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पुरानी दिल्ली की इस 146 साल पुरानी दुकान में खीर खाती थीं मधुबाला, जानें क्या है बड़े मियां की खीर की खासियत

पुरानी दिल्ली की गलियों में छिपी एक ऐसी खीर की दुकान, जिसका नाम सुनते ही गाढ़ी और ठंडी खीर याद आती है। 1880 से चली आ रही बड़े मियां की खीर आखिर बाकी खीर से इतनी अलग क्यों है?

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पुरानी दिल्ली की इस 146 साल पुरानी दुकान में खीर खाती थीं मधुबाला, जानें क्या है बड़े मियां की खीर की खासियत (Photo Credit - Travel Bites)

पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमते हुए आपको हर कुछ कदम पर कोई न कोई ऐसी दुकान मिल जाएगी, जिसकी अपनी एक कहानी है। लेकिन बाजार सिरकीवालान की बड़े मियां की खीर का मामला थोड़ा अलग है। यहां मेन्यू की लंबी लिस्ट नहीं, बल्कि एक ही चीज लोगों को खींचकर लाती है, गाढ़ी, ठंडी और मलाईदार खीर। यह दुकान 1880 से चलने का दावा करती है और आज भी इसे पुरानी दिल्ली की मशहूर मिठाई की दुकानों में गिना जाता है।

    दिलचस्प बात यह है कि यहां मिलने वाली खीर वैसी नहीं लगती जैसी आमतौर पर घर में बनाई जाती है। इसका टेक्सचर इतना गाढ़ा होता है कि पहली नजर में यह खीर से ज्यादा रबड़ी या मीठे फज जैसी लग सकती है। यही इसका सबसे बड़ा आकर्षण है।

    यहां की खीर में ऐसा क्या है?

    बड़े मियां की खीर की पहचान उसका गाढ़ापन और धीमी आंच पर पकने वाला स्वाद है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इसे घंटों तक पकाया जाता है, जिससे दूध काफी कम होकर गाढ़ा होता जाता है। पुरानी रिपोर्टों में इसे पारंपरिक चूल्हे पर कई घंटे पकाने का भी जिक्र मिलता है। यहां खीर करीब 400 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से मिलती है।

    यानी यहां खीर का फंडा बिल्कुल सीधा है.. जल्दी नहीं, आराम से पकाओ और स्वाद को अपना काम करने दो। चावल, दूध और चीनी से तैयार होने वाली इस खीर में हल्की इलायची की खुशबू भी महसूस होती है। ऊपर की मलाई और इसका ठंडा सर्व किया जाना इसे आम गर्मागर्म खीर से बिल्कुल अलग अनुभव देता है।

    खीर का स्वाद और किस्से

    इतने लंबे समय तक किसी एक मिठाई को एक ही पहचान के साथ चलाना आसान नहीं है। लेकिन बड़े मियां की खीर ने शायद इसी सादगी को अपनी ताकत बनाया है। पुरानी दिल्ली में ऐसी कई जगहें हैं जहां दुकान से ज्यादा उसकी कहानी लोगों को आकर्षित करती है। यहां भी खीर खाने का अनुभव सिर्फ मिठाई तक सीमित नहीं रहता। तंग गलियां, पुरानी इमारतें और आसपास की हलचल मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं, जिसे किसी आधुनिक मिठाई की दुकान में दोहराना मुश्किल है।

    मधुबाला से जुड़ी कहानी भी है खास

    इस दुकान से जुड़ी एक पुरानी कहानी मशहूर अभिनेत्री मधुबाला को लेकर भी सुनाई जाती है। दुकान के मालिक ने एक रिपोर्ट में बताया था कि मधुबाला ने अपने बचपन का कुछ समय इसी इलाके में बिताया था और उनके पिता यहां रहते थे।

    कहां मिलेगी ये पुरानी दिल्ली वाली खीर?

    बड़े मियां की खीर की दुकान बाजार सिरकीवालान, हौज काजी/चावड़ी बाजार इलाके में बताई जाती है। यह जामा मस्जिद और चावड़ी बाजार की पुरानी दिल्ली वाली फूड गलियों के आसपास का इलाका है। उपलब्ध लिस्टिंग में दुकान का नाम बड़े मियां की खीर, ओल्ड खीर शॉप, 1880 है और इसका पता 2867, बाजार सिरकीवालान बताया गया है।

    अगर आप पुरानी दिल्ली घूमने जाएं और बिरयानी, कबाब और चाट के बीच कुछ मीठा ट्राय करना चाहते हैं, तो यह जगह अलग तरह का अनुभव दे सकती है।क्योंकि बड़े मियां की खीर की खासियत सिर्फ उसका स्वाद नहीं, बल्कि यह एहसास है कि आप एक ऐसी मिठाई खा रहे हैं जिसने पुरानी दिल्ली की कई पीढ़ियों को एक ही स्वाद से जोड़े रखा है।

    Avni Bagrola
    अवनी बागरोलाauthor

    अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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