दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव 2026-27 को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में दिल्ली छात्रसंघ चुनाव में राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों के कथित प्रभाव पर सवाल उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया को लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के 2006 के आदेश के मुताबिक कराने की मांग की गई है। याचिका विजेता ने दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल की है। उनकी तरफ से जाने माने वकील बरून सिंहा दिल्ली हाईकोर्ट में पैरवी करेंगे।
11 सितंबर की शॉर्टलिस्टिंग को चुनौती
याचिका में 11 सितंबर 2026 को जारी नोटिस, जिसमें DUSU के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और ज्वाइंट सेक्रेटरी पदों के उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया, को चुनौती दी गई है। इसके साथ ही 13 अगस्त 2026 की चुनाव अधिसूचना को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग चुनाव अधिसूचना में तय शर्तों, खासकर Note-D, के अनुरूप नहीं है।सबसे बड़ा सवाल- DUSU चुनाव में राजनीतिक दलों की एंट्री?
याचिका में दावा किया गया है कि अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों ने DUSU चुनाव के लिए अपने-अपने पैनल और उम्मीदवार घोषित किए हैं। याचिका के मुताबिक कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और ज्वाइंट सेक्रेटरी पदों के लिए पैनल जारी किया। वहीं भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी ने भी इन पदों के लिए उम्मीदवार घोषित किए। इसके लावा SFI-AISA गठबंधन, AAP के छात्र संगठन ASAP ने भी उम्मीदवारों को टिकट देने की घोषणा की।याचिका- छात्र चुनाव राजनीतिक दलों से अलग होने चाहिए
याचिकाकर्ता ने लिंगदोह कमेटी की Clause 6.3 का हवाला दिया है। याचिका के मुताबिक इस प्रावधान का उद्देश्य छात्र चुनाव और छात्र प्रतिनिधित्व को राजनीतिक दलों से अलग रखना और संगठित राजनीतिक हितों के सीधे या अप्रत्यक्ष प्रभाव को रोकना है। याचिका में आरोप है कि राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों की ओर से उम्मीदवारों के पैनल जारी करना इसी व्यवस्था के खिलाफ है। हालांकि, ये याचिकाकर्ता के आरोप/दावे हैं, कोर्ट की ओर से तय निष्कर्ष नहीं।
DUSU संविधान की धारा 6 भी चुनौती के घेरे में
याचिका में DUSU Constitution की Clause 6(i) और 6(ii) को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि ये प्रावधान Lyngdoh Committee की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर 2006 के आदेश के अनुरूप नहीं हैं।याचिका का दावा- उम्मीदवारों को पार्टी के छात्र संगठनों के पैनल से टिकट
याचिका में कहा गया है कि प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और ज्वाइंट सेक्रेटरी पदों के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवार संबंधित छात्र संगठनों की ओर से जारी पैनल में शामिल हैं और ये पैनल संबंधित राजनीतिक दलों से जुड़े हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि छात्र DUSU चुनाव में बिना किसी छात्र संगठन या राजनीतिक दल के समर्थन/एंडोर्समेंट के सीधे नामांकन दाखिल कर सकते हैं।DU की अपनी एडवाइजरी का भी हवाला
याचिका में दिल्ली यूनिवर्सिटी की चुनाव संबंधी एडवाइजरी का भी जिक्र है। दावा किया गया है कि एडवाइजरी में उम्मीदवारों को राजनीतिक दलों या बाहरी संगठनों से फंड या किसी तरह का सहयोग नहीं लेने की बात कही गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इसके बावजूद राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों की ओर से उम्मीदवारों के पैनल जारी किए जाना विरोधाभासी है।
