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Kaleem Aajiz Shayari: दामन पे कोई छींट न ख़ंजर पे कोई दाग़.., टूटे दिल का हाल-ए-बयां हैं कलीम अजीज़ के ये चुनिंदा शेर

Kaleem Aajiz Shayari in Hindi: अगर इश्क है तो जुदाई भी होगी। और अगर जुदाई है तो दर्द का होना लाज़मी है। इस इश्क, जुदाई और दर्द के सूरत-ए-हाल को अगर किसी ने बखूबी शायरी में पिरोया है तो वह हैं कलीम अजीज। बिहार में पुराने पटना जिसे नालंदा कहा जाता था वहां के जन्मे कलीम अजीज़ ने अपनी दर्द भरी शायरी और गजलों से पूरी दुनिया का दिल जीता है।

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Kaleem Aajiz Shayari in Hindi (कलीम अजीज़ री शायरी)

Kaleem Aajiz Shayari in Hindi: शेर-ओ शायरी की दुनिया में कवीम अजीज़ का नाम बड़े अदब से लिया जाता है। वह ऐसे अजीम शायर थे जिनकी वहह से अदबी दुनिया में पूरे बिहार का नाम रोशन हुआ। 11 अक्तूबर 1926 को बिहार के पटना में जन्मे कलीम अजीज़ बहुत मशहूर नगमानिगार थे। उनकी शायरी और गजलों में वो ताकत थी कि सुनने वाले उनके मोहपाश में बंध जाता था। कलीम अजीज़ की लिखावट में दर्द था। दर्द ऐसा कि सहा भी ना जाए और बिना कहे रहा भी ना जाए। आइए पढ़ते हैं कलीम अजीज के कुछ चुनिंदा शेर:

Kaleem Aajiz Ki Shayari | Kaleem Aajiz Sad Shayari in Hindi | Kaleem Aajiz Shayari Status

1. ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी

मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी

2. दामन पे कोई छींट न ख़ंजर पे कोई दाग़

तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो

3. न जाने रूठ के बैठा है दिल का चैन कहाँ

मिले तो उस को हमारा कोई सलाम कहे

4. बहारों की नज़र में फूल और काँटे बराबर हैं

मोहब्बत क्या करेंगे दोस्त दुश्मन देखने वाले

5. वही होगा जो हुआ है जो हुआ करता है

मैं ने इस प्यार का अंजाम तो सोचा भी नहीं

6. करे है अदावत भी वो इस अदा से

लगे है कि जैसे मोहब्बत करे है

7. हम कुछ नहीं कहते हैं कोई कुछ नहीं कहता

तुम क्या हो तुम्हीं सब से कहलवाए चलो हो

8. ये आंसू बे-सबब जारी नहीं है

मुझे रोने की बीमारी नहीं है

9. दर्द ऐसा है कि जी चाहे है ज़िंदा रहिए

ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है

10. गुज़र जाएंगे जब दिन गुज़रे आलम याद आएंगे

हमें तुम याद आओगे तुम्हें हम याद आएंगे

11. दिल की बाज़ी लगे फिर जान की बाज़ी लग जाए

इश्क़ में हार के बैठो नहीं हारे जाओ

12. अब लुत्फ़ इसी में है मज़ा है तो इसी में

आ ऐ मिरे महबूब सताने के लिए आ

13. दिल दर्द की भट्टी में कई बार जले है

तब एक ग़ज़ल हुस्न के सांचे में ढले है

14. मेरी शाइ'री में तिरे सिवा कोई माजरा है न मुद्दआ'

जो तिरी नज़र का फ़साना था वो मिरी ग़ज़ल ने सुना दिया

15. तल्ख़ियां इस में बहुत कुछ हैं मज़ा कुछ भी नहीं

ज़िंदगी दर्द-ए-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं

16. हम को तो ख़ैर पहुंचना था जहां तक पहुंचे

जो हमें रोक रहे थे वो कहाँ तक पहुँचे

उम्मीद करते हैं कि कलीम अजीज़ के ये बेहतरीन शेर आपके दिल तक पहुंचे होंगे। अगर आप उनकी शायरी पर दाद देना चाहते हैं तो आप इन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर भी कर सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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