लाइफस्टाइल

Chanakya Niti: जहर के समान हैं ये 3 गलतियां, सफल होना चाहते हैं तो तुरंत बना लें दूरी

What is the best advice of Chanakya Niti (चाणक्य के नियम): चाणक्य नीति में कुछ ऐसी आदतों का वर्णन है जो किसी भी व्यक्ति के जीवन के लिए 'जहर' के समान होती हैं।

Image

जीवन में जहर के समान हैं इंसान की ये 3 आदतें

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य भारतीय इतिहास के एक ऐसे महान कूटनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और मार्गदर्शक रहे हैं, जिनकी नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं। चाणक्य नीति में मनुष्य के कल्याण के लिए कई जरूरी बातें बताई गई हैं। चाणक्य के अनुसार, मनुष्य का स्वभाव और उसकी आदतें ही उसके भाग्य का निर्माण करती हैं।

चाणक्य के अनुसार जीवन कैसे जीना चाहिए?

चाणक्य नीति में कुछ ऐसी आदतों का वर्णन है जो किसी भी व्यक्ति के जीवन के लिए 'जहर' के समान होती हैं। यदि इन आदतों को समय रहते न बदला जाए, तो ये हंसते-खेलते जीवन को बर्बादी की कगार पर खड़ा कर देती हैं। आइए जानते हैं उन तीन आदतों के बारे में:

1. आलस्य

चाणक्य के अनुसार, आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा गुप्त शत्रु है। वह कहते हैं कि "आलसी व्यक्ति का न वर्तमान होता है और न ही भविष्य।" आलस्य एक ऐसे जहर की तरह है जो धीरे-धीरे व्यक्ति की प्रतिभा और अवसरों को खत्म कर देता है। एक आलसी व्यक्ति हमेशा कल पर काम टालता है और अंततः असफलता उसके हाथ लगती है। सफलता केवल उन्हीं को मिलती है जो समय का महत्व समझते हैं और निरंतर पुरुषार्थ करते हैं।

2. क्रोध

क्रोध को चाणक्य ने आत्मघाती जहर माना है। जब व्यक्ति को क्रोध आता है, तो उसकी सोचने-समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है। क्रोध में लिया गया एक गलत निर्णय वर्षों की मेहनत और बने-बनाए रिश्तों को पल भर में राख कर सकता है। चाणक्य नीति कहती है कि जो व्यक्ति अपने विवेक को खोकर क्रोध के वश में हो जाता है, वह अपने शत्रुओं से पहले खुद का नुकसान कर बैठता है। शांति और धैर्य ही वह औषधियां हैं जो इस जहर के प्रभाव को खत्म कर सकती हैं।

3. लोभ या लालच

लालच एक ऐसी खाई है जो कभी नहीं भरती। चाणक्य के अनुसार, लालची व्यक्ति कभी संतुष्ट नहीं हो सकता और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए वह सही-गलत का भेद भूल जाता है। लालच के कारण व्यक्ति अधर्म के मार्ग पर चलने लगता है, जिससे उसका मान-सम्मान और संचित धन दोनों ही नष्ट हो जाते हैं। लोभ व्यक्ति की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है और उसे मानसिक अशांति के अंतहीन चक्र में फंसा देता है।

आचार्य चाणक्य की ये बातें हमें खुद को आंकने का मौका देती हैं। यदि हम अपने जीवन से आलस्य, क्रोध और लालच रूपी इन तीन विषैली आदतों को निकाल दें, तो सफलता और सुख हमारे कदम चूमेंगे। वैसे भी जीवन को सार्थक बनाने के लिए केवल धन कमाना पर्याप्त नहीं है, अपने चरित्र और आदतों को सुधारना भी अनिवार्य है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article