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आज की शायरी: किरदार देखना है तो सूरत न देखिए, मिलता नहीं ज़मीं का पता आसमान से

Aaj ki Shayari (आज की शायरी): यह शेर हमें सिखाता है कि रिश्ते बनाते समय, दोस्त चुनते समय या किसी को परखते समय हमें उसकी शक्ल नहीं, उसका किरदार देखना चाहिए। सूरत समय के साथ बदल जाती है, लेकिन चरित्र वही रहता है जो इंसान को सच में महान या छोटा बनाता है। फ़हीम गोरखपुरी का यह शेर हमें सतही नजर से ऊपर उठकर गहराई से देखने की सीख देता है।

Aaj ki Shayari

आज की शायरी

Shayari of the Day (आज की शायरी): फहीम गोरखपुरी उर्दू शायरी के बेहद मुकम्मल शायर माने जाते हैं। उनका असली नाम अब्दुल फहीम था और वे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पैदा हुए। उनकी शायरी में प्रेम, समाज, दर्द और जीवन की सच्चाइयां बड़ी खूबसूरती से नजर आती हैं। वे ग़ज़ल, नज़्म और गीत लिखने में माहिर थे। उनकी मशहूर ग़ज़लें जैसे 'दिल की बातें दिल ही जाने' और 'वो जो हमसे मोहब्बत करते थे' आज भी लोगों के दिल जीत लेती हैं। फहीम साहब की शायरी सरल भाषा में गहरे अर्थ रखती है, जो आम आदमी तक आसानी से पहुंचती है। उनका एक ऐसा ही बेहद मशहूर शेर है:

"किरदार देखना है तो सूरत न देखिए

मिलता नहीं ज़मीं का पता आसमान से.."

इस शेर का सीधा और सरल अर्थ है कि अगर किसी इंसान को सच में समझना है, तो उसकी बाहरी शक्ल-सूरत या दिखावे को आधार न बनाएं। इंसान की असली पहचान उसके चेहरे, कपड़ों या कद-काठी से नहीं होती, बल्कि उसके चरित्र, व्यवहार और सोच से होती है। शायर कहना चाहते हैं कि सुंदर चेहरा अच्छे इंसान होने की गारंटी नहीं देता और साधारण या कम आकर्षक दिखने वाला व्यक्ति भी ऊँचे नैतिक मूल्यों का मालिक हो सकता है।

शेर की दूसरा मिसरा इस बात को और गहराई से समझाता है। ज़मीन का मतलब यहां हकीकत, सच्चाई और असलियत से है, जबकि आसमान दिखावे, ऊंचे दावे और चमक-दमक के लिए इस्तेमाल हुआ है। जैसे आसमान देखकर यह नहीं बताया जा सकता कि जमीन कैसी है, वैसे ही किसी की बाहरी चमक देखकर उसके भीतर की सच्चाई को नहीं जाना जा सकता।

आज के समय में यह शेर और भी प्रासंगिक हो जाता है। सोशल मीडिया और आधुनिक जीवनशैली ने लोगों को बाहरी छवि पर ज्यादा ध्यान देना सिखा दिया है। अच्छे कपड़े, महंगे ब्रांड और आकर्षक तस्वीरें इंसान को बड़ा या बेहतर साबित नहीं करतीं। असल कद तब सामने आता है जब कोई व्यक्ति मुश्किल समय में कैसा व्यवहार करता है, दूसरों के प्रति कितना ईमानदार है और उसके फैसलों में कितनी इंसानियत है।

फहीम बदायूं के चंद मशहूर शेर:

1. क़त्ल हो कर भी रहा क़ातिल से क़ाएम वास्ता

रूह मेरी बन के जौहर ख़ंजर-ए-क़ातिल में है

2. कह के ये फेर लिया मुँह मिरे अफ़्साने से

फ़ाएदा रोज़ कहीं बात के दोहराने से

3. सब की दुनिया तबाह करते हो

तुम भी क्या हो गए हो अमरीका

4. कल जो गले मिलते थे मुझ से कल जो मुझे पहचानते थे

आज मुसाफ़िर जान के कैसे रस्ते वो अंजान हुए

5. जब न ये दुनिया थी क़ाएम तू हमारे दिल में था

जब से ये दुनिया है क़ाएम तू हमारे दिल में है

6. क्यों कहूँ मैं कि सितम का मैं सज़ा-वार न था

दिल दिया था तुझे किस तरह गुनहगार न था

7. इक़रार ही के साथ ये इंकार अभी से

दिल तोड़ते हो क्यों मिरा पैमाँ-शिकनी से

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Suneet Singh
Suneet Singh author

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ... और देखें

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