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आवारगी पर 15 मशहूर शेर: ये दिल ये पागल दिल मिरा क्यूं बुझ गया आवारगी.., पढें आवारगी पर मशहूर शायरों के चुनिंदा शेर

Awargi Shayari in Hindi: आवारगी सिखाती है कि जिंदगी की खूबसूरती योजनाओं में नहीं, बल्कि अनघटित क्षणों में छिपी है। चाहे वह बारिश में भीगते हुए चाय की चुस्की हो या किसी अनजान शहर की गलियों में खो जाना, ये अनुभव मन को सुकून देते हैं।

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Awargi Shayari in Hindi (आवारगी शायरी)

Awargi par Shayari in Hindi (आवारगी पर शायरी): आवारगी न केवल गलियों और सड़कों पर भटकना है, बल्कि विचारों, सपनों और अनुभवों की स्वतंत्र यात्रा है। आवारगी में बिना मंजिल के सफर की रोमांचक अनुभूति होती है, जहां हर कदम नई कहानी बुनता है। यह वह पल है जब आप अनजान राहों पर चलते हुए खुद से मुलाकात करते हैं। आवारगी सिखाती है कि जिंदगी की खूबसूरती योजनाओं में नहीं, बल्कि अनघटित क्षणों में छिपी है। चाहे वह बारिश में भीगते हुए चाय की चुस्की हो या किसी अनजान शहर की गलियों में खो जाना, ये अनुभव मन को सुकून देते हैं। हर दिल को आजादी का एहसास कराने वाली इस आवारगी पर कई शायरों ने बेहतरीन शेर लिखे हैं। आइए पढ़ते हैं उनमें से कुछ चुनिंदा शेर:

1. ये दिल ये पागल दिल मिरा क्यूँ बुझ गया आवारगी

इस दश्त में इक शहर था वो क्या हुआ आवारगी

- मोहसिन नक़वी

2. रुस्वा-ए-दहर गो हुए आवारगी से तुम

बारे तबीअतों के तो चालाक हो गए

- मिर्ज़ा ग़ालिब

3. शाइस्ता महफ़िलों की फ़ज़ाओं में ज़हर था

ज़िंदा बचे हैं ज़ेहन की आवारगी से हम

- निदा फ़ाज़ली

4. जिन से आवारगी-ए-शब का भरम था वो लोग

इस भरे शहर में दो-चार हुआ करते थे

- सलीम कौसर

5. फिरते हैं मिस्ल-ए-मौज-ए-हुआ शहर शहर में

आवारगी की लहर है और हम हैं दोस्तो

- मुनीर नियाज़ी

6. बहुत मुश्किल है बंजारा-मिज़ाजी

सलीक़ा चाहिए आवारगी में

- निदा फ़ाज़ली

7. तुझे हवास की आवारगी का इल्म कहाँ

कभी मैं तुझ को तिरे सामने तलाश करूँ

- मोहसिन नक़वी

8. दश्त की वुसअ'तें बढ़ाती थीं

मेरी आवारगी बनाते हुए

- अम्मार इक़बाल

9. सैर कीजे हुस्न के बाज़ार की

हाँ मगर आवारगी अच्छी नहीं

- हफ़ीज़ जालंधरी

10. दिमाग़-ए-इत्र-ए-पैराहन नहीं है

ग़म-ए-आवारगी-हा-ए-सबा क्या

- मिर्ज़ा ग़ालिब

11. मुद्दत हुई है कू-ए-बुताँ की तरफ़ गए

आवारगी से दिल को कहाँ तक बचाएँ हम

- हबीब जालिब

12. शाम आते ही तुम्हें रहती है घर जाने की जल्दी

'फ़रहत-एहसास' इन दिनों आवारगी कम हो रही है

- फ़रहत एहसास

13. आवारगी का हक़ है हवाओं को शहर में

घर से चराग़ ले के निकलना मुहाल है

- मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद

14. ये क्यूं कहें कि हमें कोई रहनुमा न मिला

मगर सरिश्त की आवारगी को क्या कीजे

- नून मीम राशिद

15. मरने के बा'द भी वही आवारगी रही

अफ़्सोस जां गई नफ़स-ए-ना-रसा के साथ

- मोमिन ख़ां मोमिन

उम्मीद करते हैं कि आवारगी पर लिखे इन शायरियों से आप समझ गए होंगे कि आवारगी, जो अक्सर बेकार घूमने का पर्याय मानी जाती है, वास्तव में आत्मा की खोज का एक अनूठा रास्ता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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