Kagazi Lime: नींबू खरीदते समय हम आमतौर पर दो ही बातें देखते हैं फल ताजा हो और उसमें रस खूब निकले। अगर छिलका पतला हो, खुशबू तेज हो और हल्का-सा दबाते ही नींबू रसदार महसूस होने लगे तो समझिए हाथ में कागजी नींबू है। वही नींबू जो शिकंजी से लेकर अचार तक, हर स्वाद में तुरंत जान डाल देता है।
ऐसे तो कागजी नींबू पूरे देश में अलग-अलग इलाकों में उगाया जाता है। हालांकि कर्नाटक के विजयपुर जिले का इंडी इलाका इस नींबू की खास किस्म के कारण अपनी अलग पहचान बना चुका है। यहां का ‘इंडी लिम्बे’ अब GI टैग वाला नींबू है और इसकी चर्चा भारतीय बाजार से निकलकर विदेश तक पहुंचने लगी है।
कागजी नींबू क्या होता है
कागजी नींबू खट्टे फलों की लोकप्रिय किस्म है जिसका छिलका आमतौर पर बहुत पतला होता है। कागज जैसे पतले छिलके के कारण ही इसे ‘कागजी’ कहा जाता है। इस नींबू के अंदर का गूदा मुलायम होता है और अच्छी मात्रा में रस मिलता है।
सामान्य मोटे छिलके वाले नींबू की तुलना में कागजी नींबू को निचोड़ना आसान होता है। इसमें खटास भी ज्यादा होती है तो इसकी महक भी दूसरे नींबू की तुलना में ताजी होती है। यही कारण है कि इसे नींबू पानी, चाट, सलाद, चटनी और अचार बनाने के लिए खूब पसंद किया जाता है।
किस शहर की पहचान है कागजी नींबू
कागजी नींबू की खेती किसी एक शहर तक सीमित नहीं है। यह भारत के कई राज्यों में उगाया जाता है। मगर कर्नाटक के विजयपुर जिले का इंडी इलाका कागजी किस्म के खास नींबू के लिए जाना जाता है। यहां पैदा होने वाले नींबू को ‘इंडी लिम्बे’ या ‘इंडी लाइम’ कहा जाता है।
इंडी और इसके आसपास के सिंदगी जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से नींबू की खेती होती आ रही है। यहां का मौसम, कम वर्षा वाला वातावरण और मिट्टी मिलकर फल को खास स्वाद तथा खुशबू देते हैं। बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के कारण इंडी को ‘लैंड ऑफ लेमन’ (land of lemon) भी कहा जाता है।
क्या कागजी नींबू को मिला है GI टैग
देशभर में उगने वाले हर कागजी नींबू को GI टैग नहीं मिला है। GI पहचान विजयपुर जिले में पैदा होने वाले इंडी लिम्बे के नाम से दर्ज है। यह कागजी नींबू की क्षेत्रीय किस्म है।
इंडी लिम्बे को वर्ष 2023 में GI टैग मिला था। इस पहचान का मतलब है कि नींबू की खास गुणवत्ता, प्रतिष्ठा और विशेषताएं उसके मूल क्षेत्र विजयपुर से जुड़ी हैं। ICAR ने भी इसे विजयपुर जिले की प्रमुख बागवानी फसल बताते हुए इसके पतले छिलके, अधिक रस और बेहतर पाक उपयोग का उल्लेख किया है।
इंडी का कागजी नींबू क्यों है खास
इंडी लिम्बे का छिलका पतला और गूदा रसदार होता है। इसकी सुगंध तेज होती है, जबकि खट्टापन स्वाद को दबाने के बजाय उसे उभारता है। नींबू के आकार, रस की मात्रा और स्वाद के कारण बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है।
वैसे इंडी के नींबू का इस्तेमाल केवल शिकंजी, सलाद और अचार तक सीमित नहीं है। इसके रस से लेमनेड पाउडर और कॉन्सन्ट्रेट बनाए जा रहे हैं। छिलके तथा बीज का उपयोग साबुन, डिटर्जेंट, कॉस्मेटिक और कुछ औषधीय उत्पादों में भी किया जाता है।
इंडी लाइम की खेप संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन जैसे विदेशी बाजारों में भी भेजी जा चुकी है। PIB के अनुसार, केंद्र सरकार की संस्था APEDA ने इसे विजयपुर की खास कृषि पहचान बताते हुए इसकी तेज सुगंध, अधिक रस और संतुलित खट्टेपन को प्रमुख विशेषता माना है।
कागजी नींबू खरीदते समय कैसे पहचानें
बाजार में कागजी नींबू चुनते समय उसके आकार से अधिक वजन पर ध्यान दें। आकार के हिसाब से भारी नींबू में अक्सर रस ज्यादा होता है। छिलका पतला, चिकना और ताजा दिखाई देना चाहिए। हल्का दबाने पर थोड़ी नरमी महसूस हो, लेकिन नींबू बहुत पिलपिला न हो।
