Ameer Minai Shayari Urdu in Hindi: आज उर्दू शायरी के प्रसिद्ध शायरों में शुमार अमीर मीनाई की जंयती है। उनका जन्म 21 फरवरी 1829 को लखनऊ में हुआ। वे नवाबी दौर की तहजीब, नजाकत और अदबी रिवायतों के प्रतिनिधि माने जाते हैं। उनकी शायरी में इश्क, रूहानियत, नफासत और भाषा की मिठास साफ झलकती है।
वे शुरू में लखनऊ के सांस्कृतिक माहौल से जुड़े रहे, लेकिन 1857 के गदर के बाद हैदराबाद चले गए, जहां उन्हें दरबारी सरपरस्ती भी मिली। उनकी गजलों में दिलकशी और सादगी का अनोखा मेल मिलता है। अमीर मीनाई की शायरी में क्लासिकी रंग है, लेकिन भावनाएं बेहद सहज और मानवीय हैं।
Ameer Minai Shayari in Hindi
उनका मशहूर कलाम सरकती जाए है रुख से नकाब आहिस्ता-आहिस्ता आज भी महफिलों में बड़े शौक से पढ़ा और गाया जाता है। अमीर मीनाई की शायरी उर्दू अदब की उस परंपरा का हिस्सा है, जिसमें भाषा की खूबसूरती और एहसास की गहराई साथ-साथ चलती है। उनका योगदान उर्दू साहित्य में आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है। आइए पढ़ें अमीर मिनाई की कलम से निकले कुछ मशहूर शेर:
1. तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा
मुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है
2. कश्तियां सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं
नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है
3. हुए नामवर बे-निशाँ कैसे कैसे
ज़मीं खा गई आसमाँ कैसे कैसे
4. गाहे गाहे की मुलाक़ात ही अच्छी है 'अमीर'
क़द्र खो देता है हर रोज़ का आना जाना
5. ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर'
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है
6. कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं
शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर
7. वस्ल का दिन और इतना मुख़्तसर
दिन गिने जाते थे इस दिन के लिए
8. उल्फ़त में बराबर है वफ़ा हो कि जफ़ा हो
हर बात में लज़्ज़त है अगर दिल में मज़ा हो
9. आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन
मरता हूँ मैं जिस पर वो अदा और ही कुछ है
10. तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर
सरफ़रोशी की तमन्ना है तो सर पैदा कर
11. हंस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी
क्यूँ तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी
12. मांग लूं तुझ से तुझी को कि सभी कुछ मिल जाए
सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है
13. आंखें दिखलाते हो जोबन तो दिखाओ साहब
वो अलग बाँध के रक्खा है जो माल अच्छा है
