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क्या होते हैं ग्रीन पटाखे, क्या Green होने से ये प्रदूषण नहीं करते, इन पटाखों को खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान

green patakhe kya hote hain: ग्रीन पटाखे क्या होते हैं और अगर इनको खरीदने जा रहे हैं तो जान लें कि कैसे पहचानें असली ग्रीन पटाखे, पैकेट पर कौन सा लोगो देखें। ये भी जान लें कि ग्रीन पटाखे लेते समय QR कोड स्कैन करना क्यों जरूरी है?

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क्या होते हैं ग्रीन पटाखे, क्या Green होने से ये प्रदूषण नहीं करते, इन पटाखों को खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान

Green patakhe kya hote hain: दिवाली आने वाली है और अगर आप भी बच्चों के लिए पटाखे खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इस बार बाजार में थोड़ा संभलकर जाइएगा। हो सकता है दुकानदार आपको पटाखों का कोई पैकेट दिखाकर कहे कि ये लीजिए, बिल्कुल ग्रीन पटाखे हैं। इनसे प्रदूषण भी कम होता है। उसकी बात सुनकर आप भी सोचें कि चलो, इस बार पर्यावरण का ध्यान रखते हुए यही खरीद लेते हैं। लेकिन लेने से पहले चेक करें कि जिस पैकेट पर Green Crackers लिखा है, वह सचमुच ग्रीन पटाखा है भी या नहीं

दरअसल, ग्रीन पटाखों के नाम पर बाजार में कई तरह के दावे किए जाते हैं। ऐसे में सिर्फ पैकेट पर लिखा नाम देखकर भरोसा करना ठीक नहीं है। असली ग्रीन पटाखे की पहचान के लिए कुछ जरूरी बातें जानना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

ग्रीन पटाखे क्या होते हैं

आपने ग्रीन पटाखों का नाम तो कई बार सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सामान्य पटाखों से ये अलग कैसे होते हैं? दरअसल, ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे हैं जिन्हें सामान्य पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है। इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और इनकी रासायनिक संरचना पर खास ध्यान दिया जाता है, ताकि जलने के बाद हवा में कम हानिकारक कण और गैसें निकलें।

भारत में CSIR-NEERI यानी राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान ने ग्रीन पटाखों के विकास और उनकी जांच के लिए कुछ पैरामीटर्स तैयार किए हैं। इसमें ग्रीन पटाखों से सामान्य पटाखों की तुलना में 30 फीसदी कम पार्टिकुलेट मैटर के हवा में निकलने का लक्ष्य रखा गया है।

लेकिन यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है। ग्रीन पटाखों का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उनसे प्रदूषण नहीं होता। इन्हें जलाने पर भी धुआं और हानिकारक कण निकलते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले ग्रीन पटाखों से सामान्य पटाखों के मुकाबले प्रदूषण कम होता है।

क्या पैकेट पर Green लिखे होने वह ग्रीन पटाखा होगा

खरीदारी करते समय आपको सबसे पहले यही बात समझनी चाहिए। कई बार पैकेट पर Green, Eco-friendly या Low Pollution जैसे शब्द बड़े अक्षरों में लिखे होते हैं। दुकानदार भी इन्हीं शब्दों के सहारे आपको भरोसा दिलाने की कोशिश कर सकता है। लेकिन सिर्फ इन शब्दों से किसी पटाखे को ग्रीन नहीं माना जा सकता।

असली ग्रीन पटाखों की पहचान उनके आधिकारिक प्रमाणन से होती है। इसलिए पैकेट पर CSIR-NEERI से संबंधित आधिकारिक Green Fireworks लोगो और प्रमाणन की जानकारी जरूर देखें।

एक और बात का ध्यान रखें। अगर किसी कंपनी के एक पटाखे को ग्रीन पटाखे का प्रमाणन मिला है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उस कंपनी के सभी पटाखे ग्रीन हैं। हर उत्पाद की अपनी पहचान और प्रमाणन होना जरूरी है। तभी उसे ग्रीन पटाखे में शामिल किया जाएगा।

QR कोड को स्कैन किए बिना पटाखे न खरीदें

पटाखों के पैकेट पर QR कोड देखकर आप अक्सर आगे बढ़ जाते होंगे। लेकिन इस बार ऐसा मत कीजिएगा। अपना मोबाइल निकालिए और QR कोड स्कैन करके देखिए।इससे आपको उत्पाद और निर्माता से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है। मसलन, पटाखा बनाने वाली कंपनी का नाम, प्रोडक्ट की पहचान, रजिस्ट्रेशन और प्रमाणन संबंधी जानकारी।

अब एक बात और। QR कोड स्कैन करने के बाद जो जानकारी सामने आए, उसे पैकेट पर छपी जानकारी से मिलाना न भूलें। दोनों में अंतर नजर आए, तो पटाखा खरीदने से बचें।

सिर्फ QR कोड छपा होना भी उसकी असलियत की गारंटी नहीं है। उसकी जानकारी सही और संबंधित उत्पाद से जुड़ी होनी चाहिए।

दुकानदार से ग्रीन पटाखे का लाइसेंस जरूर पूछें

दिवाली की खरीदारी के दौरान दुकानदार की बात पर भरोसा करना आम बात है। वह कहता है कि यह नया ग्रीन पटाखा है या इस बार यही सबसे ज्यादा बिक रहा है, तो हम भी उसकी बात मान लेते हैं। लेकिन पटाखों के मामले में थोड़ी जांच-पड़ताल जरूरी है। हमेशा अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त दुकान से ही खरीदारी करें। अगर दुकान पर जरूरी लाइसेंस या बिक्री से जुड़ी जानकारी नहीं है, तो वहां से पटाखे खरीदने से बचें।

