कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो सुनने में छोटे लगते हैं, लेकिन उनके पीछे एक पूरी दुनिया छिपी होती है। आज के दौर में LGBTQ+ भी एक ऐसा ही एक शब्द है। पहले इस विषय पर चर्चा सिर्फ कुछ खास मंचों तक सीमित थी, लेकिन अब यह रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बनता जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस विषय पर अब समाज के अलग-अलग वर्ग खुलकर अपनी राय रख रहे हैं।
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सोशल मीडिया वाले दौर में कई ऐसे इंफ्लुएंजर्स हैं, जो LGBTQ+ कम्यूनिटी का हिस्सा है और बहुत खुलकर इससे जुड़ी बातें करते हैं। न केवल ये बल्कि बड़ौदा की महारानी राधिका राजे ने भी बीते दौर में LGBTQ+ समुदाय के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में यह साझा किया है कि, कैसे LGBTQ+ समुदाय भारतीय समाज का अभिन्न हिस्सा है और उन्हें समाज से अलग-थलग या हीन भावना से नहीं देखा जाना चाहिए।
इस विषय को लेकर चर्चा तो बीते सालों में काफी बड़ी है, लेकिन आज भी कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें LGBTQ+ का मतलब नहीं पता है। अगर आप भी उन्हीं में से है तो यहां आसान भाषा में समझिए आखिर LGBTQ+ का मतलब क्या है? क्या यह सिर्फ एक ट्रेंडिंग शब्द है या फिर बदलते समाज की नई समझ?
पांच अक्षर नहीं, लाखों लोगों की पहचान
अगर किसी दोस्त का नाम गलत लेकर बुलाया जाए तो उसे अच्छा नहीं लगता। ठीक उसी तरह हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी पहचान को भी सही तरीके से समझा और सम्मान दिया जाए। LGBTQ+ दरअसल ऐसे लोगों का एक साझा परिचय है जिनकी लैंगिक पहचान (Gender Identity) या यौन रुझान (Sexual Orientation) सामान्य सामाजिक धारणाओं से कुछ अलग हो सकता है।
LGBTQ+ Means, क्या होता है LGBTQ+ का मतलब
LGBTQ+ में L यानी लेस्बियन (Lesbian) होता है, यानी ऐसी महिला जिसे दूसरी महिला की ओर प्रेम या आकर्षण महसूस होता है। G यानी गे (Gay), यानी ऐसा पुरुष जिसे पुरुषों की ओर आकर्षण होता है। B यानी बाइसेक्शुअल (Bisexual), यानी जिन्हें पुरुष और महिला दोनों की ओर आकर्षण हो सकता है। T यानी ट्रांसजेंडर (Transgender), यानी ऐसे लोग जिनकी जेंडर पहचान जन्म के समय तय किए गए लिंग से अलग हो सकती है। Q यानी क्वीर (Queer) यानी वे लोग जो अपनी पहचान को किसी तय दायरे में नहीं बांधते या अभी उसे समझने की प्रक्रिया में हैं। वहीं '+' इस बात का संकेत है कि पहचान की दुनिया सिर्फ इन पांच अक्षरों तक सीमित नहीं है।

LGBTQ kya hai
समाज बदलता है, सोच भी बदलती है
हर दौर की अपनी सोच होती है। कभी लड़कियों की पढ़ाई पर सवाल उठते थे, आज वही शिक्षा सबसे जरूरी मानी जाती है। ठीक उसी तरह LGBTQ+ को लेकर भी समाज की सोच धीरे-धीरे बदल रही है। पहले लोग इस विषय पर बात करने से बचते थे, लेकिन अब बातें/चर्चाएं और समर्थन बढ़ रहा है।

LGBTQ+
लगातार बदलते इस समाज में भी कई लोग ऐसे हैं, तो LGBTQ+ कम्युनिटी को इस समाज का हिस्सा नहीं मानते हैं। ऐसे में LGBTQ+ को समझने का सबसे आसान तरीका यही है कि इसे किसी 'अलग दुनिया' की कहानी जैसा न समझा जाए। इस कम्युनिटी से जुड़े लोग भी हमारी तरह पढ़ते हैं, नौकरी करते हैं, परिवार से प्यार करते हैं, दोस्त बनाते हैं, सपने देखते हैं और जीवन की चुनौतियों का सामना करते हैं। उनकी सबसे बड़ी इच्छा भी वही होती है जो हर इंसान की होती है, जो है सम्मान, अपनापन, प्यार और बराबरी।
LGBTQ+ कोई फैशन, ट्रेंड या सोशल मीडिया का नया शब्द नहीं है। यह उन लोगों की पहचान का सम्मान है, जो हमेशा से समाज का हिस्सा रहे हैं। बदलते समय में सबसे बड़ी सीख शायद यही है कि हर इंसान की कहानी अलग हो सकती है, लेकिन सम्मान और प्रेम पाने का अधिकार सबका बराबर है।
