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क्या पत्नी की ज्यादा कमाई रिश्ते में बढ़ा देती है तनाव? स्टडी में सामने आई चौंकाने वाली बात

रिश्तों में आर्थिक योगदान को सम्मान से जोड़ा जाए, अहंकार से नहीं। आखिर शादी साझेदारी ही तो है। वहां यह मायने नहीं रखता कि कौन ज्यादा कमाता है।

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क्या पत्नी की ज्यादा कमाई तोड़ सकती है शादी का रिश्ता (Photo: iStock)

क्या किसी रिश्ते में पैसे की भूमिका सिर्फ खर्च चलाने तक सीमित होती है? या फिर कमाई का अंतर पति-पत्नी के रिश्ते को भी प्रभावित करता है? यह सवाल लंबे समय से समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों के बीच चर्चा का विषय रहा है। हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन ने इस बहस को फिर से हवा दे दी है। अध्ययन के मुताबिक, जब पत्नी की आय पति से अधिक होती है, तो कई परिवारों में तनाव बढ़ सकता है।

समस्या कमाई नहीं, उससे जुड़ी धारणाएं हैं

भारतीय समाज सहित दुनिया के कई हिस्सों में लंबे समय तक यह धारणा रही है कि परिवार का मुख्य कमाने वाला पुरुष होगा। ऐसे में जब पत्नी आर्थिक रूप से आगे निकल जाती है, तो कई पुरुष अनजाने में अपनी पारंपरिक भूमिका को चुनौती मिलती हुई महसूस करते हैं। अध्ययन बताता है कि इसका असर रिश्ते में कम्युनिकेशन, निर्णय लेने के तरीके और भावनात्मक जुड़ाव पर भी दिखाई दे सकता है।

पुरुषों पर भी होता है सामाजिक दबाव

आमतौर पर माना जाता है कि लैंगिक रूढ़ियों का नुकसान केवल महिलाओं को होता है। हालांकि यह पूरी तस्वीर नहीं है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि घर का पालन-पोषण करने वाले की पारंपरिक छवि पुरुषों पर भी दबाव बनाती है। अगर वे इस भूमिका में खुद को कमजोर महसूस करते हैं, तो कई बार तनाव, चिड़चिड़ापन या हीन भावना पैदा हो सकती है।

रिश्ते में बराबरी का मतलब सिर्फ कमाई नहीं

विशेषज्ञ मानते हैं कि सफल रिश्ते की नींव इस बात पर नहीं टिकी होती कि कौन कितना कमाता है। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि दोनों एक-दूसरे की उपलब्धियों को कैसे देखते हैं। अगर पति पत्नी की सफलता को साझा उपलब्धि मानता है और पत्नी भी आर्थिक योगदान को शक्ति प्रदर्शन के बजाय साझेदारी का हिस्सा मानती है, तो कमाई का अंतर रिश्ते में तनाव की वजह नहीं बनता।

बदल रही है नई पीढ़ी की सोच

शहरी भारत में अब ऐसे दंपतियों की संख्या बढ़ रही है, जहां पत्नी की आय पति से अधिक है। कई परिवारों में इसे सामान्य रूप से स्वीकार भी किया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक बदलाव आर्थिक बदलाव से धीमा होता है। इसलिए कई बार आधुनिक जीवनशैली अपनाने वाले परिवार भी पुराने लैंगिक मानदंडों से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाते।

खुलकर बात करना है सबसे जरूरी

रिश्तों पर शोध करने वाले मनोवैज्ञानिक जॉन गॉटमैन का मानना है कि किसी भी रिश्ते में कठिन विषयों पर खुलकर बातचीत करना सबसे जरूरी होता है। पैसा, करियर और जिम्मेदारियों जैसे मुद्दों पर चुप्पी कई बार गलतफहमियों को बढ़ा देती है।

अगर दोनों साथी अपनी अपेक्षाओं, असुरक्षाओं और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात करें, तो आर्थिक असमानता तनाव का कारण बनने के बजाय रिश्ते की मजबूती का आधार भी बन सकती है।

सवाल कमाई का नहीं, मानसिकता का है

पत्नी की ज्यादा कमाई अपने आप में किसी रिश्ते को कमजोर नहीं करती। तनाव तब पैदा होता है, जब समाज सफलता को बराबरी के बजाय प्रतिस्पर्धा की नजर से देखने लगता है।

आज जरूरत इस बात की है कि रिश्तों में आर्थिक योगदान को सम्मान से जोड़ा जाए, अहंकार से नहीं। आखिर शादी साझेदारी ही तो है। वहां यह मायने नहीं रखता कि कौन ज्यादा कमाता है। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि दोनों एक-दूसरे की सफलता पर कितना गर्व करते हैं और मुश्किल समय में कितनी मजबूती से साथ खड़े रहते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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