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Alvida 2024 Shayari: आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर, जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे..पढ़ें कुछ शेर जाते हुए साल की विदाई में

Alvida 2024 Shayari: हमारी संस्कृति में है कि हम आने वाले का स्वागत तो करते ही हैं, साथ ही जाने वाले को विदाई भी बड़ी शान से देते हैं। शायद इसी कारण पुराने साल की विदाई पर देश दुनिया के तमाम शायरों ने बेहद खूबसूरत शेर कहे हैं।

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Alvida 2024 Shayari in Hindi

Happy New Year 2025, Alvida 2024 Shayari in Hindi: दिसंबर का महीना भी खत्म हो रहा है। इस माह-ए-दिसंबर के हर बीतते दिन के साथ यह साल भी रुखसत हो रहा है। नये साल का नया सूरज उगने को बेताब है। हमारी संस्कृति में है कि हम आने वाले का स्वागत तो करते ही हैं, साथ ही जाने वाले को विदाई भी बड़ी शान से देते हैं। शायद इसी कारण पुराने साल की विदाई पर देश दुनिया के तमाम शायरों ने बेहद खूबसूरत शेर कहे हैं। आइए यहां देखें बीत रहे साल की विदाई के चंद मशहूर शेर:

उस को रुख़्सत तो किया था मुझे मालूम न था

सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला

- निदा फ़ाज़ली

गूँजते रहते हैं अल्फ़ाज़ मिरे कानों में

तू तो आराम से कह देता है अल्लाह-हाफ़िज़

- अज्ञात

जादा जादा छोड़ जाओ अपनी यादों के नुक़ूश

आने वाले कारवाँ के रहनुमा बन कर चलो

- अज्ञात

जाने वाले से मुलाक़ात न होने पाई

दिल की दिल में ही रही बात न होने पाई

- शकील बदायुनी

पुराने साल की ठिठुरी हुई परछाइयां सिमटीं

नए दिन का नया सूरज उफ़ुक़ पर उठता आता है

- अली सरदार जाफ़री

छोड़ने मैं नहीं जाता उसे दरवाज़े तक

लौट आता हूँ कि अब कौन उसे जाता देखे

- शहज़ाद अहमद

अब के जाते हुए इस तरह किया उस ने सलाम

डूबने वाला कोई हाथ उठाए जैसे

- अज्ञात

अब तुम कभी न आओगे यानी कभी कभी

रुख़्सत करो मुझे कोई वादा किए बग़ैर

- जौन एलिया

अब तो जाते हैं बुत-कदे से 'मीर'

फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया

- मीर तक़ी मीर

आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर

जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे

- अहमद फ़राज़

कुछ ख़ुशियाँ कुछ आंसू दे कर टाल गया

जीवन का इक और सुनहरा साल गया

- अज्ञात

आँख से दूर सही दिल से कहाँ जाएगा

जाने वाले तू हमें याद बहुत आएगा

- उबैदुल्लाह अलीम

न शब ओ रोज़ ही बदले हैं न हाल अच्छा है

किस बरहमन ने कहा था कि ये साल अच्छा है

- अहमद फ़राज़

उसे जाने की जल्दी थी सो मैं आँखों ही आँखों में

जहाँ तक छोड़ सकता था वहाँ तक छोड़ आया हूँ

- अज्ञात

उम्मीद करते हैं आपके ये शेर जरूर पसंद आए होंगे। आप इनमें से कोई भी शेर किसी अपने को भेज उनके चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं। इसी आशा के साथ दुआ है आपका आने वाला साल हर मामले में बीत रहे साल से बेहतर हो।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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