Ayurvedic First Aid Kit: आजकल हल्की-फुल्की परेशानी होते ही लोग दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर पहुंच जाते हैं। लेकिन हर समस्या में दवा जरूरी हो, ऐसा नहीं है। आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां बताई गई हैं, जिनका इस्तेमाल लंबे समय से शरीर की सामान्य परेशानियों में सहायक के रूप में किया जाता रहा है। आयुर्वेदिक डॉक्टर और हेल्थ इंफ्लुएंसर डॉ. दीक्षा भावसार सवालिया के मुताबिक, अगर सही सलाह के साथ इनका इस्तेमाल किया जाए, तो ये रोजमर्रा की कई दिक्कतों में मदद कर सकती हैं। हालांकि, इन्हें डॉक्टर की दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए। आइए जानते हैं इस आयुर्वेदिक First Aid Kit में क्या क्या शामिल है...
1. कब्ज में त्रिफला
अगर पेट रोज साफ नहीं होता, तो त्रिफला मददगार माना जाता है। यह पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है।
2. अपच में ताजा अदरक
खाना खाने के बाद गैस, भारीपन या पेट फूलने की शिकायत हो, तो ताजा अदरक उपयोगी माना जाता है। इसे सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।
3. पीरियड्स के दर्द में सौंफ
सौंफ की चाय या गुनगुना सौंफ वाला पानी पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन और पेट फूलने की परेशानी कम करने में मदद कर सकता है।
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4. तनाव में अश्वगंधा
अश्वगंधा को तनाव कम करने, थकान घटाने और अच्छी नींद में मददगार माना जाता है। लेकिन इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करें।
5. बाल झड़ने में भृंगराज
भृंगराज का तेल सिर की त्वचा को पोषण देने और बालों को मजबूत बनाने में सहायक माना जाता है।
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6. फैटी लिवर में भूम्यामलकी
आयुर्वेद के अनुसार भूम्यामलकी (भूमि आंवला) लिवर के सामान्य कामकाज को सहारा देने वाली जड़ी-बूटी है। इसे बिना सलाह के नहीं लेना चाहिए।
7. शरीर में सूजन होने पर पुनर्नवा
अगर शरीर में पानी रुकने से सूजन महसूस होती है, तो पुनर्नवा लाभकारी मानी जाती है। यह शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती है।
8. दिल की सेहत के लिए अर्जुन
अर्जुन की छाल का इस्तेमाल आयुर्वेद में लंबे समय से हृदय की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। यह दिल के सामान्य कामकाज को सपोर्ट कर सकती है।
9. कमजोर इम्यूनिटी में गिलोय
गिलोय शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाने वाली प्रमुख आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में गिनी जाती है और रिकवरी में भी मदद कर सकती है।
10. ब्रेन फॉग में ब्राह्मी
अगर ध्यान लगाने में परेशानी होती है या दिमाग थका-थका लगता है, तो ब्राह्मी याददाश्त और एकाग्रता को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती है।
गांठ बांध लें एक्सपर्ट की ये बात
डॉ. दीक्षा भावसार सवालयिया के अनुसार, आयुर्वेद हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। इसलिए कोई भी जड़ी-बूटी अपनी मर्जी से शुरू न करें। अगर आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं, किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे हैं या पहले से दवा ले रहे हैं, तो किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही इनका इस्तेमाल करें।
