनते हैं। जब तलाक के बाद भी दोनों पार्टनर एक साथ मिलकर बच्चे की परवरिश करते हैं उसे को-पैरेंटिंग कहते हैं।

मलाइका अरोड़ा और अरबाज खान ने भी 18 साल की शादी में तलाक के बाद अपने बच्चे अरहान के लिए को-पैरेंटिंग को चुना। मलाइका अरोड़ा का मानना है कि हमारे जीवन के उतार-चढ़ाव का असर किसी भी हाल में बच्चों पर नहीं पड़ना चाहिए। मलाइका साफ कहती हैं कि बच्चों को माता-पिता की समस्याओं से दूर रखना चाहिए। उनकी यह सलाह को-पेरेंटिंग को आसान बनाने में महत्वपूर्ण है।

मलाइका अरोड़ा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि तलाक के बाद उन्होंने खुद को प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्हें खूब ट्रोल किया गया। लेकिन उन्होंने बच्चे पर इसका असर नहीं पड़ने दिया। उनका मानना है कि बच्चों को माता-पिता की समस्याओं से प्रभावित नहीं होने देना चाहिए। मलाइका ये भी कहती हैं कि डिवोर्स के बाद को-पैरेंटिंग बच्चों के लिए बहुत जरूरी है।

बनाए पेरेंटिंग प्लान

बकौल मलाइका अरोड़ा को-पैरेंटिंग के लिए फैमिली थेरपिस्ट की मदद से एक बेहतर प्लान बनाएं। इसमें बच्चों के लिए समय, छुट्टियां, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य निर्णयों को शामिल करें।

को-पैरेंटिंग में इन बातों का रखें ध्यान

1. बच्चों के लिए माता-पिता, दोनों जरूरी हैं। उनकी जरूरत को ध्यान में रखते हुए को-पैरेंटिंग को चुनें।

2. को-पैरेंटिंग में बच्चों के सामने एक दूसरे से किसी बात पर बहस या झगड़ा ना करें। उन्हें ये समझाने की कोशिश करें कि आपके तलाक का बुरा असर उनपर नहीं पड़ेगा।

3. पेरेंट्स को इस बात का भी ध्यान रखना है अपने जीवन के उतार चढ़ाव में बच्चों को बीच में न लाएं:। बच्चों को संदेशवाहक, जासूस या सहयोगी न बनाएं।

4. तलाक के कारणों, वित्तीय समझौतों या व्यक्तिगत समस्याओं की चर्चा बच्चों के सामने न करें।

5. को-पैरेंटिंग को बच्चों की परवरिश का एक नया तरीका समझें। समय-समय पर एक-दूसरे से बच्चों की प्रगति, भविष्य की योजनाओं और बदलावों पर बातचीत करते रहें।

मलाइका अरोड़ा के अनुभव और को-पैरेंटिंग के लिए इन सुझावों की मदद से आप अपने बच्चे का भविष्य निखार सकते हैं। जरूरत है कि तलाक की कड़वाहट को भुलाकर बच्चों के लिए एक साथ आएं और उसकी साथ मिलकर परवरिश करें।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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