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मजदूर पर शायरी: सो जाते हैं फुटपाथ पे अखबार बिछा कर, मजदूर कभी नींद की गोली नहीं खाते

Labour Shayari (गरीब मजदूर पर शायरी): ये शेर उन सारे मजदूरों के जज्बे और मेहनत को सलाम हैं जो अपने खून पसीने से इस दुनिया को नया आकार दे रहे हैं।

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मजदूर पर शायरी (Photo: AI Generated)

Labour Shayari in Hindi: आज अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (Majdoor Diwas) है। इसे मजदूर दिवस भी कहा जाता है। दुनियाभर के श्रमिकों के सम्मान में यह खास दिन हर साल 1 मई को मनाया जाता है। मजदूर वो होता है जो अपनी मेहनत से लोहे को भी पिघलाकर उसका आकार बदल देता है। इन्हीं मजदूरों पर तमाम शायरों ने एक से बढ़कर एक बेहतरीन शेर लिखे हैं। ये शेर उन सारे मजदूरों के जज्बे और मेहनत को सलाम हैं जो अपने खून पसीने से इस दुनिया को नया आकार दे रहे हैं। आइए आज मजदूर दिवस 2026(Labour Day 2026) के मौके पर पढ़ते हैं मजदूरों पर शायरी:

गरीब मजदूर पर शायरी

1. अब उन की ख़्वाब-गाहों में कोई आवाज़ मत करना

बहुत थक-हार कर फ़ुटपाथ पर मजदूर सोए हैं

- नफस अम्बालवी

2. ज़िंदगी अब इस क़दर सफ़्फ़ाक हो जाएगी क्या

भूक ही मजदूर की ख़ूराक हो जाएगी क्या

- रज़ा मौरान्वी

3. बुलाते हैं हमें मेहनत-कशों के हाथ के छाले

चलो मुहताज के मुँह में निवाला रख दिया जाए

- रज़ा मौरान्वी

4. ग़रीबों पर तो मौसम भी हुकूमत करते रहते हैं

कभी बारिश कभी गर्मी कभी ठंडक का क़ब्ज़ा है

- मुनव्वर राना

5. दौलत का फ़लक तोड़ के आलम की जबीं पर

मजदूर की क़िस्मत के सितारे निकल आए

- नुशूर वाहिदी

6. मैं इक मजदूर हूँ रोटी की ख़ातिर बोझ उठाता हूँ

मिरी क़िस्मत है बार-ए-हुक्मरानी पुश्त पर रखना

- एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी

7. ख़ून मजदूर का मिलता जो न तामीरों में

न हवेली न महल और न कोई घर होता

- हैदर अली जाफ़री

Duty Shayari in Hindi

8. तू क़ादिर ओ आदिल है मगर तेरे जहाँ में

हैं तल्ख़ बहुत बंदा-ए- मजदूर के औक़ात

- अल्लामा इक़बाल

9. सो जाते हैं फ़ुटपाथ पे अख़बार बिछा कर

मजदूर कभी नींद की गोली नहीं खाते

- मुनव्वर राना

10. फ़रिश्ते आ कर उन के जिस्म पर ख़ुश्बू लगाते हैं

वो बच्चे रेल के डिब्बों में जो झाड़ू लगाते हैं

- मुनव्वर राना

11. कुचल कुचल के न फ़ुटपाथ को चलो इतना

यहाँ पे रात को मजदूर ख़्वाब देखते हैं

- अहमद सलमान

12. शहर में मजदूर जैसा दर-ब-दर कोई नहीं

जिस ने सब के घर बनाए उस का घर कोई नहीं

- अज्ञात

13. आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए

आदमी मजदूर है राहें बनाने के लिए

- हफ़ीज़ जालंधरी

14. नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बा'द

रोटियाँ भी न मयस्सर हों जिसे काम के बा'द

- अज़हर इक़बाल

15. बोझ उठाना शौक़ कहाँ है मजबूरी का सौदा है

रहते रहते स्टेशन पर लोग क़ुली हो जाते हैं

- मुनव्वर राना

Employee Shayari in Hindi

16. मेहनत कर के हम तो आख़िर भूके भी सो जाएँगे

या मौला तू बरकत रखना बच्चों की गुड़-धानी में

- विलास पंडित मुसाफ़िर

17. तामीर-ओ-तरक़्क़ी वाले हैं कहिए भी तो उन को क्या कहिए

जो शीश-महल में बैठे हुए मजदूर की बातें करते हैं

- ओबैदुर रहमान

18. होने दो चराग़ाँ महलों में क्या हम को अगर दीवाली है

मजदूर हैं हम मजदूर हैं हम मजदूर की दुनिया काली है

- जमील मज़हरी

19. लोगों ने आराम किया और छुट्टी पूरी की

यकुम मई को भी मजदूरों ने मजदूरी की

- अफ़ज़ल ख़ान

20. पेड़ के नीचे ज़रा सी छाँव जो उस को मिली

सो गया मजदूर तन पर बोरिया ओढ़े हुए

- शारिब मौरान्वी

21. मिल मालिक के कुत्ते भी चर्बीले हैं

लेकिन मजदूरों के चेहरे पीले हैं

- तनवीर सिप्रा

22. मैं ने 'अनवर' इस लिए बाँधी कलाई पर घड़ी

वक़्त पूछेंगे कई मजदूर भी रस्ते के बीच

- अनवर मसूद

23. तेरी ताबिश से रौशन हैं गुल भी और वीराने भी

क्या तू भी इस हँसती-गाती दुनिया का मजदूर है चाँद?

- शबनम रूमानी

24. पसीना मेरी मेहनत का मिरे माथे पे रौशन था

चमक लाल-ओ-जवाहर की मिरी ठोकर पे रक्खी थी

- नाज़िर सिद्दीक़ी

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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