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उधार की कलम से लिखा वो गीत जिसके बिना अधूरा है 15 अगस्त का जश्न, सुनकर रो पड़े थे प्रधानमंत्री

Ae Mere Watan Ke logon Song: जब पहली बार यह गीत तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सुना को उनकी आंखें नम हो गई थीं। नेहरू कहते थे कि इस गीत से प्रेरित नहीं होता और इसे सुन जिसकी आंखों में आंसूं ना आए, वह सच्चा हिंदुस्तानी नहीं हो सकता।

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कैसे बना था ऐ मेरे वतन के लोगों (Photo: iStock)

Ae Mere Watan Ke logon Song Trivia: देश इस साल अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्त वह तारीख है जब हिंदुस्तान ने अंग्रेजों के गुलामी की बेड़ियों को तोड़ फेंका था। देश की आजादी के लिए कई मां भारती के कई वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। जब भी देश के लिए शहीद होने वाले जांबाज सिपाहियों की शहादत की बात आती है तो एक गीत जेहन में जरूर गूंजता है। यह गीत है - ऐ मेरे वतन के लोगों। यह गीत यूं तो 1962 में भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए बना था, लेकिन समय के साथ यह देशभक्ति का प्रतीक बन गया। यह गीत आज भी सुनने वालों को रुला देता है। यह गीत जितना ज्यादा मार्मिक है उतनी दिलचस्प इसके बनने की कहानी है।

किसने रचा था ऐ मेरे वतन के लोगों..?

सबसे पहले तो बता दें कि ऐ मेरे वतन के लोगों को लिखा था कवि प्रदीप ने। सुरों से सजाया था सी रामचंद्रन ने और इस कालजयी गीत को अपनी आवाज से हमेशा के लिए अमर किया लता मंगेशकर ने। यह गीत किसी फिल्म के लिए नहीं बल्कि तत्कालीन भारत सरकार की डिमांड पर बना था। पहली बार इस गीत को 27 जनवरी, 1963 में लाइव शो में गाया गया था।

कैसे बना था Ae Mere Watan ke logo

कवि प्रदीप ने एक इंटरव्यू में बताया था कि यह गाना कैसे बना। बात 1962 की है। भारत चीन से युद्ध में हार गया था। पूरे देश का मनोबल डाउन था। इसी माहौल में कवि प्रदीप एक शाम मुंबई में समुंदर किनारे टहल रहे थे। तभी उनके दिमाग में कुछ ऐसा सूझा कि उन्होंने उसे कागज पर उतारना चाहा। लेकिन तब ना तो उनके पास कलम थी और ना ही कागज। प्रदीप ने वहीं टहल रहे एक शख्स से कलम मांगी और अपनी जेब से सिगरेट का डिब्बा निकाल लिया। सिगरेट के पैकेट में जो फॉयल होता है उसे निकाला और उस पर कुछ लाइनें लिख लीं ताकि वह भूल ना जाएं।

कुछ दिनों बाद भारत सरकार की तरफ से दिल्ली में एक चैरिटी शो रखा गया। आयोजकों ने फिल्म वालों से कहा कि कुछ ऐसा गाना बनाएं कि सुनने वाले हार की गम भूल जाएं। बात प्रदीप तक पहुंची। उनसे भी कहा गया कि आप कोई जोश से भरा देशभक्ति गीत लिख दीजिए। उनके आग्रह पर प्रदीप ने उन्हीं चंद लाइनों से पूरा गीता बना लिया जो उन्होंने समुंदर किनारे टहलते हुए लिखी थी। गीत का मुखड़ा था- ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी। तो यूं बना था देशभक्ति का यह कालजयी गाना।

बता दें कि जब पहली बार यह गीत दिल्ली में लोगों के बीच लता मंगेशकर ने गाया तो वहां मौजूद प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की आंखें भी नम हो गई थीं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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