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National Unity Day 2025: अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिस में इंसान को इंसान बनाया जाए.., पढ़ें भाईचारे और एकता पर 20+ मशहूर शेर

Bhaichara Shayari 2 line (भाईचारा शायरी, एकता शायरी): एकता में जितनी ताकत होती है उतनी किसी तोप या मिसाइल में नहीं होती। अगर बतौर राष्ट्र हम एक हैं तो कितना भी तकतवर दुश्मन हमारा बाल भी बांका नहीं कर सकता। आज सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती (Sardar Patel Jayanti 2025) और राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day)के अवसर पर पढ़े भाईचारा और एकता पर मशहूर शेर:

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National Unity Day 2025: पढ़ें भाईचारा और एकता शायरी

Shayari on Unity in Hindi (एकता पर शायरी): आज राष्ट्रीय एकता दिवस है। यह खास दिन सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के अवसर पर हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। सरदार पटेल देश की अखंडता और एकता के प्रतीक माने जाते हैं। किसी भी राष्ट्र की ताकत इसी पर निर्भर करती है कि वहां के लोगों के बीच कितना भाईचारा है। हर कोई यह मानता है कि एकता से बड़ी ताकत नहीं होती। इस विचार से शायर समाज भी अछूता नहीं रहा। देश दुनिया के तमाम मशहूर शायरों ने एकता और भाईचारे पर एक से बढ़कर एक लाजवाब शेर लिखे हैं। यहां पढ़ें भाईचारे पर चंद मशहूर शेर:

भाईचारे पर शायरी

1. ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर'

सारे जहां का दर्द हमारे जिगर में है

- अमीर मीनाई

2. हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं

मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं

- राहत इंदौरी

3. एक हो जाएं तो बन सकते हैं ख़ुर्शीद-ए-मुबीं

वर्ना इन बिखरे हुए तारों से क्या काम बने

- अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

4. सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें

आज इंसाँ को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत

- बशीर बद्र

5. जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है

जंग क्या मसअलों का हल देगी

- साहिर लुधियानवी

6. दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो

निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो

- जाफ़र मलीहाबादी

7. 'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली

न उर्दू न हिन्दी न हिन्दोस्तानी

- हफ़ीज़ जालंधरी

8. सगी बहनों का जो रिश्ता है उर्दू और हिन्दी में

कहीं दुनिया की दो ज़िंदा ज़बानों में नहीं मिलता

- मुनव्वर राना

9. यही है इबादत यही दीन ओ ईमां

कि काम आए दुनिया में इंसां के इंसां

- अल्ताफ़ हुसैन हाली

10. ये दुनिया नफ़रतों के आख़री स्टेज पे है

इलाज इस का मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं है

- चरण सिंह बशर

11. अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए

जिस में इंसान को इंसान बनाया जाए

- गोपालदास नीरज

12. अजीब दर्द का रिश्ता है सारी दुनिया में

कहीं हो जलता मकां अपना घर लगे है मुझे

- मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद

13. मुझ में थोड़ी सी जगह भी नहीं नफ़रत के लिए

मैं तो हर वक़्त मोहब्बत से भरा रहता हूं

- मिर्ज़ा अतहर ज़िया

14. इक शजर ऐसा मोहब्बत का लगाया जाए

जिस का हम-साए के आंगन में भी साया जाए

- ज़फर ज़ैदी

16. नफ़रत के ख़ज़ाने में तो कुछ भी नहीं बाक़ी

थोड़ा सा गुज़ारे के लिए प्यार बचाएँ

- इरफ़ान सिद्दीक़ी

17. हमारा ख़ून का रिश्ता है सरहदों का नहीं

हमारे ख़ून में गँगा भी चनाब भी है

- कंवल ज़ियाई

18. हमारे ग़म तुम्हारे ग़म बराबर हैं

सो इस निस्बत से तुम और हम बराबर हैं

- अज्ञात

19. अहल-ए-हुनर के दिल में धड़कते हैं सब के दिल

सारे जहां का दर्द हमारे जिगर में है

- फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली

20. किसी का कोई मर जाए हमारे घर में मातम है

ग़रज़ बारह महीने तीस दिन हम को मोहर्रम है

- रिन्द लखनवी

21. रंजिशें ऐसी हज़ार आपस में होती हैं दिला

वो अगर तुझ से ख़फ़ा है तू ही जा मिल क्या हुआ

- जुरअत क़लंदर बख़्श

एकता या भाईचारे पर शायरी से आप किसी को भी इसके महत्व से दो चार करा सकते हैं। अगर आपको एकता पर शायरी पसंद आई हो तो इन्हें आप अपने सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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