आज का सुविचार: कैसे कोहली बने 'विराट', सफलता की पहली सीढ़ी पर तय कर लिया था मुकाम
- Authored by: मेधा चावला
- Updated Dec 25, 2025, 11:26 AM IST
How to get success like Virat Kohli (आज का सुविचार): तमाम बड़े लोगों को सफल होते देख क्या आप भी यही सोचते हैं कि अरे ये तो भगवान की कृपा है। लेकिन कभी इसके मुकाम तक पहुंचने की उनकी मेहनत के बारे में सोचें। ये सोचें कि उन्होंने आपसे क्या अलग किया जो वे इस ऊंचाई को छू गए। आज का विचार अनुशासन, आदत और निरंतरता पर।
आज का सुविचार, विराट को कैसे मिली सफलता अपार
How to get success like Virat Kohli (आज का सुविचार): मोटिवेशन की किताबों में अक्सर आपको अनुशासन के बारे में पढ़ने को मिलता होगा। इनको जब आप कई सफल लोगों से जोड़कर देखेंगे तो समझ जाएंगे कि यही एक बात कैसे आपको सफलता की ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। छोटी से बड़ी सफलता अगर मिलती है तो उसके पीछे की एक कड़ी अनुशासन हमेशा होती है।
ये कहा भी तो गया है ना - अनुशासन आदत बनाता है, आदत निरंतरता लाती है और निरंतरता से विकास होता है।
अंग्रेजी में इस बात को ऐसे कहा जाता है - Discipline Leads to Habit, Habit Leads to Consistency, Consistency Leads to Growth.
यह कथन सिखाता है कि जीवन में बड़ी उपलब्धियां अचानक नहीं मिलतीं, बल्कि वे छोटे-छोटे सही फैसलों और रोजमर्रा के अनुशासन से बनती हैं। अनुशासन वह पहली सीढ़ी है, जिस पर चढ़े बिना आगे बढ़ना संभव नहीं। अगर इस सिद्धांत को किसी जीवंत उदाहरण से समझना हो, तो विराट कोहली से बेहतर उदाहरण शायद ही कोई हो।

अनुशान को विराट ने बनाया अपना साथी
विराट कोहली के करियर के शुरुआती दिनों में उनकी फिटनेस और तकनीक पर सवाल उठते थे। लेकिन उन्होंने खुद पर सख्त अनुशासन लागू किया। डाइट बदली, फिटनेस को प्राथमिकता दी और अभ्यास में निरंतरता लाई। यह अनुशासन धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। सुबह की ट्रेनिंग, सही भोजन, समय पर आराम - ये सब उनके लिए मजबूरी नहीं, बल्कि आदत बन गई।
जब अनुशासन आदत बनता है, तब वह बोझ नहीं रहता। आदतें हमें बिना ज्यादा सोचे सही काम करने की दिशा में ले जाती हैं। विराट के लिए फिटनेस और अभ्यास सिर्फ तैयारी नहीं, बल्कि जीवनशैली बन गई। यही आदतें उन्हें हर सीरीज, हर मैच और हर चुनौती के लिए तैयार रखती हैं।

अनुशासन से आदत बनती है जो हमें आगे ले जाती है
आदत से निरंतरता जन्म लेती है। निरंतरता का मतलब है कि अच्छे और बुरे दोनों समय में अपने प्रयास जारी रखना। विराट कोहली के करियर में भी तमाम उतार-चढ़ाव आए, कई फॉर्म खराब हुई, तीखी आलोचना हुई। लेकिन उनकी तैयारी और मेहनत में कमी नहीं आई। यही निरंतरता उन्हें मुश्किल दौर से बाहर निकालकर फिर शिखर तक ले गई।
अंततः निरंतरता विकास का रास्ता खोलती है। विकास सिर्फ आंकड़ों में नहीं दिखता, बल्कि मानसिक मजबूती, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में भी झलकता है। विराट कोहली का एक युवा बल्लेबाज से विश्वस्तरीय खिलाड़ी और कप्तान बनना इसी निरंतर विकास का प्रमाण है।
इसलिए, अगर हमें भी अपने जीवन में आगे बढ़ना है, चाहे करियर हो, स्वास्थ्य हो या कोई सपना तो हमें विराट कोहली की तरह अनुशासन अपनाना होगा, उसे आदत बनाना होगा और निरंतरता के साथ चलते रहना होगा। क्योंकि अंत में, विकास उसी का होता है जो रोज खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। और जो ऐसा करता है, वही 'विराट' सफलता पाता है।
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