लेट सोना-लेट उठना पड़ सकता है सेहत पर भारी, जानिए सोशल जेटलैग से कैसे घटती है प्रोडक्टिविटी
- Authored by: Vineet
- Updated Dec 26, 2025, 10:37 AM IST
How Social Jetlag And Insomnia Reduce Productivity: क्या आप भी रोज देर से सोते और देर से उठते हैं? अगर हां, तो यह आदत आपकी सेहत और काम करने की क्षमता दोनों पर भारी पड़ सकती है। सोशल जेटलैग और अनिद्रा की वजह से प्रोडक्टिविटी सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। चलिए जानते हैं कैसे बिगड़ा स्लीप पैटर्न शरीर, दिमाग और कामकाज पर नकारात्मक असर डालता है।
क्या है सोशल जेटलैग
How Social Jetlag And Insomnia Reduce Productivity: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर रात तक मोबाइल चलाना, ओटीटी देखना या काम में लगे रहना आम बात हो गई है। फिर सुबह देर से उठना भी हमारी आदत में शामिल हो गया है। देखने में यह मामूली लग सकता है, लेकिन यही आदत आगे चलकर सेहत और कामकाज दोनों के लिए भारी पड़ सकती है। त्सुकुबा विश्वविद्यालय (University of Tsukuba) के रिसर्चर्स का कहना है कि सोशल जेटलैग और अनिद्रा से जूझ रहे लोगों में प्रोडक्टिविटी लॉस सबसे ज्यादा देखा गया है। यानी शरीर तो घर पर होता है, लेकिन दिमाग पूरी तरह काम के मूड में नहीं आ पाता।
क्या है सोशल जेटलैग और क्यों बढ़ रहा?
सोशल जेटलैग तब होता है, जब हमारे सोने-जागने का समय हफ्ते के कामकाजी दिनों और छुट्टी के दिनों में अलग-अलग हो जाता है। जैसे वीकडेज में जल्दी उठना और वीकेंड पर देर तक सोना। रिपोर्ट के अनुसार, यह गड़बड़ स्लीप पैटर्न शरीर की नेचुरल बॉडी क्लॉक को बिगाड़ देता है। धीरे-धीरे शरीर थकान महसूस करने लगता है और नींद पूरी होने के बावजूद फ्रेशनेस नहीं आती।
देर से सोना कैसे करता है प्रोडक्टिविटी कम
वैज्ञानिकों के अनुसार सोशल जेटलैग और अनिद्रा वाले लोगों में काम पर फोकस करने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे लोग जल्दी थक जाते हैं, छोटी-छोटी बातों में चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं और निर्णय लेने में भी दिक्कत आती है। इसका सीधा असर ऑफिस या रोजमर्रा के काम पर पड़ता है, जिससे कुल प्रोडक्टिविटी घट जाती है।
अनिद्रा और सोशल जेटलैग का गहरा कनेक्शन
सोशल जेटलैग वाले लोगों में अनिद्रा की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। देर से सोने की आदत नींद की क्वालिटी को खराब करती है। नींद पूरी न होने से दिमाग को पूरा आराम नहीं मिल पाता और इसका असर अगले दिन की एनर्जी और मूड पर साफ नजर आता है।
मानसिक सेहत पर भी पड़ता है असर
सिर्फ काम ही नहीं, सोशल जेटलैग मानसिक सेहत को भी प्रभावित करता है। लगातार थकान, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या से तनाव और चिंता बढ़ सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसे लोगों में मानसिक थकावट ज्यादा देखी जाती है, जिससे उनका सामाजिक और पारिवारिक जीवन भी प्रभावित हो सकता है।
समय पर सोना क्यों है जरूरी
हेल्थ एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर देती है कि रोज एक तय समय पर सोना और उठना बेहद जरूरी है। इससे बॉडी क्लॉक सही रहती है, नींद की क्वालिटी बेहतर होती है और काम में मन लगता है। समय पर सोने की आदत अपनाकर न सिर्फ प्रोडक्टिविटी बढ़ाई जा सकती है, बल्कि सेहत को भी लंबे समय तक बेहतर रखा जा सकता है।
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