Desh Bhakti Par Shayari : देशभक्ति की ऐसी शायरी जिसे पढ़कर भुजाएं फड़क उठेंगी, शहीदों के लहू को दें सच्ची सलामी
- Authored by: Suneet Singh
- Updated Jan 26, 2026, 09:43 AM IST
Desh Bhakti Shayari in Hindi (वतन पर शायरी), 26 January Hindi Shayari: सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा, हम बुलबुले हैं इसके ये गुलिस्तां हमारा- देशभक्ति से लबरेज ऐसे ही लाजवाब शेर कई शायरों की कलम से निकले हैं। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के उत्सव में चार चांद लगाने के लिए बेस्ट हैं ये देशभक्ति शायरी। इनको पढ़कर ही भुजाएं फड़क उठेंगी।
देशभक्ति शायरी हिंदी में
26 January Shayari in Hindi (देशभक्ति शायरी): देश के गौरव का प्रतीक बन चुका गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व आ चुका है। हर साल की तरह इस बार भी भारत की आन, बान और शान का यह पर्व पूरे जोश और जुनून के साथ मनाया जा रहा हैं। साल 1950 में 26 जनवरी वह खास तारीख बन गई जब भारत के सिर गणतंत्र का ताज सजा। इसी दिन भारत का अपना संविधान लागू हुआ। यहां तक पहुंचने के लिए धरती मां के ना जाने कितने ही सपूतों ने अपने प्राण न्योछावर किये। अंग्रेजों से लड़ते हुए इन देशभक्तों ने ऐसा जज्बा दिखाया जो आज भी लाखों युवाओं को प्रेरित करता है। तो गणतंत्र दिवस के माहौल में आइए पढ़ते हैं देशप्रेम से लबरेज चंद मशहूर शेर। यहां देखें देशभक्ति की शायरी हिंदी में:
Patriotic Shayari for Republic Day | Desh Bhakti Shayari in Hindi 2 line
1. वतन की सर-ज़मीं से इश्क़-ओ-उल्फ़त हम भी रखते हैं
खटकती जो रहे दिल में वो हसरत हम भी रखते हैं
- जोश मलसियानी
2. न पूछो हम-सफ़रो मुझ से माजरा-ए-वतन
वतन है मुझ पे फ़िदा और मैं फ़िदा-ए-वतन
मर्दान अली खां राना
3. वतन की रेत ज़रा एड़ियां रगड़ने दे
मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
- मुज़फ़्फ़र वारसी
4. लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी
- फ़िराक़ गोरखपुरी
5. सुरूर-ए-जां-फ़ज़ा देती है आग़ोश-ए-वतन सब को
कि जैसे भी हों बच्चे माँ को प्यारे एक जैसे हैं
- सरफ़राज़ शाहिद
6. मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
- अल्लामा इक़बाल
7. दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
- लाल चन्द फ़लक
8. सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
- बिस्मिल अज़ीमाबादी
9. सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा
- अल्लामा इक़बाल
10. वतन के जां-निसार हैं वतन के काम आएँगे
हम इस ज़मीं को एक रोज़ आसमाँ बनाएँगे
- जाफ़र मलीहाबादी
11. वतन की ख़ाक से मर कर भी हम को उन्स बाक़ी है
मज़ा दामान-ए-मादर का है इस मिट्टी के दामन में
- चकबस्त बृज नारायण
12. वतन की पासबानी जान-ओ-ईमां से भी अफ़ज़ल है
मैं अपने मुल्क की ख़ातिर कफ़न भी साथ रखता हूँ
- अज्ञात
13. है मोहब्बत इस वतन से अपनी मिट्टी से हमें
इस लिए अपना करेंगे जान-ओ-तन क़ुर्बान हम
- अज्ञात
14. इसी जगह इसी दिन तो हुआ था ये एलान
अँधेरे हार गए ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान
- जावेद अख़्तर
15. वतन की रेत ज़रा एड़ियां रगड़ने दे
मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
- मुज़फ़्फ़र वारसी
16. भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ
दुनिया के दिल पे अपना सिक्का बिठाए जाओ
- लाल चन्द फ़लक
17. है मोहब्बत इस वतन से अपनी मिट्टी से हमें
इस लिए अपना करेंगे जान-ओ-तन क़ुर्बान हम
- अज्ञात
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