Guru Purnima 2023: इस साल 3 जुलाई 2023 यानी आज ही के दिन गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) मनाई जाएगी। गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima 2023) का उत्सव उन आत्मज्ञानी गुरुओं (Spiritual Gurus) के प्रति आभार प्रकट करने का भी दिन है, जो हमें मानव होने की परम संभावना तक पहुंचने का रास्ता दिखाते हैं। 'गु' का अर्थ होता है 'अंधकार' या 'अज्ञानता' जबकि 'रु' का अर्थ होता है 'वह जो दूर करता है'। इसलिए 'गुरु' शब्द का अर्थ होता है अज्ञान के अंधकार को मिटाने वाला। गुरु पूर्णिमा के पवन अवसर पर आज हम आज आपके साथ कुछ महान महान भारतीय गुरुओं के कहे गए प्रेरक विचार साझा कर रहे हैं जो आपके जीवन को प्रकाशित करने का काम करेंगे।
आदि शंकराचार्य: जैसे सोने को एक भट्टी में शुद्ध किया जाता है और इस तरह वह अपनी अशुद्धियों को छोड़कर अपने सही स्वरूप को प्राप्त करता है, वैसे ही मन ध्यान के माध्यम से भ्रम और आसक्ति की अशुद्धियों से मुक्त होकर सत्य को प्राप्त करता है।
बुद्ध: 'परिवर्तन कभी दुखदायी नहीं होता, केवल परिवर्तन के प्रति विरोध इसको दुखदायी बना देता है।'
सद्गुरु: 'बुद्धिमान होने की पहचान यह है कि आप सदैव प्रकृति के विशाल अस्तित्व को देखकर हैरान और जिज्ञासु बने रहते हैं। केवल मूर्ख ही अपने जीवन में होने वाली हर चीज़ के प्रति बिल्कुल निश्चिंत होते हैं।'
रामकृष्ण परमहंस: 'आध्यात्मिकता स्वतः ही विनम्रता की ओर ले जाती है। जब एक फूल फल में बदलता है, तो पत्तियां खुद ही गिर जाती हैं। जब कोई आध्यात्मिक बनता है, तो अहंकार अपने आप ही धीरे-धीरे मिटता जाता है। फलों से भरे हुए पेड़ हमेशा झुके रहते हैं। विनम्रता महानता की पहचान है।'
स्वामी विवेकानंद: 'एक विचार चुनें। उस एक विचार को अपना जीवन बनाएं - उस पर सोचें, उसके बारे में सपने देखें, उसके लिए जिएं। मस्तिष्क, पेशीयां, तंत्रिकाएं, आपके शरीर का हर अंग उस विचार से भरपूर हो, अन्य सभी विचारों को छोड़ दें। यह सफलता का रास्ता है।'
श्री एम: 'किसी को अपने सिर को मुंडवाने, विशेष पगड़ी पहनने, सफेद वस्त्र धारण करने या अपनी प्रिय वस्तुओं से दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। नहीं सर! आप इस दुनिया में रहकर अपने कर्तव्यों को निभा सकते हैं, अपनी आजीविका कमा सकते हैं, ज़रूरतमंदो का ध्यान रख सकते हैं, प्यार और सेवा की महक फैला सकते हैं। नियमित ध्यान करके अपने सच्चे स्वरूप से जुड़े रहने का याद रखें…फिर,आपके हृदय से, आत्मा की शांतिपूर्ण किरणें निकलेंगी और दूसरे हृदयों को आनंद से भर देंगी।
परमहंस योगानंद: 'अपनी अवगुणों से मुक्ति पाने के लिए मौत पर निर्भर ना रहें। आप मृत्यु के बाद भी उसी तरह होते हैं जैसे की आप मरने से पहले थे। कुछ नहीं बदलता; आप केवल शरीर को छोड़ते हैं। अगर आप मृत्यु से पहले चोर, झूठे या धोखेबाज़ थे, तो मरने के बाद आप सीधे स्वर्ग के दूत नहीं बन जाएंगे। अगर ऐसा संभव होता तो चलो अब हम सब समुद्र में कूद जाएं और तुरंत एक बार में एंजेल बन जाएं! आपने अब तक अपने आप को जैसा भी बनाया है, वही आप आगे भी रहेंगे। जब आपका पुनर्जन्म होगा, तब भी अपनी वही प्रकृति लेकर आएंगे। परिवर्तन के लिए, आपको प्रयास करना होगा।'
रमण महर्षि: 'मैं कौन हूं?' यह सवाल वास्तव में जवाब हासिल करने के लिए नहीं है, बल्कि यह सवाल 'मैं कौन हूं?' पूछने वाले को ही विलीन करने के लिए है।
श्री अरविन्दो: 'पूरी दुनिया मुक्ति की तरफ आकर्षित होती है, लेकिन हर एक प्राणी अपनी जंजीरों से प्यार करता है। यह हमारे स्वभाव का पहला विरोधाभासी तार है जो आसानी से अलग नहीं किया जा सकता।'
महावीर: 'एक आदमी एक जलते हुए जंगल के बीच एक पेड़ पर बैठा हुआ है। उसने सभी जीवित प्राणियों को खत्म होते देखा। लेकिन फिर भी उसे इस बात का आभास नहीं होता कि वही किस्मत जल्द उसे भी नष्ट करने वाली है। यह एक मूर्ख आदमी की पहचान है।'
आशा है कि यहां बताए गए वचन आपके अंदर आश्चर्य और आत्मविचार को जगाएंगे। साधक 3 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर ऐसे ही एक योगी सद्गुरु का लाइव सत्संग से जुड़ कर ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