और हां, बिल लेना बिल्कुल न भूलें। खरीदारी के समय शायद यह छोटी बात लगे, लेकिन किसी तरह की शिकायत होने पर बिल आपके काम आ सकता है।

पटाखे का पैकेट भी ध्यान से देखिए

अक्सर हम पटाखे खरीदते समय यह देखते हैं कि पैकेट में कितने पटाखे हैं, उनकी कीमत क्या है और कौन सा पटाखा ज्यादा आवाज या रोशनी करेगा। लेकिन पैकेट की हालत पर शायद ही कोई ध्यान देता है। लेकिन पटाखे लेते हुए ये भी चेक करें कि पैकेट की सील बंद है या नहीं। उस पर निर्माता का नाम, बैच नंबर और जरूरी जानकारी साफ-साफ छपी होनी चाहिए।

अगर पैकेट खुला हुआ है, उस पर दोबारा टेप लगी है या QR कोड मिटा हुआ है, तो उसे खरीदने से बचें। दुकानदार अगर अलग-अलग पटाखों को मिलाकर नया पैकेट बना रहा है, तो भी सतर्क रहें।

ग्रीन पटाखों के नाम पर प्रतिबंधित पटाखे तो नहीं खरीद रहे

यह बात भी जान लीजिए कि हर तरह के पटाखे ग्रीन नहीं होते। कुछ पटाखों पर प्रतिबंध है। मसलन, पटाखों की लड़ियां और बेरियम वाले पटाखे प्रतिबंधित हैं। इसलिए अगर दुकानदार आपको कोई ऐसा पटाखा ग्रीन बताकर बेचने की कोशिश करता है, तो उसकी बात पर तुरंत भरोसा न करें। उत्पाद का प्रमाणन और स्थानीय नियम जरूर जांचें।

खासकर दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों को पटाखों से जुड़े नियमों की जानकारी होनी चाहिए। यहां बिक्री और इस्तेमाल को लेकर अलग से प्रतिबंध और शर्तें लागू हो सकती हैं।

क्या ग्रीन पटाखों से बिल्कुल प्रदूषण नहीं होता

अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं, तो अपनी यह गलतफहमी दूर कर लीजिए। ग्रीन पटाखे भी प्रदूषण फैलाते हैं। ऐसा नहीं है कि इन्हें जलाने से हवा पर कोई असर नहीं पड़ता। हां बस इतना जरूरी है कि ये पटाखे सामान्य पटाखों के मुकाबले प्रदूषण कम करते हैं। इसलिए यह सोचना गलत होगा कि ग्रीन पटाखे हैं तो जितने चाहें उतने जला सकते हैं।

बेहतर यही है कि अगर पटाखे खरीद भी रहे हैं, तो उनकी संख्या सीमित रखें। बच्चों को भी समझाएं कि दिवाली का मजा सिर्फ पटाखे जलाने में नहीं, बल्कि परिवार के साथ समय बिताने, घर सजाने और खुशियां बांटने में भी है।

दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखों को लेकर क्या हैं नियम

अगर आप दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद या आसपास के किसी इलाके में रहते हैं, तो पटाखे खरीदने से पहले स्थानीय नियमों की जानकारी जरूर ले लें। 29 अक्टूबर 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत दिल्ली-NCR में कुछ शर्तों के साथ ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अस्थायी अनुमति दी गई है।

इसके तहत केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित और PESO से मंजूर ग्रीन पटाखों की ही बिक्री की जा सकती है। बिक्री निर्धारित स्थानों पर होनी चाहिए और पैकेट पर संबंधित उत्पाद तथा बैच का QR कोड होना जरूरी है।

आदेश के अनुसार 7 और 8 नवंबर 2026 को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे जलाने की अनुमति है। अस्पतालों, स्कूलों, वृद्धाश्रमों और निर्धारित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने की अनुमति नहीं है। 9 नवंबर से दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर लागू होगा।

इसलिए खरीदारी करने से पहले अपने इलाके में लागू आदेशों की जानकारी जरूर लें।

ग्रीन पटाखे खरीदने जा रहे हैं तो ये बातें याद रखें

अगली बार जब आप पटाखों की दुकान पर जाएं, तो इन बातों को जरूर ध्यान में रखें:

  • पैकेट पर सिर्फ Green लिखा देखकर भरोसा न करें।
  • आधिकारिक Green Fireworks लोगो और प्रमाणन देखें।
  • QR कोड स्कैन करके जानकारी की पुष्टि करें।
  • निर्माता का नाम और बैच नंबर जांचें।
  • अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त दुकान से ही खरीदें।
  • खरीदारी का बिल जरूर लें।
  • प्रतिबंधित पटाखों से दूरी रखें।
  • अपने शहर में लागू नियमों के मुताबिक ही पटाखे जलाएं।

ग्रीन पटाखे चुनना सामान्य पटाखों के मुकाबले बेहतर विकल्प हो सकता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह प्रदूषण मुक्त समझना ठीक नहीं है। थोड़ी सी सावधानी और समझदारी से आप त्योहार की खुशियों के साथ पर्यावरण का ध्यान रखने की कोशिश भी कर सकते हैं। आखिर दिवाली की रोशनी सबके लिए होनी चाहिए।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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