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Gen Z का करियर खराब कर रही है पेरेंट्स की ये आदत, नई तरह की परेशानी झेल रहे युवा

माता-पिता को गाइड और मेंटर की भूमिका में रहना चाहिए, लेकिन अपने बच्चों की पेशेवर डोर उनके ही हाथों में सौंप देनी चाहिए ताकि वे कॉर्पोरेट दुनिया की चुनौतियों का सामना खुद कर सकें।

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बच्चों के वर्कप्लेस पर क्यों बढ़ रहा पेरेंट्स का दखल (Photo: iStock)

कॉर्पोरेट वर्ल्ड और वर्कप्लेस पर एक नया चलन देखने को मिल रहा है। LinkedIn की मानें तो बच्चों की नौकरी में माता-पिता का दखल बढ रहा है। इसे एक्सपर्ट्स 'हेलीकॉप्टर पैरेंटिंग एट वर्क' कह रहे हैं। आमतौर पर देखा गया है कि माता-पिता बच्चों के स्कूल या कॉलेज तक ही उनके शिक्षा मामलों में हस्तक्षेप करते हैं, लेकिन अब Gen Z के वर्कप्लेस पर भी पेरेंट्स की मौजूदगी और दखलअंदाजी तेजी से बढ़ रही है।

क्या है हेलीकॉप्टर पैरेंटिंग एट वर्क?

हेलीकॉप्टर पैरेंटिंग का मतलब है माता-पिता द्वारा अपने बच्चों की हर गतिविधि और फैसले पर लगातार नजर रखना और उसमें हद से ज्यादा हस्तक्षेप करना। जब यही व्यवहार बच्चे की पेशेवर जिंदगी या नौकरी में दिखने लगता है, तो इसे वर्कप्लेस हेलीकॉप्टर पैरेंटिंग कहा जाता है।

हालिया रिपोर्टों और एचआर प्रोफेशनल्स के अनुसार, कई माता-पिता अब अपने बच्चों के जॉब इंटरव्यू, सैलरी नेगोशिएशन, परफॉर्मेंस रिव्यू और यहां तक कि ऑफिस में होने वाले विवादों में भी सीधे शामिल हो रहे हैं। हालांकि भारत में अभी ऐसे बहुत ज्यादा मामले नहीं देखते, लेकिन ग्लोबल लेवल पर ऐसा हो रहा है।

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किन चीजों में माता-पिता दे रहे दखल?

एचआर प्रोफेशन्ल्स और मैनेजर्स ने कई हैरान करने वाले उदाहरण साझा किए हैं:

इंटरव्यू में मौजूदगी: कई उम्मीदवार अपने माता-पिता को जॉब इंटरव्यू या कैंपस प्लेसमेंट के दौरान साथ लाते हैं और कई बार माता-पिता ही इंटरव्यूअर के सवालों का जवाब देने लगते हैं।

वेतन और प्रमोशन में बातचीत: बच्चे की जगह माता-पिता एचआर मैनेजर को फोन करके सैलरी बढ़ाने या बेहतर पद देने की मांग करते हैं।

लीव और इस्तीफे का फैसला: बीमारी की छुट्टी मांगने या कंपनी से इस्तीफा देने के लिए भी पेरेंट्स ऑफिस में कॉल या ईमेल करते हैं।

क्यों बढ़ रहा है यह चलन?

विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई सामाजिक और व्यवहारिक कारण हैं:

ओवर-प्रोटेक्शन: पेरेंट्स अपने बच्चों को बचपन से ही असफलताओं या तनाव से बचाते आए हैं। यही वजह है कि वे उन्हें कॉर्पोरेट दबाव से भी सुरक्षित रखना चाहते हैं।

महामारी और रिमोट वर्क का असर: कोविड-19 के दौरान घर से पढ़ाई और काम करने के कारण माता-पिता को अपने बच्चों के काम और कॉर्पोरेट कल्चर को करीब से देखने का मौका मिला, जिससे उनकी आदत में यह दखलअंदाजी शामिल हो गई।

कम्युनिकेशन गैप: Gen Z के युवाओं में पेशेवर दुनिया के सीधे संवाद, मोलभाव और संघर्षों को खुद संभालने के आत्मविश्वास की कमी देखी जा रही है।

करियर पर इसका नकारात्मक प्रभाव

भले ही माता-पिता यह सब अपने बच्चों की भलाई और मदद के लिए करते हों, लेकिन इसके दुष्परिणाम युवाओं के करियर पर भारी पड़ सकते हैं:

डिसीजन मेकिंग और फ्रीडम की कमी: जब युवा खुद निर्णय नहीं लेंगे, तो वे कार्यस्थल पर एक बेहतर लीडर या स्वतंत्र पेशेवर नहीं बन पाएंगे।

कंपनियों का नकारात्मक नजरिया: एचआर और मैनेजर्स ऐसे उम्मीदवारों को काम पर रखने से बचते हैं जो अपनी जिम्मेदारियों के लिए माता-पिता पर निर्भर रहते हैं। इससे उम्मीदवार की पेशेवर साख प्रभावित होती है।

एक्सपर्ट्स की सलाह

वर्कप्लेस पर सफलता पाने के लिए युवाओं को आत्मनिर्भर होना और अपने फैसले खुद लेना सीखना होगा। माता-पिता को गाइड और मेंटर की भूमिका में रहना चाहिए, लेकिन अपने बच्चों की पेशेवर डोर उनके ही हाथों में सौंप देनी चाहिए ताकि वे कॉर्पोरेट दुनिया की चुनौतियों का सामना खुद कर सकें।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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