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आसमान से बरस रही आग, बांदा वाले इस देसी डिश से निकालते हैं Heat Wave की हवा

Labdo for Heat wave: बांदा समेत लगभग पूरे बुंदेलखंड में ही हीटवेव से निपटने के लिए एक पारंपरिक डिश आज भी वहां के लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। इस डिश का नाम है लबदो।

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यूपी रा सबसे गर्म जिला बना बांदा, ये डिश खाकर लू से लोहा ले रहे बांदा लोग

Labdo for Heat wave: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में आसमान से आग बरस रही है। 47 डिग्री की जला देने वाली गर्मी और लू जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। गर्मी का सितम ऐसा है कि बांदा में चौराहों पर लगे ट्रैफिक सिग्नल्स को बंद करना पड़ा ताकि लोगों को धूप में रुकना ना पड़े। हर साल ही गर्मी में बांदा में कमोबेश ऐसे ही हालात हो जाते हैं। ऐसे में क्या आपने सोचा है कि इस गर्मी में खुद को ठंडा रखने के लिए बांदा वाले सालों से क्या खाते आ रहे हैं?

बांदा समेत लगभग पूरे बुंदेलखंड में ही हीटवेव से निपटने के लिए एक पारंपरिक डिश आज भी वहां के लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। इस डिश का नाम है लबदो। देसी सूखे बेर से तैयार होने वाली यह पारंपरिक डिश स्वाद के साथ-साथ शरीर और दिमाग को ठंडक पहुंचाने के लिए जानी जाती है। बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में इसे गर्मियों का प्राकृतिक कूलेंट माना जाता है।

पुराने समय में जब फ्रिज और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी सुविधाएं नहीं थीं, तब लोग शरीर को गर्मी से बचाने के लिए देसी खानपान पर ही निर्भर रहते थे। उसी परंपरा का हिस्सा है यह खास व्यंजन लबदो।

क्या है लबदो?

लबदो सूखे देसी बेर से बनने वाली एक पारंपरिक डिश है। इसे बनाने के लिए पहले सूखे बेर को पानी में भिगोया जाता है ताकि वह नरम हो जाए। इसके बाद उसमें स्वादानुसार गुड़, काला नमक, भुना जीरा और कुछ देसी मसाले मिलाए जाते हैं। कई जगहों पर इसमें इमली या पुदीना भी डाला जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी ताजगी भरा हो जाता है। यह डिश हल्की खट्टी-मीठी होती है और गर्मी में शरीर को तुरंत राहत देने वाली मानी जाती है।

शरीर और दिमाग को कैसे पहुंचाती है ठंडक?

आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों में ऐसे खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जो शरीर को हाइड्रेट रखें और अंदरूनी गर्मी को कम करें। बेर और गुड़ दोनों ही शरीर को ऊर्जा देने के साथ ठंडक पहुंचाने वाले माने जाते हैं। गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों को फायदेमंद माना जाता है।

ग्रामीण लोगों का मानना है कि लबदो खाने से लू लगने का खतरा कम होता है और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती। यही वजह है कि खेतों में काम करने वाले लोग आज भी इसे गर्मियों में खास तौर पर खाते हैं। गर्मी के मौसम में घर पर आने वाले मेहमानों का स्वागत भी बुंदेलखंड के गांवों में इसी लबदो से किया जाता है। यही कारण है कि लबदो जैसी पुरानी डिश आज भी वहां की संस्कृति में जिंदा है और हीट वेव की हवा निकाल रही है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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