लाइफस्टाइल

ना मेकअप ना छोटे कपड़े, बेटियों के लिए फराह खान के नियम, जानें पेरेंटिंग में कितनी सख्ती है सही

पेरेंटिंग का कोई फिक्स फॉर्मूला नहीं होता जो हर फैमिली पर फिट बैठे। फराह खान का तरीका शायद हर किसी को पसंद न आए, लेकिन उन्होंने आज के पेरेंट्स के सामने एक बहुत जरूरी सवाल खड़ा कर दिया है।

Image

बहुत सख्त मां रही हैं फराह खान।

Farah Khan Parenting: मशहूर बॉलीवुड कोरियोग्राफर फराह खान की तीन बेटियां हैं। तीनों की उम्र करीब 18 साल है। हाल ही में फराह ने एक पॉडकास्ट में बताया कि उन्होंने 16 की उम्र तक बेटियों को मेकअप करने या छोटे कपड़े पहनने नहीं दिये। उनकी वो उम्र ये सब करने की नहीं थी। लेट नाइट पार्टियों की भी मनाही थी। मैं जानती थी कि बाद में तो वे यह सब करेंगी ही। हर चीज की एक सही उम्र होती है। फराह खान मानती हैं कि बच्चों को जितना हो सके उतना बचपन का आनंद लेना चाहिए।

इस बयान के बाद फराह की पेरेंटिंग को लेकर सोशल मीडिया में बहस छिड़ गई। कुछ लोगों को लगता है कि बच्चों पर ऐसी पाबंदियां लगाना सही नहीं है, वहीं कई लोग फराह की इस बात से पूरी तरह सहमत हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

हमने इंटरनेट खंगाला तो ऐसे कई मामले मिले। पेरेंट्स की सख्ती पर एक्सपर्ट्स की राय भी मिली। पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स मानते हैं कि माता-पिता की यह सख्ती बच्चों को कंट्रोल करने के लिए नहीं, उनकी सुरक्षा की चिंता की वजह से होता है।

मनोचिकित्सक कहते हैं कि 16 साल की उम्र के आसपास बच्चे मानसिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह परिपक्व नहीं होते हैं। वे अभी अपनी पहचान बना रहे होते हैं और फैसले लेना सीख रहे होते हैं। ऐसे में माता-पिता को डर रहता है कि बाहरी दुनिया का दबाव, सोशल मीडिया और खूबसूरती के नकली पैमाने कहीं उनके बच्चों नुकसान न पहुंचा दे।

क्या बस नियम बनाना काफी है

एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों के लिए नियम बनाना गलत नहीं है, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि आप उन नियमों को बच्चों को समझाते कैसे हैं। अगर माता-पिता केवल हुक्म चलाएंगे, तो बच्चे उनसे बातें छुपाने लगेंगे, झूठ बोलेंगे या फिर बगावत पर उतर आएंगे।

इसकी जगह अगर पैरेंट्स अपने बच्चों के साथ बैठकर प्यार से बात करें और उन्हें समझाएं कि वे यह नियम क्यों बना रहे हैं, तो बच्चे बात को बेहतर तरीके से समझते हैं। इससे बच्चों में सही और गलत का फैसला लेने की समझ बढ़ती है।

पेरेंटिंग का कोई फिक्स फॉर्मूला नहीं होता जो हर फैमिली पर फिट बैठे। फराह खान का तरीका शायद हर किसी को पसंद न आए, लेकिन उन्होंने आज के दौर के माता-पिता के सामने एक बहुत जरूरी सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों को सख्ती और आजादी देने के बीच की बाउंड्री कहां होनी चाहिए?

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article