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Father's Day 2026: 'पिता है तो बाजार के सब खिलौने अपने हैं..', पढ़े पिता पर ओम व्यास की मशहूर कविता

पिता पर कविता (Poem on Father): पिता पर ओम व्यास की एक प्यारी से कविता है जिसे लोगों ने खूब पसंद किया है। इस कविता का भाव ये है कि हमारी जिंदगी में पिता का होना क्या मायने रखता है।

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ओम व्यास की पिता पर कविता (Photo: iStock)

पिता पर ओम व्यास की कविता (Om Vyas Poem on Fathers): किसी के भी जीवन में पिता वह नींव होता है जिसपर पूरे परिवार का संसार टिका होता है। पिता अपनी भावनाओं को शब्दों में कम और जिम्मेदारियों के जरिए ज्यादा व्यक्त करते हैं। बच्चों की छोटी-छोटी जरूरतों से लेकर उनके बड़े सपनों तक, पिता हर मोड़ पर एक मजबूत सहारे की तरह साथ खड़े रहते हैं।

पिता के त्याग, संघर्ष और मेहनत का एहसास हमें तब होता है, जब हम खुद जिम्मेदारियों का बोझ उठाना शुरू करते हैं। पिता डांटते भी हैं, समझाते भी हैं और जरूरत पड़ने पर दोस्त की तरह सलाह भी देते हैं। उनकी मौजूदगी ही एक अनोखे तरह का संबल का काम करती है।

यूं तो पिता पर कितना भी लिखें कम ही होगा, लेकिन फिर भी कुछ कवियों ने पिता के संसार को अपनी कविताओं के जरिए बयां किया है। पिता के प्रेम, समर्पण और त्याग पर ऐसी ही एक मशहूर कविता है जिसे लिखा है लोकप्रिय कवि ओम व्यास ने। आइए पढ़ें पिता पर ओम व्यास की मशहूर कविता:

पिता जीवन है, संबल है, शक्ति है

पिता सृष्टि के निर्माण की अभिव्यक्ति है

पिता उंगली पकड़े बच्चे का सहारा है

पिता कभी कुछ खट्टा, कभी खारा है

पिता पालन है, पोषण है, पारिवार का अनुशासन है

पिता धौंस से चलने वाला प्रेम का प्रशासन है

पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है

पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान है

पिता अपदर्शित अनन्त प्यार है

पिता है तो बच्चों को इंतजार है

पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं

पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं

पिता से परिवार में प्रतिपल राग है

पिता से ही माँ का बिंदी और सुहाग है

पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ति है

पिता गृहस्थ आश्रम में उच्च स्थिति की भक्ति है

पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ति है

पिता रक्त में दिये हुए संस्कारों की मूर्ति है

पिता एक जीवन को जीवन का दान है

पिता दुनिया दिखाने का अहसान है

पिता सुरक्षा है, सिर पर हाथ है

पिता नहीं तो बचपन अनाथ है

तो पिता से बड़ा तुम अपना नाम करो

पिता का अपमान नहीं, उन पर अभिमान करो

क्योंकि मां­ बाप की कमी कोई पाट नहीं सकता

और ईश्वर भी इनके आशीषों को काट नहीं सकता

विश्व में किसी भी देवता का स्थान दूजा है

मां ­बाप की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है

विश्व में किसी भी तीर्थ की यात्राएं व्यर्थ हैं

यदि बेटे के होते मां ­बाप असमर्थ हैं

वो खुशनसीब हैं मां­ बाप जिनके साथ होते हैं

क्योंकि मां ­बाप की आशीषों के हज़ारों हाथ होते हैं

21 जून 2026 को फादर्स डे (Father's Day 2026) के मौके पर आप यह कविता अपने दोस्तों को भेज सकते हैं। आप चाहें तो इस कविता को अपने सोशल मीडिया के जरिए भी शेयर कर सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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