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क्या माइक्रोवेव-सेफ कंटेनर और बोतलबंद पानी बढ़ा रहे हैं लिवर में फैट, जानिए क्या है सच्चाई

माइक्रोवेव-सेफ प्लास्टिक और बोतलबंद पानी आज की लाइफ का हिस्सा हैं, लेकिन क्या ये लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं? हाल ही में नई रिसर्च में माइक्रोप्लास्टिक्स और फैटी लिवर के बीच कनेक्शन की बात सामने आई है।

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क्या माइक्रोवेव-सेफ कंटेनर और बोतलबंद पानी फैटी लिवर की वजह बन सकते हैं

Fatty Liver Causes In Hindi: आज के समय में प्लास्टिक हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। खाना गर्म करना हो तो माइक्रोवेव-सेफ कंटेनर, और बाहर निकलते ही बोतलबंद पानी - ये सब हमें आसान और सुरक्षित लगते हैं। लेकिन हाल ही में आई कुछ रिपोर्ट्स ने इस “सुरक्षा” पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि प्लास्टिक से निकलने वाले बेहद छोटे कण, जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक्स कहा जाता है, हमारे शरीर में जाकर असर डाल सकते हैं। खासकर लिवर पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है, इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। क्या सच में ये आदतें फैटी लिवर का खतरा बढ़ा सकती हैं? आइए इसे आसान और साफ शब्दों में समझते हैं।

माइक्रोप्लास्टिक्स दिखते नहीं

माइक्रोप्लास्टिक्स प्लास्टिक के बहुत ही छोटे-छोटे कण होते हैं, जो आंखों से नजर नहीं आते। ये हमारे खाने, पीने के पानी और यहां तक कि हवा के जरिए भी शरीर में जा सकते हैं। समस्या यह है कि शरीर इन्हें आसानी से बाहर नहीं निकाल पाता, जिससे ये अंदर जमा हो सकते हैं।

माइक्रोवेव-सेफ कंटेनर पर उठे सवाल

हम अक्सर सोचते हैं कि माइक्रोवेव-सेफ लिखा है तो सब ठीक ही होगा। लेकिन कुछ रिसर्च बताती हैं कि जब प्लास्टिक को गर्म किया जाता है, तो उससे माइक्रोप्लास्टिक्स और केमिकल्स निकल सकते हैं। ये सीधे खाने में मिल जाते हैं और फिर शरीर में पहुंच जाते हैं। यानी सुरक्षित समझकर इस्तेमाल की जाने वाली चीज भी पूरी तरह बेफिक्र नहीं है।

बोतलबंद पानी भी पूरी तरह क्लीन नहीं?

बोतलबंद पानी को हम साफ और हेल्दी ऑप्शन मानते हैं, लेकिन इसमें भी माइक्रोप्लास्टिक्स पाए जाने की बात सामने आई है। प्लास्टिक की बोतल से ये कण पानी में मिल सकते हैं। अगर रोजाना इसका सेवन हो, तो धीरे-धीरे ये शरीर में इकट्ठा हो सकते हैं।

फैटी लिवर से क्या है इसका कनेक्शन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, माइक्रोप्लास्टिक्स शरीर में जाकर लिवर की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। इससे लिवर में फैट जमा होने का खतरा बढ़ सकता है, जिसे फैटी लिवर कहा जाता है। हालांकि यह कनेक्शन अभी पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती संकेत नजरअंदाज करने लायक नहीं हैं।

घबराएं नहीं बस थोड़ा सतर्क रहें

डॉक्टर्स का मानना है कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी रखना जरूरी है। जैसे माइक्रोवेव में प्लास्टिक की जगह कांच या सिरेमिक के बर्तन इस्तेमाल करना, और जहां संभव हो वहां बोतलबंद पानी से बचना बेहतर विकल्प हो सकता है।

छोटी आदतें बदलें

अगर आप रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करते हैं, तो जोखिम काफी कम हो सकता है। जैसे गर्म खाना प्लास्टिक में न रखना, बार-बार एक ही बोतल का इस्तेमाल न करना और ताजा खाना खाने की आदत डालना।

प्लास्टिक पूरी तरह से जिंदगी से हटाना मुश्किल है, लेकिन उसका समझदारी से इस्तेमाल जरूर किया जा सकता है। थोड़ी सी जागरूकता आपको आने वाले समय में बड़ी परेशानी से बचा सकती है।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीत author

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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