Jackie Shroff Parenting Advice: बच्चों की परवरिश को लेकर हर माता-पिता के अपने नियम होते हैं। कोई अनुशासन को जरूरी मानता है, तो कोई अच्छी शिक्षा को। वहीं अभिनेता जैकी श्रॉफ का मानना है कि बच्चों को सबसे ज्यादा जिस चीज की जरूरत है वह है- उन्हें सुनने वाले कान।
हाल ही में एक इंटरव्यू में जैकी श्रॉफ ने कहा कि घर का माहौल बच्चों पर गहरा असर डालता है। अगर घर में शांति और सामंजस्य होगा तो बच्चे भी सुरक्षित महसूस करेंगे। जैकी ने कहा - मैं अपने बच्चों को सुनता हूं और वे भी मेरी बात सुनते हैं। पैरेंटिंग का मतलब है उन्हें सुनना। उन्हें अपने कान दीजिए, वरना वे अपनी बातें किसी और से कहने लगेंगे।
बच्चे याद रखते हैं आपका व्यवहार
मनोवैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चे बड़े होकर शायद अपने माता-पिता की हर सीख, हर नियम और हर सलाह याद न रखें, लेकिन उन्हें यह जरूर याद रहता है कि उनका घर कैसा महसूस होता था। क्या घर में उन्हें अपनापन मिला? क्या उनकी बातों को गंभीरता से सुना गया? क्या वे सुरक्षित महसूस करते थे या हमेशा शिकायत और डांट के डर में रहते थे?
बहुत से माता-पिता यह मान लेते हैं कि उनका प्रभाव केवल अधिकार और नियमों से बनता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों पर सबसे गहरा असर इमोशनल कनेक्ट का होता है। बच्चे उन लोगों की बात ज्यादा सुनते हैं, जिनसे वे जुड़ाव महसूस करते हैं। जब यह जुड़ाव कमजोर पड़ने लगता है, तो कई माता-पिता ज्यादा नियम, ज्यादा निगरानी और ज्यादा समझाइश का सहारा लेने लगते हैं। इसका उल्टा असर होता है। बच्चा और दूर होता जाता है।
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जब घर में नहीं सुनी जाती बात
अगर बच्चों को लगता है कि घर में उनकी भावनाओं को समझा नहीं जा रहा है, तो वे अपनी बातें दोस्तों या दूसरे लोगों से शेयर करने लगते हैं। समस्या यह है कि हर सलाह सही हो, यह जरूरी नहीं। यही वजह है कि बच्चों को सुनना केवल एक पैरेंटिंग स्किल नहीं, रिश्ते को टूटने से बचाने का तरीका भी है।
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कभी-कभी सिर्फ सुनना क्यों है जरूरी
विशेषज्ञ कहते हैं कि ज्यादातर माता-पिता बच्चों की बात इसलिए सुनते हैं ताकि तुरंत जवाब दे सकें, गलती सुधार सकें या कोई समाधान बता सकें। जबकि कई बार बच्चे को समाधान नहीं, समझे जाने की जरूरत होती है।
यहीं से भरोसा बनता है। यही भरोसा वह पुल है, जो बचपन खत्म होने के बाद भी माता-पिता और बच्चों के रिश्ते को मजबूत बनाए रखता है। आखिरकार, एक समय ऐसा आता है जब बच्चे केवल इसलिए आपकी बात नहीं सुनते कि आप उनके माता-पिता हैं, इसलिए सुनते हैं क्योंकि उन्हें आप पर भरोसा होता है।
