International Mountain Day 2025: आज अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस है। हर साल 11 दिसंबर को यह खास दिन मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर के पर्वतों के महत्व, उनकी जैविक विविधता और उनसे जुड़े समुदायों की चुनौतियों को समझना और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। पर्वत को पृथ्वी के संतुलन का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। ये हमें पानी, औषधीय पौधे, स्वच्छ हवा और अनगिनत प्राकृतिक संसाधन देते हैं। हिमालय से लेकर एंडीज तक, पर्वतों की गोद में बसे हजारों समुदाय अपना जीवन इन्हीं पर निर्भर होकर बिताते हैं।
इन्हीं पर्वतों पर बहुत से मशहूर शायरों ने एक से बढ़कर एक शेर लिखे हैं। आज अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस 2025 के इस खास मौके पर आइए पढ़ें पहाड़ पर शायरी हिंदी में:
1. जो दे सका न पहाड़ों को बर्फ़ की चादर
वो मेरी बाँझ ज़मीं को कपास क्या देगा
- मोहसिन नक़वी
2. पहाड़ काटने वाले ज़मीं से हार गए
इसी ज़मीन में दरिया समाए हैं क्या क्या
- यगाना चंगेज़ी
3. हम पहाड़ों को रौंद आए थे
जब सलीक़ा नहीं था चलने का
- अख़्तर जमाल
4. फिर आज कैसे कटेगी पहाड़ जैसी रात
गुज़र गया है यही बात सोचते हुए दिन
- अमजद इस्लाम अमजद
5. कटते किसी तरह से नहीं हाए क्या करूँ
दिन हो गए पहाड़ मुझे इंतिज़ार के
- लाला माधव राम जौहर
6. मोहब्बत में कठिन रस्ते बहुत आसान लगते थे
पहाड़ों पर सुहुलत से चढ़ा करते थे हम दोनों
- हसन अब्बासी
7. हर सम्त फ़लक-बोस पहाड़ों की क़तारें
'ख़ुसरव' है न 'शीरीं' है न तेशा है न फ़रहाद
- शोहरत बुख़ारी
8. पहाड़ पेड़ नदी साथ दे रहे हैं मिरा
ये तेरी ओर मिरा आख़िरी सफ़र तो नहीं
- क़मर अब्बास क़मर
9. पहाड़ भाँप रहा था मिरे इरादे को
वो इस लिए भी कि तेशा मुझे उठाना था
- अख़्तर शुमार
10. पहाड़ों से चली फिर कोई आँधी
उड़े जाते हैं औराक़-ए-ख़िज़ानी
- नासिर काज़मी
11. जहां दिखाई न देता था एक टीला भी
वहाँ से लोग उठा कर पहाड़ लाए हैं
- हसन नईम
बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस 2025 की थीम है - ग्लेशियर पहाड़ों और उसके बाहर पानी, भोजन और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं।
