History of Easter Eggs: ईस्टर ईसाई धर्म का प्रमुख त्योहार है। इस खास दिन को लोग प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान (Resurrection) की खुशी में सेलिब्रेट करते हैं। ईस्टर को नई शुरुआत, आशा और जीवन के पुनर्जन्म का प्रतीक भी माना जाता है। ईस्टर पर अंडों को सजाने और गिफ्ट करने की परंपरा भी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंडों का ईस्टर से क्या कनेक्शन है। आइए जानते हैं कि ईस्टर के लिए अंडे क्यों हैं इतने खास:
अंडा क्यों बना ईस्टर का प्रतीक? (How Eggs are associated With Easter)
अंडा पुराने समय से ही नए जीवन और पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता रहा है। जब एक अंडा टूटता है, तो उसमें से नया जीवन निकलता है। यही विचार ईस्टर के संदेश से मेल खाता है, जिसमें यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने की बात कही जाती है।
ईसाई मान्यता के अनुसार, अंडा यीशु की खाली कब्र का प्रतीक भी है। जैसे अंडे का खोल टूटता है, वैसे ही यीशु मृत्यु को हराकर फिर से जीवित हुए।
लाल रंग के अंडों की परंपरा
शुरुआती ईसाई समुदाय में अंडों को लाल रंग से रंगने की परंपरा थी। यह रंग यीशु मसीह के बलिदान और उनके रक्त का प्रतीक माना जाता था। समय के साथ यह परंपरा अलग-अलग रंगों और डिजाइनों में बदल गई, जो आज ईस्टर सेलिब्रेशन का अहम हिस्सा बन चुकी है।
लेंट (उपवास) से जुड़ी मान्यता
ईस्टर से पहले 40 दिनों का एक उपवास काल होता है, जिसे लेंट कहा जाता है। इस दौरान पहले के समय में अंडे खाना मना होता था। इसलिए लोग अंडों को बचाकर रखते थे और ईस्टर के दिन इन्हें खास तौर पर खाया और बांटा जाता था। यही परंपरा आगे चलकर ईस्टर एग्स के रूप में लोकप्रिय हो गई।
आज ईस्टर एग्स मान्यता और परंपरा से एक कदम आगे बढ़ते हुए उत्सव का मजेदार हिस्सा बन चुके हैं। अब असली अंडों के साथ-साथ चॉकलेट एग्स, रंग-बिरंगे प्लास्टिक एग्स और बच्चों के लिए एग हंट जैसे खेल भी खूब पॉपुलर हो चले हैं।
साल 2026 में ईस्टर कब है
हर साल गुड फ्राइडे के दो दिन बाद ईस्टर सेलिब्रेट किया जाता है। इस साल 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे होने के कारण 5 अप्रैल 2026 को ईस्टर का खास त्योहार मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि गुड फ्राइडे के दिन प्रभु यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। अपनी मृत्यु के दो दिन बाद वह वापस लौट आए थे। उनके पुनरुत्थान के मौके को ईसाई धर्म के लोग ईस्टर के तौर पर मनाते हैं।
समय के साथ ईस्टर एग्स का रूप भले बदल गया हो, लेकिन इसका मूल संदेश आज भी वही है कि अंधकार के बाद उजाला जरूर आता है।
