Shayari of The Day: निदा फाजली उर्दू और हिंदी शायरी के उन विरले शायरों में थे, जिन्होंने आम जिंदगी की भाषा में गहरी बात कहने की कला को साध लिया था। 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में जन्मे निदा फाजली का असली नाम मुक़्तिदा हसन निदा फ़ाजली था। बंटवारे के दौर की पीड़ा, टूटते रिश्ते और इंसानी अकेलापन उनकी शायरी के केंद्रीय विषय रहे। उनकी शायरी में भारी-भरकम शब्द नहीं होते थे। वह तो जीवन की सच्चाइयों से सजी होती थी। उन्होंने एक से बढ़कर एक खूबसूरत शेर लिखे हैं। उनका एक मशहूर शेर है:
“दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना,
मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना”
यह शेर कुछ शब्दों में जीवन का पूरा दर्शन समेट लेती हैं। इसके मायने दुनिया या चीजों से बहुत आगे के हैं। यह शेर इंसानी लालसा, आदत, मोह, असंतोष और पछतावे का असली चेहरा दिखाता है।
'दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना'
यहां ‘दुनिया’ का आशय बस भौतिक संसार नहीं है। इस दुनिया में वो सारी चीजें समाहित हैं जिनके पीछे इंसान भागता रहता है। फिर चाहे वह दौलत हो, पद हो, प्रेम हो, रिश्ते हो, शोहरत हो या सफलता हो। इस शेर में निदा फाजली ने दुनिया को 'जादू का खिलौना' माना है, यानी ऐसी चीज जो बाहर से बेहद आकर्षक दिखती है, पर असल में भ्रम पैदा करती है। जैसे खिलौना बच्चे को कुछ देर के लिए खुश करता है, वैसे ही दुनिया की चकाचौंध इंसान को पलभर का सुख देती है, स्थायी संतोष नहीं।
'मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना'
वहीं शेर की दूसरी पंक्ति को देखा जाए तो इसमें इंसानी स्वभाव का सबसे कड़वा सच छुपा है। जो चीज हमें नहीं मिलती, वही हमें सबसे कीमती लगती है। लेकिन जैसे ही वह हासिल हो जाती है, उसकी कीमत हमारे मन में गिर जाती है। निदा कहते हैं कि मिल जाने पर वही सपना, वही चाहत 'मिट्टी' जैसी साधारण और मूल्यहीन लगने लगती है। वहीं जो चीज हमारे पास नहीं रहती, वही अचानक अनमोल बन जाती है। कोई रिश्ता, कोई इंसान, कोई मौका या बीता हुआ समय, जब वह हाथ से निकल जाता है, तब उसकी कीमत समझ आती है।
यह शेर बताता है कि इंसान की समस्या कमी नहीं, आदत है। हमें चीजों से ज़्यादा, उन्हें पाने की चाह से लगाव होता है। चाह पूरी होते ही रोमांच खत्म हो जाता है। इसलिए इंसान हमेशा अगली चाह की तलाश में भटकता रहता है। यह शेर सीधे इंसान की मनोस्थिति पर वार करता है। हम जो पा लेते हैं, उसे हल्के में लेते हैं। जो नहीं मिलता, उसके पीछे जीवन बिता देते हैं। और जो चला जाता है, उसे सिरहाने रखकर रोते हैं। यही वजह है कि रिश्तों में, करियर में, जीवन में संतोष कम और शिकायत ज्यादा होती है।
निदा फाजली का यह शेर कहता है कि अगर हम मिलने वाली चीजों की क़द्र करना सीख लें, तो खोने का डर कम हो जाएगा। अगर हम वर्तमान में जीना सीख लें, तो अतीत सोना नहीं बनेगा और वर्तमान मिट्टी नहीं लगेगा।
