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Indian Army Day: जानिए कब है इंडियन आर्मी डे और हर साल क्यों मनाया जाता है इस खास दिन को

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 15, 2023, 10:53 AM IST

Indian Army Day 2023: देश में हर साल 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस सैनिकों की वीरता, बहादुरी और निस्वार्थ बलिदान को याद करने के लिए मनाते हैं। ऐसे में नई दिल्ली और सभी सेना मुख्यालयों पर सैन्य प्रदर्शन एवं सैन्य परेडों और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

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जानें क्‍यों और कब मनाया जाता है आर्मी डे

KEY HIGHLIGHTS
  • आखिर 15 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं भारतीय सेना दिवस
  • जानें आर्मी डे का महत्व और इससे जुड़े रोचक तथ्‍य
  • इस मौके पर कई मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित होते हैं


Indian Army Day: इंडियन आर्मी के लिए 15 जनवरी का दिन बेहद अहम होता है इस दिन भारतीय सेना दिवस हर साल पर मनाया जाता है। यह दिन उन भारतीय जवानों के सम्मान का दिन होता है जो सीमा की सुरक्षा करते हैं। इस मौके पर पूरा देश थल सेना के शौर्य और वीरता के साथ कुर्बानियों को दिल से याद करता है, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं की 15 जनवरी को ही आखिर क्यों भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है। यह दिन पहले भारतीय सेना दिवस फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा के विशेष सम्मान के लिए सेलिब्रेट किया गया था।

लेफ्टिनेंट जनरल केएम करिअप्पा कौन है-

भारत की आजादी से पहले सेना पर ब्रिटिश कमांडर का शिकंजा था। वर्ष 1949 में जब भारत आजाद हो चुका था, तो उस वक्त आखिरी ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल फ्रांसिस हुआ करते थे, जिनकी जगह भारतीय लेफ्टिनेंट जनरल केएम करिअप्पा ने ली। दरअसल, करिअप्पा आजाद भारत के पहले भारतीय सैन्य अधिकारी बनें और भारत और पाकिस्तान के बीच हुए वार में भारतीय सेना का नेतृत्व उन्होंने ही किया था। इसके बाद करिअप्पा फील्ड मार्शल भी बनें।

15 जनवरी को क्यों मनाते हैं सेना दिवस-

दरअसल फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा 15 जनवरी को ही भारतीय सेना प्रमुख बनें थे। इसलिए इसी दिन को हर साल भारतीय सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनके समय में भारतीय सेना में करीब 2 लाख सैनिक थे। उसके बाद करिअप्पा वर्ष 1953 में रिटायर हो गए।

भारतीय सेना दिवस पर पूरे देश के लोग थल सेना की अदम्य साहस, शौर्य, वीरता कुर्बानियों को दिल से याद करता है। भारतीय सेना का गठन साल 1776 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय सेना का गठन किया। पहले तो ब्रिटिश भारतीय सेना का नाम रखा गया, हालांकि आखिरी में भारतीय थल सेना के नाम से देश के जवानों को पहचान मिल पाई।

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