How to identify bullying in Children: आज के समय में बच्चों के बीच बुलिंग एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। स्कूल, ट्यूशन या सोशळ मीडिया, कहीं भी बच्चा इसका शिकार हो सकता है। कई बार ये देखने को मिलता है कि बच्चे डर या शर्म के कारण अपनी परेशानी खुलकर नहीं बता पाते। ऐसे में पेरेंट्स की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। बच्चे भले अपने मुंह से ना बोलें लेकिन उनकी तरफ से कुछ ऐसे इशारे जरूर मिलते हैं जो उनकी परेशानी को बयां करते हैं। बच्चों को बुली होने से पहचानने के लिए माता-पिता को इन संकेतों को समझना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि अगर बच्चे में दिखें ये चीजें तो समझ जाएं उसकी बुलिंग हो रही है:
Child bullying signs
व्यवहार में अचानक बदलाव
अगर आपका बच्चा अचानक चुप-चुप रहने लगे, लोगों से दूरी बनाने लगे या पहले जैसी खुशी नजर न आए, तो यह बुलिंग का संकेत हो सकता है। ऐसे बच्चे अकसर अकेले रहना पसंद करने लगते हैं और अपनी भावनाएं छिपाने लगते हैं।
स्कूल जाने से डर या बहाने बनाना
यदि बच्चा रोज स्कूल जाने से कतराता है, पेट दर्द या सिर दर्द का बहाना बनाता है, तो इसे हल्के में न लें। यह संकेत हो सकता है कि वह स्कूल में किसी तरह की मानसिक या शारीरिक परेशानी झेल रहा है।
पढ़ाई के ग्राफ में गिरावट
बुलिंग का असर बच्चे की पढ़ाई पर भी पड़ता है। अगर अचानक उसके नंबर गिरने लगें या पढ़ाई में मन न लगे, तो यह उसकी मानसिक स्थिति का संकेत हो सकता है।
आत्मविश्वास में कमी
जो बच्चा पहले आत्मविश्वासी था, अगर वह खुद को कमजोर समझने लगे या बार-बार “मैं कुछ नहीं कर सकता” जैसी बातें कहे, तो यह चिंता का विषय है। बुलिंग बच्चे के आत्मसम्मान को गहरा नुकसान पहुंचाती है।
शारीरिक संकेत
बच्चे के शरीर पर चोट के निशान, फटे कपड़े या खोई हुई चीजें भी बुलिंग का संकेत हो सकती हैं। अगर बच्चा इन सवालों के जवाब देने से बचता है, तो सतर्क हो जाएं।
ऑनलाइन व्यवहार में बदलाव
आजकल साइबर बुलिंग भी तेजी से बढ़ रही है। अगर बच्चा अचानक फोन या सोशल मीडिया से दूर भागने लगे या घबराया हुआ दिखे, तो यह भी एक संकेत हो सकता है।
माता-पिता क्या करें? ( what parents can do to prevent bullying )
सबसे जरूरी है कि आप बच्चे के साथ खुलकर बात करें। उसे भरोसा दिलाएं कि वह बिना डर के अपनी बात कह सकता है। उसकी बात ध्यान से सुनें और उसे दोष देने के बजाय समझने की कोशिश करें। स्कूल के शिक्षकों और दोस्तों से संपर्क करें और समस्या का समाधान मिलकर निकालें। जरूरत पड़े तो काउंसलर की मदद भी लें।
पेरेंट्स को समझना होगा कि बुलिंग एक ऐसी समस्या है जो बच्चे के मन पर गहरा असर डाल सकती है। समय रहते संकेतों को पहचानकर और सही कदम उठाकर आप अपने बच्चे को इस मुश्किल से बचा सकते हैं। याद रखें कि एक समझदार और सजग अभिभावक ही बच्चे का सबसे बड़ा सहारा होता है।
