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Workplace Romance: 60% का ऑफिस में अफेयर, क्यों ऑफिस कलीग के लिए पार्टनर को धोखा दे रहे लोग

Workplace Romance: फोर्ब्स एडवाइजर के हालिया सर्वे के मुताबिक, लगभग 60 प्रतिशत में लोग अपने किसी सहकर्मी के साथ रिश्ते में रह चुके हैं।

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भारत में भी तेजी से फैल रहा वर्कप्लेस रोमांस कल्चर (Photo: iStock)

Workplace Romance: एक ताजा सर्वे बताता है कि आजकल ऑफिस सिर्फ काम करने की जगह नहीं रह गया है, बल्कि कई लोगों के लिए रिश्ते बनने की जगह भी बनता जा रहा है। लंबे समय तक साथ काम करना, रोज बातचीत होना और एक-दूसरे के साथ समय बिताना कई बार सहकर्मियों को भावनात्मक रूप से करीब ले आता है। यही वजह है कि ऑफिस रोमांस और सहकर्मियों के साथ रिश्तों को लेकर कई सर्वे और रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं।

फोर्ब्स एडवाइजर के हालिया सर्वे के मुताबिक, लगभग 60 प्रतिशत में लोग अपने किसी सहकर्मी के साथ रिश्ते में रह चुके हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई लोगों ने अपने पार्टनर को छोड़कर या उनसे छिपाकर ऑफिस के किसी साथी के साथ रिश्ता बनाया। सर्वे में शामिल करीब 40% लोगों ने माना कि उन्होंने अपने मौजूदा पार्टनर को धोखा देकर किसी सहकर्मी के साथ रिश्ता बनाया था।

क्यों ऑफिस कलीग को डेट करते हैं लोग

विशेषज्ञों का कहना है कि ऑफिस में रिश्ते बनने की सबसे बड़ी वजह कम्फर्ट यानी सहजता होती है। लोग अपने सहकर्मियों के साथ रोज कई घंटे बिताते हैं, काम का तनाव साझा करते हैं और एक-दूसरे की सोच को समझने लगते हैं। ऐसे में भावनात्मक जुड़ाव बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है। कई लोगों ने यह भी माना कि व्यस्त जीवनशैली के कारण उन्हें ऑफिस के बाहर नए लोगों से मिलने का समय नहीं मिलता, इसलिए वे अपने वर्कप्लेस पर ही इमोशनल बॉन्ड बना लेते हैं।

ऑफिस में डेटिंग का बुरा असर

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑफिस रोमांस हमेशा सकारात्मक नहीं होता। ऐसे रिश्तों का असर कामकाज और निजी जीवन दोनों पर पड़ सकता है। कई कंपनियां ऑफिस रिलेशनशिप को लेकर स्पष्ट नियम बनाती हैं, क्योंकि इससे पक्षपात, तनाव और टीम के माहौल पर असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में रिश्ता टूटने के बाद ऑफिस का माहौल भी असहज हो जाता है।

भारत में तेजी से बढ़ रहा है वर्कप्लेस रोमांस

भारत में भी यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। एक अन्य सर्वे के अनुसार, भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां ऑफिस रोमांस तेजी से बढ़ रहा है। कई भारतीय कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि वे कभी न कभी अपने सहकर्मी को डेट कर चुके हैं।

दिलचस्प बात यह है कि दफ्तरों में पनपने वाला रोमांस सिर्फ डेटिंग तक सिमट कर नहीं रहा। कई लोगों ने अपने सहकर्मियों से शादी भी की। सर्वे में शामिल लोगों में से बड़ी संख्या ने कहा कि उनका ऑफिस रिलेशनशिप बाद में शादी में बदल गया।

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स में इजाफा

एक्स्ट्रा मैरिटल रिलेशन और बेवफाई के मामलों में भी ऑफिस एक बड़ी जगह बनकर उभर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि शादीशुदा लोगों के बीच सहकर्मियों के साथ भावनात्मक या शारीरिक संबंध बनने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार साथ काम करना, भावनात्मक सहारा मिलना और निजी परेशानियां साझा करना कई बार रिश्तों की सीमाएं धुंधली कर देता है।

सोशल मीडिया और ऑनलाइन फोरम्स पर भी ऐसे कई अनुभव देखने को मिलते हैं, जहां लोगों ने ऑफिस अफेयर्स के कारण रिश्तों में तनाव, असुरक्षा और मानसिक दबाव की बात साझा की। कुछ लोगों ने इसे भावनात्मक नजदीकी का परिणाम बताया, तो कुछ ने इसे रिश्तों में असंतोष से जोड़कर देखा।

वर्कप्लेस रोमांस से बचना है जरूरी

विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी रिश्ते में पारदर्शिता और सीमाएं बेहद जरूरी हैं। ऑफिस में दोस्ती और प्रोफेशनल संबंध सामान्य हैं, लेकिन अगर भावनात्मक जुड़ाव बढ़ने लगे, तो उसके असर को समझना भी जरूरी है। क्योंकि कई बार एक छोटा आकर्षण न केवल निजी रिश्तों, बल्कि करियर और मानसिक शांति को भी प्रभावित कर सकता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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