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Kabir Das Ke Dohe: कबीर जयंती आज, यहां पढ़ें उनके मशहूर दोहे

  • Authored by: Ritu raj
  • Updated Jun 11, 2025, 06:40 AM IST

Kabir Das Dohe(कबीर दास के दोहे इन हिंदी): आज देशभर में कबीर जयंती मनाई जा रही है। इसे खूब धूम धाम के साथ मनाया जाता है। ऐसे में कबीर जयंती के मौके पर यहां पढ़ें कबीर के दोहे।

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Kabir Das Dohe(कबीर दास के दोहे इन हिंदी): : संत कबीर दास जयंती 2025 बुधवार, 11 जून को मनाई जा रही है। यह दिन हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को पड़ता है, जो संत कबीर दास के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। कबीर दास का जन्म काशी (वाराणसी) में हुआ था, और उन्होंने अपने जीवन में जाति, धर्म और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज में समानता, प्रेम और एकता का संदेश देती हैं। ऐसे में जब आज उनकी जयंती मनाई जा रही है तो यहां पढ़ें उनके अनमोल विचार, प्रेरक कोट्स इन हिंदी।

Kabir Das ke Dohe

1. जीवन में मरना भला, जो मरि जानै कोय |

मरना पहिले जो मरै, अजय अमर सो होय ||

अर्थ : जीते जी ही मरना अच्छा है, यदि कोई मरना जाने तो। मरने के पहले ही जो मर लेता है, वह अजर-अमर हो जाता है। शरीर रहते-रहते जिसके समस्त अहंकार समाप्त हो गए, वे वासना - विजयी ही जीवनमुक्त होते हैं।

2. मैं जानूं मन मरि गया, मरि के हुआ भूत |

मूये पीछे उठि लगा, ऐसा मेरा पूत ||

अर्थ : भूलवश मैंने जाना था कि मेरा मन भर गया, परन्तु वह तो मरकर प्रेत हुआ। मरने के बाद भी उठकर मेरे पीछे लग पड़ा, ऐसा यह मेरा मन बालक की तरह है।

3. भक्त मरे क्या रोइये, जो अपने घर जाय |

रोइये साकट बपुरे, हाटों हाट बिकाय ||

अर्थ : जिसने अपने कल्याणरुपी अविनाशी घर को प्राप्त कर लिया, ऐसे संत भक्त के शरीर छोड़ने पर क्यों रोते हैं? बेचारे अभक्त - अज्ञानियों के मरने पर रोओ, जो मरकर चौरासी लाख योनियों के बाज़ार में बिकने जा रहे हैं।

4. मैं मेरा घर जालिया, लिया पलीता हाथ |

जो घर जारो आपना, चलो हमारे साथ ||

अर्थ : संसार - शरीर में जो मैं - मेरापन की अहंता - ममता हो रही है - ज्ञान की आग बत्ती हाथ में लेकर इस घर को जला डालो। अपना अहंकार - घर को जला डालता है।

5. शब्द विचारी जो चले, गुरुमुख होय निहाल |

काम क्रोध व्यापै नहीं, कबूँ न ग्रासै काल ||

अर्थ : गुरुमुख शब्दों का विचार कर जो आचरण करता है, वह कृतार्थ हो जाता है। उसको काम क्रोध नहीं सताते और वह कभी मन कल्पनाओं के मुख में नहीं पड़ता।

6. जब लग आश शरीर की, मिरतक हुआ न जाय |

काया माया मन तजै, चौड़े रहा बजाय ||

अर्थ : जब तक शरीर की आशा और आसक्ति है, तब तक कोई मन को मिटा नहीं सकता। इसलिए शरीर का मोह और मन की वासना को मिटाकर, सत्संग रूपी मैदान में विराजना चाहिए।

7. मन को मिरतक देखि के, मति माने विश्वास |

साधु तहाँ लौं भय करे, जौ लौं पिंजर साँस ||

अर्थ : मन को मृतक (शांत) देखकर यह विश्वास न करो कि वह अब धोखा नहीं देगा। असावधान होने पर वह फिर से चंचल हो सकता है इसलिए विवेकी संत मन में तब तक भय रखते हैं, जब तक शरीर में सांस चलती है।

8. कबीर मिरतक देखकर, मति धरो विश्वास |

कबहुँ जागै भूत है करे पिड़का नाश ||

अर्थ : ऐ साधक! मन को शांत देखकर निडर मत हो। अन्यथा वह तुम्हारे परमार्थ में मिलकर जाग्रत होगा और तुम्हें प्रपंच में डालकर पतित करेगा।

9. अजहुं तेरा सब मिटै, जो जग मानै हार |

घर में झजरा होत है, सो घर डारो जार ||

अर्थ : आज भी तेरा संकट मिट सकता है यदि संसार से हार मानकर निरभिमानी हो जा। तुम्हारे अंधकाररूपी घर में को काम, क्रोधा आदि का झगड़ा हो रहा है, उसे ज्ञान की अग्नि से जला डालो।

Ritu raj
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<p>ऋतु राज टाइम्स नाऊ नवभारत डिजिटल में लाइफस्टाइल डेस्क में बतौर चीफ कॉफी एडिटर कार्यरत हैं। उनकी हेल्थ और लाइफस्टाइल की खबरों पर अच्छी पकड़ है। यहां वो एक्सप्लेनर और लाइफस्टाइल की ट्रेंडिंग खबरों को लोगों के लिए परोसने का काम करते हैं। उनकी फूड, पैरेंटिंग, ब्यूटी पर अच्छी पकड़ है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की। वो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से ताल्लुक रखते हैं। ऋतु राज ने पिछले 6 सालों में एनडीटीवी, जनसत्ता जैसे बड़े संस्थानों में अलग अलग बीट्स पर काम किया है। हालांकि उनकी खास रूची न्यूज, लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट में रही है। ऋतु राज एक वॉयस ओवर आर्टिस्ट भी रहे हैं। उन्होंने एनडीटीवी में वॉयस ओवर आर्टिस्ट के तौर पर भी काम किया है। यहां उन्होंने लोकसभा चुनाव 2019 को भी कवर किया और खबरों को धार देना सीखा। साल 2021 में एनडीटीवी से इस्तीफा देने के बाद ऋतुराज ने जनसत्ता के साथ जुड़े और यहां वेब स्टोरीज पर अपनी रफ्तार बनाई और अलग अलग एंगल से खबरों को बनाना सीखा।</p>

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